पलवल। शादी-ब्याह और सामाजिक आयोजनों में बढ़ते दिखावे, दहेज और फिजूलखर्ची पर लगाम लगाने के उद्देश्य से हरियाणा की खाप पंचायतों ने बड़ा कदम उठाया है। पलवल के मंडकोला गांव में रविवार को 36 बिरादरी और 52 पाल की महापंचायत आयोजित की गई। इसमें एनसीआर के अलग-अलग क्षेत्रों से करीब दस हजार लोगों के शामिल होने की बात कही गई है। महापंचायत में सामाजिक रीति-रिवाजों को सरल बनाने और परिवारों पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ को कम करने के उद्देश्य से सर्वसम्मति से 22 फैसले लिए गए।

इन फैसलों में सगाई महज एक रुपये में करने, शादी समारोहों में डीजे और शराब पर पूर्ण प्रतिबंध, मृत्यु भोज बंद करने और शादी में दिए जाने वाले जेवरात की सीमा निर्धारित करने जैसे प्रस्ताव प्रमुख हैं। महापंचायत का उद्देश्य ऐसे सामाजिक आयोजनों को दिखावे और प्रतिस्पर्धा से बाहर निकालकर सरल बनाने का बताया गया।

महापंचायत में मौजूद प्रतिनिधियों ने चिंता जताई कि समय के साथ शादी समारोहों में खर्च लगातार बढ़ रहा है। कई परिवार सामाजिक प्रतिष्ठा और दूसरों की बराबरी करने के दबाव में अपनी आर्थिक क्षमता से अधिक खर्च कर देते हैं। इसका सबसे ज्यादा असर आर्थिक रूप से कमजोर और मध्यम आय वाले परिवारों पर पड़ता है।

इसी समस्या को देखते हुए सगाई की रस्म को प्रतीकात्मक बनाने का फैसला लिया गया। महापंचायत ने एक रुपये में सगाई करने की व्यवस्था पर सहमति जताई। इसके पीछे संदेश यह है कि रिश्ते की शुरुआत पैसे और दिखावे के बजाय आपसी सहमति और सम्मान के साथ होनी चाहिए।

शादी समारोहों में डीजे पर प्रतिबंध लगाने का फैसला भी प्रमुखता से लिया गया। महापंचायत का मानना है कि डीजे पर होने वाला खर्च शादी के बजट को बढ़ाता है और कई बार तेज आवाज तथा देर रात तक संगीत के कारण आसपास के लोगों को भी परेशानी होती है। इसी तरह शादी समारोहों में शराब के इस्तेमाल पर भी पूर्ण पाबंदी लगाने का निर्णय लिया गया।

शराब पर प्रतिबंध के पीछे खर्च कम करने के साथ सामाजिक अनुशासन को भी प्रमुख कारण बताया गया। शादी और अन्य आयोजनों में शराब के कारण कई बार विवाद और अप्रिय घटनाएं होने की शिकायतें सामने आती हैं। महापंचायत ने इसे अनावश्यक खर्च और सामाजिक समस्या दोनों के रूप में देखते हुए रोक लगाने का फैसला किया।

दहेज और महंगे जेवरात से जुड़े दिखावे को नियंत्रित करने के लिए भी महापंचायत ने कदम उठाया है। शादी में जेवरात की सीमा निर्धारित करने का निर्णय लिया गया। इसका उद्देश्य परिवारों के बीच अधिक सोना या महंगे आभूषण देने की प्रतिस्पर्धा को रोकना है। महापंचायत का मानना है कि इस तरह की प्रतिस्पर्धा आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए बड़ा बोझ बन जाती है।

ग्रामीण और सामाजिक स्तर पर कई बार परिवार अपनी प्रतिष्ठा बनाए रखने के लिए कर्ज लेकर भी शादी में खर्च करते हैं। महंगे आयोजन, सजावट, खानपान, डीजे, शराब और जेवरात जैसी चीजें शादी का खर्च कई गुना बढ़ा देती हैं। महापंचायत के फैसलों का उद्देश्य इसी खर्च को नियंत्रित करना बताया जा रहा है।

मृत्यु भोज पर रोक लगाने का निर्णय भी 22 फैसलों में महत्वपूर्ण है। किसी परिवार में सदस्य की मृत्यु होने के बाद पहले से शोक में डूबे परिवार पर बड़े भोज के आयोजन का आर्थिक दबाव पड़ सकता है। महापंचायत ने इस परंपरा को रोकने का निर्णय लेकर शोकाकुल परिवारों को अतिरिक्त आर्थिक बोझ से बचाने का संदेश दिया।

महापंचायत में 36 बिरादरी और 52 पाल की भागीदारी को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आयोजकों के मुताबिक इन फैसलों को किसी एक समाज या समुदाय तक सीमित रखने के बजाय व्यापक स्तर पर लागू करने की सोच के साथ लिया गया है। अलग-अलग बिरादरियों के प्रतिनिधियों की सहमति से सामाजिक सुधारों को प्रभावी बनाने का प्रयास किया जाएगा।

मंडकोला में आयोजित इस महापंचायत में एनसीआर क्षेत्र से बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। करीब दस हजार लोगों की मौजूदगी का दावा किया गया है। इतनी बड़ी भागीदारी को आयोजक सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ सामूहिक सहमति के रूप में देख रहे हैं।

हालांकि ऐसे सामाजिक फैसलों का वास्तविक असर उनके पालन पर निर्भर करेगा। महापंचायत में प्रस्ताव पारित होने के बाद अब सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि गांव और समाज के स्तर पर लोग इन्हें अपनी इच्छा से कितना अपनाते हैं। सामाजिक परंपराओं में बदलाव केवल नियम बनाने से नहीं बल्कि लोगों की सहमति और व्यवहार में परिवर्तन से संभव होता है।

दहेज पहले से ही कानूनन प्रतिबंधित है। इसके बावजूद विभिन्न रूपों में दहेज की मांग या लेनदेन से जुड़ी शिकायतें सामने आती रहती हैं। ऐसे में महापंचायत की ओर से दहेज और दिखावे के खिलाफ सामाजिक स्तर पर अभियान चलाना कानून के साथ सामाजिक जागरूकता को भी मजबूती दे सकता है।

शादियों में होने वाली फिजूलखर्ची को लेकर देश के अलग-अलग हिस्सों में समय-समय पर समाज और पंचायत स्तर पर पहल होती रही है। कई समुदायों ने बारातियों की संख्या, भोजन में व्यंजनों की संख्या, महंगे उपहार और अन्य रस्मों पर सीमाएं तय करने की कोशिश की है। मंडकोला की महापंचायत के 22 फैसले भी इसी दिशा में बड़ा प्रयास बताए जा रहे हैं।

इन फैसलों का एक उद्देश्य विवाह को आर्थिक प्रदर्शन का माध्यम बनने से रोकना भी है। समाज में कई बार एक परिवार की महंगी शादी दूसरे परिवारों पर वैसा ही आयोजन करने का अप्रत्यक्ष दबाव पैदा करती है। इससे धीरे-धीरे खर्च की प्रतिस्पर्धा बढ़ती जाती है।

महापंचायत का संदेश है कि विवाह जैसे सामाजिक संस्कार को सरल और गरिमापूर्ण तरीके से संपन्न किया जाए। एक रुपये की सगाई, शराब और डीजे पर रोक तथा जेवरात की सीमा जैसे फैसलों के जरिए इसी सोच को आगे बढ़ाने की कोशिश की गई है।

मृत्यु भोज पर रोक का फैसला भी इसी सामाजिक सोच का विस्तार है। शोक के समय परिवार को आर्थिक खर्च में डालने के बजाय उसके साथ सहयोग और संवेदना रखने की जरूरत पर जोर दिया गया है।

अब मंडकोला महापंचायत के इन 22 फैसलों पर आसपास के गांवों और समुदायों की प्रतिक्रिया पर नजर रहेगी। यदि बड़ी संख्या में परिवार इन्हें अपनाते हैं तो शादी-ब्याह और अन्य सामाजिक आयोजनों में होने वाले अनावश्यक खर्च को कम करने की दिशा में इसका व्यापक प्रभाव देखने को मिल सकता है।

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