नई दिल्ली। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद दिल्ली के जंतर-मंतर पर आंदोलन कर रहे छात्रों और समर्थकों के बीच खुशी का माहौल देखने को मिला। जननायक जनता पार्टी (जजपा) के युवा प्रदेश अध्यक्ष दिग्विजय सिंह चौटाला ने जंतर-मंतर पहुंचकर आंदोलनरत छात्रों के साथ तिरंगा लहराया और उनके संघर्ष को बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने छात्रों को बधाई देते हुए कहा कि लोकतंत्र में संघर्ष का परिणाम देर से जरूर मिलता है, लेकिन अगर आंदोलन शांतिपूर्ण और मजबूत इरादों के साथ किया जाए तो सफलता जरूर मिलती है।
दिग्विजय चौटाला ने कहा कि छात्रों ने अपनी मांगों को लेकर जिस तरह से लगातार संघर्ष किया, वह लोकतांत्रिक व्यवस्था में एक उदाहरण है। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी देवीलाल की नीति “संघर्ष सदैव सक्षम” का उल्लेख करते हुए कहा कि संघर्ष करने वालों की आवाज को लंबे समय तक दबाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की सबसे बड़ी खूबी यही है कि इसमें जनता की आवाज आखिरकार सुनी जाती है।
उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार और छात्रों के हितों को लेकर जजपा शुरुआत से ही आंदोलन के साथ खड़ी रही। उन्होंने बताया कि 17 जुलाई को पूर्व उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला, वह खुद और पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेता दिल्ली के जंतर-मंतर पहुंचे थे, जहां उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर भूख हड़ताल पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से मुलाकात की थी और आंदोलन को समर्थन दिया था।
दिग्विजय चौटाला ने कहा कि जजपा ने छात्रों के संघर्ष को केवल बयानबाजी तक सीमित नहीं रखा, बल्कि मैदान में उतरकर उनका साथ दिया। उन्होंने बताया कि 20 जुलाई को छात्रों द्वारा किए गए संसद मार्च के दौरान भी वह दिल्ली पहुंचे और आंदोलनकारियों के साथ खड़े रहे। इसके अलावा सिरसा में भी जंतर-मंतर की तर्ज पर अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में युवाओं और छात्रों ने भाग लिया।
उन्होंने कहा कि युवाओं की समस्याओं को लेकर सरकारों को संवेदनशील होना चाहिए। शिक्षा और रोजगार जैसे मुद्दे देश के भविष्य से जुड़े हुए हैं, इसलिए इन पर गंभीरता से निर्णय लेने की जरूरत है। उन्होंने छात्रों को भरोसा दिलाया कि युवाओं की आवाज उठाने का सिलसिला आगे भी जारी रहेगा।
वहीं, इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अभय सिंह चौटाला ने भी शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि जनता के आंदोलन को दबाया नहीं जा सकता। उन्होंने सवाल उठाया कि जब छात्रों ने पहली बार धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की थी, तब तत्काल कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
अभय चौटाला ने दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि आंदोलन के दौरान निहत्थे छात्र-छात्राओं पर कार्रवाई की गई। उन्होंने दिल्ली पुलिस कमिश्नर को पद से हटाने की मांग करते हुए कहा कि इस पूरे मामले में जिम्मेदारी तय होनी चाहिए और पुलिस प्रशासन को जवाब देना चाहिए।
जंतर-मंतर पर छात्रों का आंदोलन लंबे समय से शिक्षा व्यवस्था में सुधार, परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और कथित अनियमितताओं के खिलाफ चल रहा था। आंदोलनकारियों ने कई बार सरकार के सामने अपनी मांगें रखीं। अब शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के बाद समर्थकों ने इसे आंदोलन की बड़ी जीत बताया है।
राजनीतिक दलों ने भी इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रियाएं देना शुरू कर दिया है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि छात्रों की आवाज को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। वहीं, समर्थकों का मानना है कि यह लोकतांत्रिक संघर्ष की सफलता का उदाहरण है।
दिग्विजय चौटाला ने जंतर-मंतर पर तिरंगा लहराते हुए कहा कि युवाओं की ताकत और एकजुटता ने यह साबित कर दिया है कि लोकतंत्र में जनता की आवाज सबसे महत्वपूर्ण होती है। उन्होंने छात्रों से आगे भी शांतिपूर्ण तरीके से अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करने की अपील की।