अहमदाबाद। देश की पहली बुलेट ट्रेन का इंतजार कर रहे लोगों के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है। मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल परियोजना के निर्माण में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई है। गुजरात के नवसारी जिले में स्थित बिलिमोरा में बुलेट ट्रेन को बिजली उपलब्ध कराने वाला पहला ट्रैक्शन सबस्टेशन लगभग बनकर तैयार हो गया है। नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) के अनुसार, इस सबस्टेशन में आवश्यक उपकरणों की स्थापना का प्रमुख कार्य पूरा हो चुका है और फिलहाल परीक्षण तथा कमीशनिंग की प्रक्रिया चल रही है। मुंबई से अहमदाबाद के बीच 508 किलोमीटर लंबे बुलेट ट्रेन कॉरिडोर पर कुल 14 ट्रैक्शन सबस्टेशन बनाए जा रहे हैं। इनमें गुजरात में नौ और महाराष्ट्र में पांच सबस्टेशन शामिल हैं। खास बात यह है कि गुजरात के सूरत-बिलिमोरा सेक्शन पर बुलेट ट्रेन का शुरुआती परीक्षण और संचालन शुरू करने की योजना है। ऐसे में बिजली आपूर्ति से जुड़े बुनियादी ढांचे का तैयार होना परियोजना के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
बिलिमोरा में 18 हजार वर्ग मीटर में बना सबस्टेशन
नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड के अनुसार, बिलिमोरा में स्थापित किया जा रहा पहला ट्रैक्शन सबस्टेशन लगभग 18 हजार वर्ग मीटर क्षेत्र में फैला हुआ है।यह अत्याधुनिक सबस्टेशन बुलेट ट्रेन के संचालन के लिए जरूरी बिजली उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।इसके कंट्रोल पैनल, चेंजओवर स्विच, ट्रांसफॉर्मर और सर्किट ब्रेकर भवनों में उपकरणों की स्थापना का काम पूरा हो चुका है।इसके अलावा सबस्टेशन परिसर में सभी जरूरी गैंट्री टावर और बीम स्थापित किए जा चुके हैं।फिलहाल उपकरणों की टेस्टिंग और कमीशनिंग की प्रक्रिया जारी है। इसके पूरा होने के बाद संबंधित विद्युत प्रणाली को निर्धारित तकनीकी और सुरक्षा परीक्षणों के अनुसार संचालन के लिए तैयार किया जाएगा।हालांकि, सबस्टेशन के लगभग तैयार होने का मतलब यह नहीं है कि उससे बुलेट ट्रेन का व्यावसायिक संचालन शुरू हो गया है।
508 किलोमीटर के रूट पर बनेंगे 14 बिजलीघर
मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना के लिए बिजली आपूर्ति की विशेष व्यवस्था विकसित की जा रही है।पूरे 508 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर पर 14 ट्रैक्शन सबस्टेशन स्थापित किए जाएंगे।इनमें गुजरात के नौ स्थानों पर सबस्टेशन बनाए जा रहे हैं। ये स्थान वापी, बिलिमोरा, सूरत, भरूच, वडोदरा, आनंद, मेहमदाबाद, अहमदाबाद और साबरमती डिपो हैं।वहीं, महाराष्ट्र में मुंबई, ठाणे, विरार, बोइसर और ठाणे डिपो में पांच सबस्टेशन स्थापित किए जाएंगे।इन सबस्टेशनों का उद्देश्य पूरे कॉरिडोर में बिजली का वितरण इस तरह करना है कि तेज रफ्तार से चलने वाली ट्रेन को लगातार आवश्यक विद्युत ऊर्जा मिलती रहे।हर सबस्टेशन अपने निर्धारित क्षेत्र में ओवरहेड इलेक्ट्रिक लाइन को बिजली उपलब्ध कराएगा।
कैसे मिलेगी बुलेट ट्रेन को बिजली?
बुलेट ट्रेन को चलाने के लिए सामान्य रेल सेवाओं की तुलना में अधिक उन्नत विद्युत आपूर्ति प्रणाली की आवश्यकता होती है।मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर में 2×25 किलोवोल्ट ट्रैक्शन पावर सप्लाई सिस्टम का इस्तेमाल किया जाएगा।इस प्रणाली में बिजली पहले मुख्य ग्रिड से ट्रैक्शन सबस्टेशन तक पहुंचेगी। इसके बाद सबस्टेशन बिजली को आवश्यक वोल्टेज में बदलकर रेलवे ट्रैक के ऊपर लगे इलेक्ट्रिक तारों तक पहुंचाएगा।इन्हीं ओवरहेड तारों के माध्यम से बुलेट ट्रेन को बिजली मिलेगी।बिलिमोरा सबस्टेशन को गुजरात एनर्जी ट्रांसमिशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड यानी GETCO के 220 किलोवोल्ट अंबेठा ग्रिड सबस्टेशन से बिजली उपलब्ध कराई जाएगी।यह तकनीक 320 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार से चलने वाली ट्रेनों को स्थिर और भरोसेमंद विद्युत आपूर्ति उपलब्ध कराने के लिए डिजाइन की गई है।
सूरत-बिलिमोरा सेक्शन पर होगा शुरुआती ट्रायल
मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना के अंतर्गत गुजरात के सूरत और बिलिमोरा के बीच शुरुआती परीक्षण की तैयारी की जा रही है।इस सेक्शन पर ओवरहेड इलेक्ट्रिफिकेशन मस्तूलों की स्थापना और ट्रैक से जुड़े अन्य निर्माण कार्य आगे बढ़ रहे हैं।रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सितंबर 2026 में जानकारी दी थी कि बुलेट ट्रेन के परीक्षण के लिए पहला टेस्ट कोच तैयार किया जा चुका है।सूरत-बिलिमोरा सेक्शन को 2027 में संचालन के लिए तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है।हालांकि, वास्तविक ट्रायल रन की तारीख आवश्यक सुरक्षा परीक्षणों, ट्रैक की तैयारी और विद्युत प्रणाली की कमीशनिंग के बाद ही तय होगी।इसलिए अभी किसी निश्चित तारीख पर बुलेट ट्रेन का ट्रायल शुरू होने का दावा करना जल्दबाजी होगी।
320 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ेगी ट्रेन
मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर को 320 किलोमीटर प्रति घंटे की परिचालन गति के लिए डिजाइन किया जा रहा है।इस परियोजना में जापान की शिंकानसेन हाई-स्पीड रेल तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है।बुलेट ट्रेन शुरू होने के बाद मुंबई और अहमदाबाद के बीच यात्रा का समय कम होने की उम्मीद है।इस परियोजना के तहत यात्रियों को आधुनिक स्टेशन, बेहतर सुरक्षा व्यवस्था और तेज परिवहन सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना है।रेलवे
अधिकारियों
के अनुसार, यह देश में भविष्य की अन्य हाई-स्पीड रेल परियोजनाओं के लिए भी महत्वपूर्ण अनुभव साबित होगी।
12 स्टेशनों पर रुकेगी बुलेट ट्रेन
मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन कॉरिडोर पर कुल 12 स्टेशन बनाए जा रहे हैं।इनमें मुंबई, ठाणे, विरार, बोइसर, वापी, बिलिमोरा, सूरत, भरूच, वडोदरा, आनंद, अहमदाबाद और साबरमती शामिल हैं।परियोजना महाराष्ट्र, गुजरात और केंद्रशासित प्रदेश दादरा एवं नगर हवेली से होकर गुजरेगी।इन स्टेशनों को आधुनिक सुविधाओं और स्थानीय परिवहन व्यवस्था से जोड़ने की योजना है।कई स्टेशनों पर निर्माण कार्य महत्वपूर्ण चरण में पहुंच चुका है, जबकि अन्य स्थानों पर सिविल इंजीनियरिंग और ट्रैक निर्माण का काम जारी है।
सितंबर तक 62 प्रतिशत से अधिक काम पूरा
सितंबर 2026 में सामने आई आरटीआई आधारित जानकारी के अनुसार, मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना का लगभग 62.16 प्रतिशत भौतिक निर्माण कार्य पूरा हो चुका था।परियोजना के लिए आवश्यक भूमि अधिग्रहण भी पूरा होने की जानकारी दी गई थी।इस विशाल परियोजना में एलिवेटेड ट्रैक, रेलवे स्टेशन, नदी पुल, सुरंग, विद्युत आपूर्ति व्यवस्था और अन्य तकनीकी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं।रेलवे अधिकारियों के अनुसार, सभी निर्माण कार्यों के साथ सुरक्षा मानकों का पालन करना भी आवश्यक है।बुलेट ट्रेन का संचालन शुरू करने से पहले ट्रैक, सिग्नलिंग, विद्युत व्यवस्था और ट्रेन के प्रदर्शन से संबंधित कई स्तरों पर परीक्षण किए जाएंगे।
बिजली आपूर्ति की होगी रियल टाइम निगरानी
मुंबई-अहमदाबाद कॉरिडोर में बिजली आपूर्ति की निगरानी के लिए एक केंद्रीकृत नियंत्रण प्रणाली भी विकसित की जा रही है।इसके माध्यम से पूरे रूट पर बिजली की उपलब्धता और तकनीकी स्थिति की रियल टाइम निगरानी की जा सकेगी।कॉरिडोर पर 31 स्विचिंग पोस्ट और 16 डिस्ट्रीब्यूशन सबस्टेशन बनाने की भी योजना है।डिस्ट्रीब्यूशन सबस्टेशन स्टेशन भवनों, सिग्नलिंग, रखरखाव केंद्रों और अन्य सुविधाओं को बिजली उपलब्ध कराने में मदद करेंगे।इससे बिजली की आपूर्ति संबंधी समस्याओं की पहचान और आवश्यक तकनीकी कार्रवाई करने में सुविधा होगी।
बुलेट ट्रेन के सपने को मिलेगी रफ्तार
बिलिमोरा में पहले ट्रैक्शन सबस्टेशन का निर्माण अंतिम चरण में पहुंचना मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना की महत्वपूर्ण उपलब्धि है।इससे संकेत मिलता है कि निर्माण कार्य अब ट्रैक और स्टेशनों के साथ विद्युत आपूर्ति की तैयारियों में भी आगे बढ़ रहा है।रेलवे अधिकारियों का लक्ष्य पहले चरण में गुजरात के चयनित सेक्शन को परीक्षण और संचालन के लिए तैयार करना है।हालांकि, पूरे 508 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर के व्यावसायिक संचालन की अंतिम तारीख अभी सुनिश्चित नहीं है।
Tags: