गुरुग्राम। मुख्यमंत्री के गुरुग्राम दौरे के दौरान काफिले के सामने कांग्रेस कार्यकर्ताओं के अचानक पहुंचकर काले झंडे दिखाने और ‘गो बैक’ के नारे लगाने के मामले में पुलिस विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। घटना में सुरक्षा और कानून-व्यवस्था में कथित लापरवाही बरतने के आरोप में कुल 10 पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है। निलंबित पुलिसकर्मियों में सिविल लाइंस थाने में तैनात नौ कर्मचारी शामिल हैं, जबकि एक पुलिसकर्मी एसआईएस ब्रांच से जुड़ा है।

जानकारी के अनुसार, सिविल लाइंस थाने में तैनात थाना प्रभारी विजेंद्र कुमार के अलावा दो एएसआई, हेड कांस्टेबल और कांस्टेबल स्तर के पुलिसकर्मियों पर भी कार्रवाई की गई है। एसआईएस ब्रांच में तैनात एएसआई अमित कुमार को भी निलंबित किया गया है। पुलिस विभाग की इस कार्रवाई को मुख्यमंत्री के दौरे के दौरान सुरक्षा व्यवस्था में हुई चूक को गंभीरता से लेने के रूप में देखा जा रहा है।

मुख्यमंत्री के गुरुग्राम पहुंचने पर हुआ प्रदर्शन

घटना शुक्रवार सुबह की बताई जा रही है। मुख्यमंत्री के गुरुग्राम आगमन के दौरान कांग्रेस जिला अध्यक्ष पंकज डावर और वर्धन यादव के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने अचानक सड़क पर पहुंचकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।

कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री के काफिले के सामने काले झंडे दिखाए और ‘गो बैक’ के नारे लगाए। मुख्यमंत्री का काफिला निर्धारित मार्ग से गुजर रहा था, इसी दौरान प्रदर्शनकारियों के सड़क पर पहुंचने से पुलिस प्रशासन में अफरा-तफरी की स्थिति पैदा हो गई।

प्रदर्शनकारियों को रोकने और मुख्यमंत्री के काफिले को सुरक्षित निकालने के लिए पुलिसकर्मियों को तत्काल मोर्चा संभालना पड़ा। हालांकि, प्रदर्शनकारी काफिले के सामने पहुंचने में सफल रहे। घटना के बाद सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस अधिकारियों ने रिपोर्ट तैयार की।

सुरक्षा में चूक को माना गया गंभीर मामला

मुख्यमंत्री जैसे वीआईपी के दौरे के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को बेहद संवेदनशील माना जाता है। निर्धारित रूट पर सुरक्षा घेरा बनाने से लेकर संभावित प्रदर्शन और विरोध की स्थिति से निपटने की जिम्मेदारी स्थानीय पुलिस की होती है।

ऐसे में प्रदर्शनकारियों का अचानक मुख्यमंत्री के काफिले के सामने पहुंच जाना पुलिस की तैयारियों पर सवाल खड़े करता है। विभागीय स्तर पर मामले की समीक्षा के बाद प्रथम दृष्टया लापरवाही के लिए संबंधित पुलिसकर्मियों को जिम्मेदार माना गया।

इसके बाद कुल 10 पुलिसकर्मियों को निलंबित करने की कार्रवाई की गई। कार्रवाई की जद में थाना प्रभारी से लेकर एएसआई, हेड कांस्टेबल और कांस्टेबल स्तर के कर्मचारी भी आए हैं।

सिविल लाइंस थाने के नौ पुलिसकर्मी कार्रवाई की जद में

निलंबित पुलिसकर्मियों में सबसे अधिक संख्या सिविल लाइंस थाने में तैनात कर्मचारियों की है। यहां तैनात एसएचओ विजेंद्र कुमार समेत नौ पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया है। इनमें दो एएसआई के अलावा हेड कांस्टेबल और कांस्टेबल भी शामिल हैं।

इसके अतिरिक्त एसआईएस ब्रांच में तैनात एएसआई अमित कुमार को भी निलंबित किया गया है। पुलिस विभाग की ओर से की गई इस कार्रवाई से स्पष्ट है कि मुख्यमंत्री की सुरक्षा में किसी भी स्तर पर हुई लापरवाही को गंभीरता से लिया जा रहा है।

कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने लगाए ‘गो बैक’ के नारे

मुख्यमंत्री के गुरुग्राम दौरे का विरोध करने पहुंचे कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने काले झंडे दिखाकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री के खिलाफ ‘गो बैक’ के नारे लगाए।

पंकज डावर और वर्धन यादव के नेतृत्व में हुए इस प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ता अचानक सड़क पर आ गए। पुलिस ने उन्हें रोकने का प्रयास किया, लेकिन कुछ समय के लिए स्थिति तनावपूर्ण हो गई।

मुख्यमंत्री के काफिले के गुजरने के दौरान प्रदर्शन होना प्रशासन के लिए चुनौती बन गया। काफिले की सुरक्षा को देखते हुए पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हटाने की कोशिश की और स्थिति को नियंत्रित किया।

घटना के बाद बढ़ी पुलिस की जवाबदेही

इस घटना के बाद पुलिस विभाग में सुरक्षा प्रबंधों को लेकर जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया तेज हुई। मुख्यमंत्री के कार्यक्रमों में स्थानीय पुलिस, खुफिया तंत्र और संबंधित सुरक्षा इकाइयों के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत होती है।

काफिले के मार्ग पर किसी भी तरह के विरोध प्रदर्शन की आशंका को देखते हुए पहले से सुरक्षा घेरा तैयार किया जाता है। इसके बावजूद प्रदर्शनकारियों का काफिले के सामने पहुंचना विभाग के लिए गंभीर विषय बन गया।

निलंबन की कार्रवाई के बाद अब संबंधित पुलिसकर्मियों की भूमिका और सुरक्षा व्यवस्था में हुई चूक की जांच भी की जा सकती है। इससे यह पता लगाने का प्रयास होगा कि प्रदर्शनकारियों को मौके तक पहुंचने से रोकने में किस स्तर पर कमी रही।

आगे भी कड़े सुरक्षा इंतजाम की संभावना

मुख्यमंत्री के काफिले के सामने प्रदर्शन की घटना के बाद भविष्य में ऐसे वीआईपी दौरों के दौरान सुरक्षा व्यवस्था और अधिक कड़ी किए जाने की संभावना है। खासकर संवेदनशील मार्गों और संभावित प्रदर्शन स्थलों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात करने तथा स्थानीय खुफिया सूचना को मजबूत करने पर जोर दिया जा सकता है।

फिलहाल 10 पुलिसकर्मियों के निलंबन की कार्रवाई ने मामले को गंभीर बना दिया है। मुख्यमंत्री के दौरे के दौरान हुई इस घटना ने जहां राजनीतिक विरोध को लेकर चर्चा छेड़ दी है, वहीं पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था और उसकी जिम्मेदारी पर भी सवाल खड़े किए हैं। विभागीय कार्रवाई के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच में सुरक्षा चूक के लिए किन कारणों को जिम्मेदार माना जाता है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

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