अहमदाबाद। गुजरात के अहमदाबाद जिले के साणंद तालुका स्थित वनालिया गांव में मां दुर्गा की भक्ति और अनूठी वास्तुकला का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। यहां शेर के आकार में एक भव्य दुर्गा मंदिर बनकर तैयार हो गया है, जिसे दुनिया का पहला शेर के आकार का दुर्गा मंदिर बताया जा रहा है। मंदिर की ऊंचाई लगभग 72 फीट और लंबाई 151 फीट है। इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें पारंपरिक हिंदू मंदिरों की तरह गुंबद, शिखर या ध्वजा नहीं है। मंदिर की पूरी संरचना मां दुर्गा के वाहन सिंह के आकार में तैयार की गई है। करीब 15 बीघा भूमि में विकसित इस भव्य धार्मिक परिसर में श्रद्धालुओं को एक ही स्थान पर 51 शक्तिपीठों के दर्शन कराने की व्यवस्था की गई है। मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा नवंबर 2026 में प्रस्तावित है। इसके लिए अंतिम तैयारियां शुरू हो चुकी हैं।
72 फीट ऊंचा और 151 फीट लंबा अनोखा मंदिर
साणंद तालुका के वनालिया गांव में तैयार किया गया यह मंदिर अपनी अनूठी बनावट के कारण चर्चा का विषय बना हुआ है। सामान्य रूप से हिंदू मंदिरों में ऊंचे शिखर, गुंबद और ध्वज देखने को मिलते हैं, लेकिन इस मंदिर की संरचना पूरी तरह अलग है।
यहां मंदिर को विशाल शेर के आकार में डिजाइन किया गया है। इसकी ऊंचाई 72 फीट और लंबाई 151 फीट बताई गई है। मंदिर का बाहरी स्वरूप दूर से ही सिंह की विशाल आकृति जैसा दिखाई देता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सिंह देवी दुर्गा का वाहन है और शक्ति, साहस तथा निर्भयता का प्रतीक माना जाता है। इसी अवधारणा को ध्यान में रखते हुए मंदिर का निर्माण किया गया है।
मंदिर के अनूठे स्वरूप को लेकर स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह है।
मंदिर में नहीं होगा पारंपरिक गुंबद और शिखर
इस मंदिर की सबसे खास बात इसकी वास्तुकला है। आमतौर पर बड़े मंदिरों में गुंबद, शिखर और ध्वजा प्रमुख आकर्षण होते हैं, लेकिन वनालिया में तैयार मंदिर में इन पारंपरिक संरचनाओं को शामिल नहीं किया गया है।
यहां पूरे मंदिर को ही मां दुर्गा के सिंह वाहन का स्वरूप दिया गया है। मंदिर की बाहरी बनावट धार्मिक प्रतीक और आधुनिक वास्तुकला के मेल का उदाहरण प्रस्तुत करती है।
निर्माण में इस बात का विशेष ध्यान रखा गया है कि सिंह की आकृति स्पष्ट दिखाई दे और मंदिर का धार्मिक महत्व भी बना रहे।
इस तरह मंदिर को केवल पूजा स्थल नहीं, बल्कि एक विशिष्ट धार्मिक और स्थापत्य संरचना के रूप में विकसित किया गया है।
200 से ज्यादा कारीगरों ने किया निर्माण
इस भव्य मंदिर को तैयार करने में बड़ी संख्या में कुशल कारीगरों ने योगदान दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, मंदिर निर्माण में 200 से अधिक कारीगरों ने काम किया।
निर्माण सामग्री के लिए महाराष्ट्र के औरंगाबाद से विशेष पत्थर मंगाए गए। मंदिर की विशाल संरचना और सिंह के आकार को तैयार करने में पत्थरों तथा अन्य निर्माण सामग्री का उपयोग किया गया।
इस परियोजना में धार्मिक अवधारणा को वास्तुकला के माध्यम से साकार करने का प्रयास किया गया है।
करीब 15 बीघा भूमि में फैला मंदिर परिसर श्रद्धालुओं के लिए एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल के रूप में विकसित किया जा रहा है।
परिसर में स्थापित होगा विशाल त्रिशूल
मंदिर परिसर में एक विशाल त्रिशूल भी स्थापित किया जा रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस त्रिशूल की लंबाई लगभग 355 फीट और ऊंचाई 84 फीट प्रस्तावित है।
हिंदू धार्मिक परंपराओं में त्रिशूल का विशेष महत्व है। इसे देवी दुर्गा और भगवान शिव से जुड़ा पवित्र प्रतीक माना जाता है।
विशाल त्रिशूल मंदिर परिसर के प्रमुख आकर्षणों में शामिल होगा। इसकी स्थापना से मंदिर के धार्मिक और स्थापत्य स्वरूप को और भव्यता मिलेगी।
हालांकि, त्रिशूल के निर्माण और स्थापना की अंतिम स्थिति के संबंध में विस्तृत आधिकारिक जानकारी की पुष्टि होना बाकी है।
एक ही परिसर में होंगे 51 शक्तिपीठों के दर्शन
इस मंदिर की एक अन्य महत्वपूर्ण विशेषता 51 शक्तिपीठों से जुड़ी धार्मिक व्यवस्था है।
मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं को एक ही स्थान पर 51 शक्तिपीठों के दर्शन का अनुभव उपलब्ध कराने की योजना है।
हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शक्तिपीठ देवी सती से जुड़े अत्यंत पवित्र तीर्थस्थल माने जाते हैं। देश और आसपास के क्षेत्रों में स्थित विभिन्न शक्तिपीठों का धार्मिक महत्व है।
वनालिया के इस मंदिर में 51 शक्तिपीठों से जुड़ी पवित्र ज्योतियां लाने की भी योजना बनाई गई है। प्राण-प्रतिष्ठा समारोह के दौरान इनका विशेष धार्मिक महत्व रहेगा।
नवंबर में आयोजित होगा प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव
मंदिर का प्रमुख निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। अब नवंबर 2026 में प्रस्तावित प्राण-प्रतिष्ठा समारोह की तैयारियां की जा रही हैं।
धार्मिक परंपराओं के अनुसार, प्राण-प्रतिष्ठा के दौरान वैदिक मंत्रोच्चार, विशेष पूजा और हवन जैसे अनुष्ठान किए जाते हैं।
इस मंदिर में भी प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव को भव्य स्वरूप देने की योजना है। समारोह के दौरान 51 शक्तिपीठों से पवित्र ज्योतियां लाने का कार्यक्रम प्रस्तावित है।
हालांकि, प्राण-प्रतिष्ठा की सटीक तारीख और विस्तृत कार्यक्रम की अंतिम आधिकारिक पुष्टि अभी उपलब्ध नहीं है।
श्रद्धालुओं के लिए विशेष सुविधाओं की व्यवस्था
मंदिर परिसर में आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए कई व्यवस्थाएं विकसित की जा रही हैं।
यहां चौबीस घंटे भंडारे की व्यवस्था, निःशुल्क ध्यान और साधना शिविर, प्रार्थना कक्ष तथा यज्ञ के लिए विशेष स्थान की योजना बनाई गई है।
इन सुविधाओं का उद्देश्य श्रद्धालुओं को दर्शन के साथ आध्यात्मिक गतिविधियों में भाग लेने का अवसर उपलब्ध कराना है।
मंदिर के गर्भगृह में एक साथ लगभग 300 श्रद्धालुओं के दर्शन करने की क्षमता बताई गई है।
इससे बड़ी संख्या में आने वाले भक्तों के लिए दर्शन व्यवस्था को सुचारू बनाने में मदद मिल सकती है।
धार्मिक पर्यटन का नया केंद्र बनने की संभावना
अहमदाबाद जिले के साणंद क्षेत्र में इस अनोखे मंदिर के निर्माण से धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने की संभावना है।
शेर के आकार में तैयार मंदिर की वास्तुकला देशभर के श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन सकती है।
स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि मंदिर में नियमित रूप से श्रद्धालुओं के आने से आसपास के क्षेत्रों में व्यापार और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
विशेष रूप से होटल, परिवहन, प्रसाद सामग्री और अन्य स्थानीय व्यवसायों को लाभ मिलने की संभावना है।
फिलहाल वनालिया गांव में तैयार इस अनोखे दुर्गा मंदिर को लेकर उत्साह बना हुआ है। मंदिर की अंतिम सजावट और प्राण-प्रतिष्ठा की तैयारियां जारी हैं।