58 वर्ष की आयु पूरी कर चुके दिव्यांग कर्मचारी होंगे सेवामुक्त

Update: 2026-07-12 12:04 GMT

चंडीगढ़। हरियाणा के शिक्षा विभाग में कार्यरत दिव्यांग कर्मचारियों और शिक्षकों के लिए एक बेहद बड़ी और महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। प्रदेश सरकार के माध्यमिक शिक्षा विभाग ने एक बड़ा प्रशासनिक फैसला लेते हुए विभाग में कार्यरत उन सभी दिव्यांग शिक्षकों और गैर-शिक्षक कर्मचारियों (Non-Teaching Staff) को सेवामुक्त करने का आदेश जारी कर दिया है, जो 58 वर्ष की आयु पूरी कर चुके हैं। सरकार का यह अहम निर्णय माननीय सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) तथा पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय (High Court) द्वारा समय-समय पर जारी किए गए कानूनी आदेशों और दिशा-निर्देशों पर आधारित है। इस फैसले के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है, लेकिन विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई पूरी तरह से कानूनी दायरे और नियमों के तहत की जा रही है।

माध्यमिक शिक्षा महानिदेशक कार्यालय की ओर से इस संबंध में प्रदेश के सभी सक्षम प्राधिकारियों, जिला शिक्षा अधिकारियों और संबंधित स्कूल प्राचार्यों को लिखित निर्देश जारी कर दिए गए हैं। आधिकारिक आदेशों के अनुसार, वित्त विभाग (Finance Department) द्वारा विगत 9 जुलाई को जारी किए गए दिशा-निर्देशों को आधार बनाते हुए यह कार्रवाई अमल में लाई जा रही है। आदेश में साफ कहा गया है कि जो भी दिव्यांग शिक्षक या गैर-शैक्षणिक कर्मचारी 58 साल की निर्धारित सेवानिवृत्ति आयु (Retirement Age) को पार कर चुके हैं, उन्हें तुरंत प्रभाव से उनके पदों से कार्यमुक्त यानी सेवानिवृत्त कर दिया जाए।

इस आदेश के सामने आने के बाद प्रभावित कर्मचारियों के मन में अपने एरियर, वेतन और पेंशन को लेकर कई तरह की आशंकाएं पैदा हो रही थीं। हालांकि, सरकार और शिक्षा विभाग ने इस मामले में मानवीय और कानूनी दोनों पक्षों का ध्यान रखते हुए कर्मचारियों को बड़ी राहत दी है। विभाग ने साफ किया है कि 58 वर्ष की आयु पूरी करने के बाद भी जिन कर्मचारियों ने अपनी सेवाएं जारी रखी थीं, उन्हें उनके पूरे कार्यकाल की अंतिम तिथि तक का पूरा वेतन (Salary), पेंशन (Pension) और अन्य सभी देय भत्ते नियमानुसार दिए जाएंगे। वे इन सभी सेवा लाभों के पूरी तरह से हकदार होंगे।

इसके साथ ही सरकार ने कर्मचारियों को एक और बड़ी राहत देते हुए स्पष्ट किया है कि सेवानिवृत्ति की आयु पार करने के बाद के सेवाकाल के दौरान यदि कर्मचारियों को कोई वित्तीय या सेवा लाभ दिया गया है, तो उसकी किसी भी प्रकार की रिकवरी (वसूली) नहीं की जाएगी। यानी कर्मचारियों को दिए गए किसी भी पिछले सेवा लाभ को वापस नहीं लिया जाएगा। विभाग का कहना है कि यह निर्णय पूरी तरह से न्यायसंगत है ताकि सेवानिवृत्त हो रहे दिव्यांग कर्मियों को अपने बुढ़ापे और जीवनयापन में किसी भी तरह की आर्थिक तंगी या मानसिक परेशानी का सामना न करना पड़े।

न्यायालयों के आदेशों का हवाला देते हुए शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने बताया कि सरकारी सेवाओं में सेवानिवृत्ति की एक निश्चित उम्र सीमा तय होती है। उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों के अनुपालन में ही इस विसंगति को दूर करने के लिए यह कदम उठाया गया है। माध्यमिक शिक्षा विभाग ने सभी जिला अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले स्कूलों और कार्यालयों से ऐसे सभी दिव्यांग शिक्षकों और कर्मचारियों का डेटा तुरंत खंगालें और उम्र सीमा पार कर चुके कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति की प्रक्रिया को बिना किसी देरी के पूरा करें।

इस फैसले का असर राज्य के सैकड़ों दिव्यांग शिक्षकों, क्लर्कों, और अन्य सहायक कर्मचारियों पर पड़ने की उम्मीद है। जहाँ एक तरफ इस फैसले से कुछ कर्मचारियों में असमंजस की स्थिति है, वहीं दूसरी तरफ विभाग द्वारा सभी सेवा लाभ और पेंशन सुरक्षित रखने के आश्वासन से उन्हें बड़ी राहत भी मिली है। आने वाले दिनों में सभी जिलों से सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों की अंतिम सूची तैयार कर ली जाएगी, जिसके बाद उन्हें आधिकारिक तौर पर सेवामुक्त कर उनके बनते वित्तीय लाभों का भुगतान कर दिया जाएगा।

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