हांसी: हरियाणा के हांसी शहर में बंदरों के बढ़ते उत्पात से परेशान लोगों को जल्द राहत मिल सकती है। नगर परिषद ने शहर में बंदरों को पकड़ने के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है। एक साल तक चलने वाले इस अभियान के लिए चार फर्मों ने आवेदन किया है। अब इन फर्मों के दस्तावेजों और पात्रता की जांच की जाएगी। इसके बाद योग्य फर्म को ठेका आवंटित किया जाएगा।
नगर परिषद ने इस बार बंदरों को पकड़ने से लेकर उन्हें सुरक्षित स्थान पर छोड़ने तक की पूरी प्रक्रिया के लिए कई शर्तें निर्धारित की हैं। चयनित ठेकेदार को अपने खर्च पर वाहन, पिंजरे और कर्मचारियों की व्यवस्था करनी होगी। ठेका एक वर्ष के लिए दिया जाएगा। अगर चयनित फर्म का काम संतोषजनक रहता है तो सक्षम अधिकारी की मंजूरी के बाद इसकी अवधि एक साल और बढ़ाई जा सकती है। नगर परिषद ने अभियान में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए फोटो और वीडियो रिकॉर्डिंग को अनिवार्य किया है। बंदर को पकड़ने, वाहन में ले जाने और सुरक्षित स्थान पर छोड़ने तक की पूरी प्रक्रिया की तारीख सहित फोटो और वीडियो बनानी होगी।
पकड़े गए बंदरों की संख्या भी नगर परिषद के कर्मचारियों की मौजूदगी में दर्ज की जाएगी। इसके बाद बंदरों को सुरक्षित स्थान पर छोड़ने से पहले उनकी चिकित्सकीय जांच करानी होगी। ठेकेदार को भुगतान लेने के लिए फोटो, वीडियो, मेडिकल जांच और अन्य जरूरी दस्तावेज नगर परिषद कार्यालय में जमा कराने होंगे। सभी दस्तावेजों की जांच के बाद ही भुगतान किया जाएगा।
इस व्यवस्था का उद्देश्य बंदरों की संख्या को लेकर किसी तरह के फर्जीवाड़े को रोकना और यह सुनिश्चित करना है कि पकड़े गए बंदरों को निर्धारित सुरक्षित स्थान पर ही छोड़ा जाए। हांसी के कई इलाकों में बंदरों के उत्पात की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं। लोगों का कहना है कि बंदर घरों में घुसकर सामान उठा ले जाते हैं और कपड़े खराब कर देते हैं। कई बार राहगीरों पर झपटने की घटनाएं भी सामने आती हैं।
बच्चों और बुजुर्गों के लिए समस्या ज्यादा गंभीर बताई जा रही है। बंदरों के डर के कारण कई इलाकों में लोग घरों की छतों और गलियों में जाने से भी बचते हैं। नगर परिषद के जेई प्रवीन के मुताबिक टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद चयनित फर्म को काम सौंप दिया जाएगा। इसके बाद शहर में अभियान शुरू होगा। पूरी कार्रवाई नगर परिषद अधिकारियों की निगरानी में कराई जाएगी।
हांसी में इससे पहले भी बंदरों को पकड़ने का अभियान चलाया जा चुका है। पिछले साल करीब 2,500 बंदरों को पकड़ने का काम ठेकेदार को दिया गया था। उस समय प्रति बंदर 925 रुपये की दर तय की गई थी और पूरे अभियान पर करीब 23 लाख रुपये खर्च हुए थे।
इतनी बड़ी संख्या में बंदरों को पकड़ने के बावजूद शहर के कई क्षेत्रों में उनकी संख्या दोबारा बढ़ गई। इसी समस्या को देखते हुए नगर परिषद ने अब एक साल के लिए फिर से टेंडर निकाला है।
शहरवासियों की मांग है कि इस बार अभियान को केवल चुनिंदा इलाकों तक सीमित नहीं रखा जाए। बंदरों से ज्यादा प्रभावित कॉलोनियों, बाजारों, स्कूलों और सार्वजनिक स्थानों पर भी अभियान चलाया जाए। फिलहाल चार फर्मों के आवेदन नगर परिषद के पास पहुंचे हैं। पात्रता और दस्तावेजों की जांच पूरी होने के बाद फर्म का चयन होगा। इसके बाद शहर में एक साल का बंदर पकड़ो अभियान शुरू किया जाएगा।
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