चंडीगढ़। चंडीगढ़ के प्रतिष्ठित पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (पीजीआई) में मरीजों और उनके तीमारदारों से अधिक कीमत वसूलने तथा अग्नि सुरक्षा नियमों की अनदेखी के मामले में प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। पीजीआई के न्यू ओपीडी ब्लॉक में संचालित कैंटीन का लाइसेंस रद्द कर दिया गया है। संस्थान प्रशासन ने कैंटीन संचालक बलजीत सिंह को 31 दिसंबर 2026 तक परिसर खाली करने और उसका कब्जा संस्थान को सौंपने के निर्देश दिए हैं। कैंटीन में डीजल से चलने वाली भट्ठियों का इस्तेमाल करने और निर्धारित दरों से अधिक पैसे वसूलने की शिकायतों के बाद यह निर्णय लिया गया है। पीजीआई प्रशासन ने बार-बार नियमों के उल्लंघन और सुरक्षा संबंधी लापरवाही को कार्रवाई का प्रमुख आधार बनाया है।

न्यू ओपीडी ब्लॉक की कैंटीन का लाइसेंस रद्द

पीजीआई प्रशासन ने न्यू ओपीडी ब्लॉक में संचालित कैंटीन के खिलाफ लगातार मिल रही शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए यह कार्रवाई की है।

संस्थान की एस्टेट ब्रांच के अनुसार, कैंटीन संचालक को पहले भी कई बार नियमों के पालन के लिए निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद निरीक्षण के दौरान अनियमितताएं सामने आती रहीं।

मरीजों और तीमारदारों से निर्धारित दरों से अधिक रकम वसूलने के साथ अग्नि सुरक्षा नियमों की अनदेखी के मामले सामने आए थे।

इन शिकायतों और निरीक्षण रिपोर्टों के आधार पर प्रशासन ने कैंटीन का लाइसेंस समाप्त करने का निर्णय लिया।

इस कार्रवाई को अस्पताल परिसर में संचालित व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के लिए महत्वपूर्ण चेतावनी माना जा रहा है।

31 दिसंबर तक कैंटीन खाली करने के आदेश

पीजीआई प्रशासन ने लाइसेंस रद्द करने के साथ संचालक को कैंटीन परिसर खाली करने के लिए अंतिम समय सीमा भी निर्धारित कर दी है।

आदेश के अनुसार, संचालक बलजीत सिंह को 31 दिसंबर 2026 तक कैंटीन खाली करके परिसर का कब्जा संस्थान को सौंपना होगा।

निर्धारित अवधि में परिसर खाली नहीं किए जाने पर प्रशासन की ओर से आगे की कार्रवाई की जा सकती है।

पीजीआई ने स्पष्ट किया है कि समय सीमा के बाद परिसर पर कब्जा बनाए रखने की स्थिति में अनधिकृत कब्जे का शुल्क वसूला जा सकता है।

इसके अतिरिक्त नियमानुसार बेदखली की कार्रवाई भी की जा सकती है।

तीन साल के लिए दिया गया था कैंटीन का ठेका

पीजीआई की संपदा शाखा के अनुसार, न्यू ओपीडी ब्लॉक की कैंटीन का ठेका 19 अगस्त 2025 को बलजीत सिंह को आवंटित किया गया था।

यह लाइसेंस तीन वर्षों के लिए दिया गया था।

कैंटीन संचालन के लिए प्रति माह 20 लाख 20 हजार 202 रुपये का लाइसेंस शुल्क निर्धारित किया गया था। इसके अतिरिक्त वस्तु एवं सेवा कर यानी जीएसटी का भुगतान भी करना था।

इतनी बड़ी मासिक लाइसेंस राशि के बावजूद कैंटीन में नियमों के पालन को लेकर लगातार शिकायतें मिल रही थीं।

इन शिकायतों की जांच में सामने आई अनियमितताओं के कारण संस्थान प्रशासन ने तय अवधि पूरी होने से पहले ही लाइसेंस रद्द कर दिया।

मरीजों से ज्यादा पैसे वसूलने की शिकायतें

पीजीआई की न्यू ओपीडी कैंटीन में मरीजों और उनके परिजनों से खाद्य पदार्थों तथा पेयजल के लिए अधिक कीमत वसूलने की शिकायतें सामने आई थीं।

रिपोर्टों के अनुसार, कैंटीन में निर्धारित मूल्य से अधिक रकम लेने के मामले प्रशासन के संज्ञान में आए थे।

इससे पहले पानी की बोतलों पर भी अतिरिक्त राशि वसूलने के आरोप लगे थे।

जून 2026 में सामने आई शिकायतों के अनुसार, कुछ कैंटीनों में 20 रुपये की पानी की बोतल के लिए 30 रुपये तक वसूले जा रहे थे।

इस तरह की शिकायतों से अस्पताल में इलाज कराने आने वाले मरीजों और उनके तीमारदारों की परेशानियां बढ़ रही थीं।

डीजल भट्ठियों से खाना बनाने का मामला

कैंटीन का लाइसेंस रद्द होने के पीछे अग्नि सुरक्षा नियमों का उल्लंघन भी प्रमुख कारण रहा।

पीजीआई के फायर सेफ्टी विभाग को जानकारी मिली थी कि न्यू ओपीडी ब्लॉक की कैंटीन में डीजल से चलने वाली भट्ठियों का इस्तेमाल किया जा रहा है।

23 मई 2026 को फायर सेफ्टी विभाग ने कैंटीन का निरीक्षण किया था।

जांच के दौरान तीन डीजल भट्ठियां संचालित पाई गई थीं। अधिकारियों ने तत्काल कार्रवाई करते हुए तीनों भट्ठियों को जब्त कर लिया था।

पीजीआई परिसर की इमारतों के अंदर डीजल भट्ठियों का इस्तेमाल सुरक्षा कारणों से प्रतिबंधित है।

अधिकारियों ने उस समय मामले की जानकारी एस्टेट विभाग को भी दी थी, ताकि नियमानुसार कार्रवाई की जा सके।

आग लगने की आशंका से मरीजों की सुरक्षा को खतरा

पीजीआई की न्यू ओपीडी इमारत में प्रतिदिन बड़ी संख्या में मरीज और उनके परिजन पहुंचते हैं।

ऐसी इमारतों में अग्नि सुरक्षा नियमों का पालन बेहद आवश्यक होता है।

डीजल से चलने वाली भट्ठियों में आग लगने का जोखिम रहता है। अस्पताल जैसी संवेदनशील जगह पर ऐसी लापरवाही गंभीर परिणाम पैदा कर सकती है।

विशेष रूप से अस्पताल परिसर में ऐसे मरीज भी मौजूद होते हैं जिन्हें चलने-फिरने या आपातकालीन स्थिति में सुरक्षित बाहर निकलने में कठिनाई हो सकती है।

यही कारण है कि पीजीआई प्रशासन ने कैंटीन में डीजल भट्ठियों के इस्तेमाल को गंभीर सुरक्षा उल्लंघन माना।

तीन बार लगाया गया जुर्माना

पीजीआई प्रशासन ने लाइसेंस रद्द करने से पहले कैंटीन संचालक के खिलाफ आर्थिक दंड की कार्रवाई भी की थी।

संस्थान की संपदा शाखा के आदेश के अनुसार, विभिन्न निरीक्षणों में नियमों के उल्लंघन के बाद जुर्माने लगाए गए।

 सितंबर में लगाया गया जुर्माना जमा नहीं किए जाने की जानकारी भी सामने आई है।

बार-बार जुर्माना लगाए जाने के बाद भी नियमों के उल्लंघन की शिकायतें बनी रहीं।

प्रशासन ने इसे गंभीरता से लेते हुए लाइसेंस समाप्त करने की कार्रवाई की।

संचालक ने आरोपों को बताया निराधार

पीजीआई प्रशासन ने कैंटीन संचालक को कार्रवाई से पहले नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण देने का अवसर दिया था।

संचालक ने अपने जवाब में लगाए गए आरोपों को निराधार बताया।

हालांकि, संस्थान प्रशासन ने उनके जवाब को संतोषजनक नहीं माना।

निरीक्षण रिपोर्ट, पूर्व में लगाए गए जुर्माने और सुरक्षा नियमों के उल्लंघन से संबंधित तथ्यों के आधार पर लाइसेंस रद्द करने का निर्णय लिया गया।

इस प्रकार प्रशासन ने संबंधित संचालक का पक्ष सुनने के बाद अंतिम आदेश जारी किया।

बाहर से आने वाले मरीजों को होती है परेशानी

पीजीआई चंडीगढ़ में पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों से बड़ी संख्या में मरीज इलाज कराने पहुंचते हैं।

कई मरीजों और उनके परिजनों को अस्पताल में घंटों इंतजार करना पड़ता है।

ऐसे में कैंटीन उनके लिए भोजन, नाश्ते और पेयजल का महत्वपूर्ण साधन होती है।

अस्पताल परिसर में अधिक कीमत वसूलने की शिकायतें विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के लिए परेशानी का कारण बन सकती हैं।

इसीलिए निर्धारित मूल्य सूची का पालन और खाद्य सामग्री की गुणवत्ता सुनिश्चित करना आवश्यक है।

अस्पताल की अन्य कैंटीनों के लिए भी संदेश

न्यू ओपीडी ब्लॉक की कैंटीन के खिलाफ की गई कार्रवाई अस्पताल परिसर में संचालित अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के लिए भी महत्वपूर्ण संदेश है।

पीजीआई जैसे बड़े चिकित्सा संस्थान में मरीजों की सुविधा और सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

कैंटीन संचालकों के लिए निर्धारित मूल्य सूची, स्वच्छता, खाद्य सुरक्षा और अग्निशमन नियमों का पालन करना जरूरी है।

अब न्यू ओपीडी कैंटीन का लाइसेंस रद्द होने के बाद वहां भविष्य में खानपान की वैकल्पिक व्यवस्था कैसे की जाएगी, इस संबंध में विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है।

फिलहाल प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि नियमों की अनदेखी और मरीजों से अधिक वसूली के मामलों में कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।

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