गांधीनगर। गुजरात में कम बारिश के कारण खेती-किसानी पर पड़े प्रतिकूल प्रभाव को देखते हुए मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने राज्य के चार जिलों को सूखाग्रस्त घोषित करने का निर्णय लिया है। इस फैसले का उद्देश्य प्रभावित किसानों को राहत पहुंचाना और कृषि क्षेत्र में हुए नुकसान से उबरने में उनकी मदद करना है। बारिश की कमी के चलते कई इलाकों में फसलों की वृद्धि प्रभावित हुई है, जबकि किसानों के सामने सिंचाई और पशुओं के चारे की व्यवस्था जैसी चुनौतियां खड़ी हो गई हैं।
कम बारिश से किसानों की बढ़ी मुश्किलें
गुजरात के कई हिस्सों में खेती काफी हद तक मानसूनी बारिश पर निर्भर करती है। ऐसे में सामान्य से कम वर्षा होने पर किसानों को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ता है। पर्याप्त पानी नहीं मिलने से फसलों की पैदावार प्रभावित होने की आशंका बढ़ जाती है। विशेष रूप से छोटे और सीमांत किसानों के लिए यह स्थिति आर्थिक चिंता का कारण बन सकती है।कम बारिश का असर केवल खेतों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी पड़ता है। कृषि मजदूरों की आय, पशुपालन और स्थानीय बाजारों में आर्थिक गतिविधियां भी प्रभावित हो सकती हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने सूखे से प्रभावित क्षेत्रों में राहत पहुंचाने की दिशा में कदम उठाया है।
सूखाग्रस्त घोषित होने से राहत का रास्ता साफ
चार जिलों को सूखाग्रस्त घोषित किए जाने के बाद वहां के पात्र किसानों को सरकारी नियमों के अनुसार सहायता उपलब्ध कराने का रास्ता खुल सकता है। सूखा राहत के तहत फसल नुकसान का आकलन, आर्थिक सहायता, कृषि संबंधी योजनाओं का लाभ और अन्य राहत उपायों पर कार्रवाई की जा सकती है।हालांकि, किसानों को मिलने वाली सहायता की राशि, पात्रता की शर्तें और वितरण की प्रक्रिया संबंधित सरकारी आदेशों के अनुसार निर्धारित होगी। किसानों के लिए यह जानना महत्वपूर्ण होगा कि राहत पाने के लिए किन दस्तावेजों और प्रक्रियाओं की आवश्यकता होगी।
इन चार जिलों को किया गया सूखाग्रस्त घोषित
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने सोमवार, 26 अक्टूबर 2026 को घोषणा की कि देवभूमि द्वारका, कच्छ, जामनगर और पोरबंदर को सूखाग्रस्त घोषित किया गया है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष गुजरात में औसतन 89 प्रतिशत बारिश दर्ज की गई, लेकिन इन चार जिलों में वर्षा काफी कम हुई।मुख्यमंत्री के अनुसार, केंद्र सरकार की सूखा निर्धारण संबंधी 2016 की गाइडलाइन के तहत आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के बाद यह निर्णय लिया गया है। सूखा घोषणा छह महीने तक प्रभावी रहेगी और राहत उपाय एक नवंबर से लागू होंगे।
किसानों को प्रति हेक्टेयर 8,500 रुपये की सहायता
राज्य सरकार ने प्रभावित किसानों को राज्य आपदा मोचन निधि (एसडीआरएफ) के नियमों के तहत आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। फसल नुकसान झेलने वाले पात्र किसानों को प्रति हेक्टेयर 8,500 रुपये दिए जाएंगे। यह सहायता अधिकतम दो हेक्टेयर भूमि तक सीमित होगी। इस प्रकार पात्र किसान को अधिकतम 17,000 रुपये की मदद मिल सकेगी।सरकार का कहना है कि इस आर्थिक सहायता से किसानों को फसल नुकसान के कारण पैदा हुई वित्तीय परेशानियों से कुछ राहत मिलेगी।
पशुपालकों के लिए चारे और आर्थिक मदद की व्यवस्था
सूखे से प्रभावित क्षेत्रों में पशुपालकों की परेशानियों को देखते हुए सरकार ने विशेष व्यवस्था की है। मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में दो रुपये प्रति किलोग्राम की रियायती दर पर अब तक 1.21 करोड़ किलोग्राम चारा वितरित किया जा चुका है। सरकार के पास लगभग तीन करोड़ किलोग्राम चारे का भंडार भी उपलब्ध है।इसके अतिरिक्त पशु आश्रय स्थलों में रखे जाने वाले पशुओं के लिए प्रतिदिन 80 रुपये प्रति पशु की सहायता देने की घोषणा की गई है। इसका उद्देश्य सूखे के दौरान पशुओं की देखभाल और चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करना है।
ग्रामीण परिवारों को मिलेगा 150 दिन का रोजगार
सरकार ने सूखाग्रस्त जिलों में ग्रामीण परिवारों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने का भी निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री के अनुसार, वीबी-जी राम जी योजना के अंतर्गत प्रभावित क्षेत्रों में 150 दिनों का रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा।इस पहल का उद्देश्य कृषि गतिविधियों में कमी आने के कारण प्रभावित ग्रामीण परिवारों को आय का वैकल्पिक साधन उपलब्ध कराना है। सरकार ने राहत योजनाओं को एक नवंबर से लागू करने की घोषणा की है।
पेयजल और सिंचाई की व्यवस्था पर भी ध्यान
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य के 206 प्रमुख बांधों में लगभग 66 प्रतिशत जल भंडारण उपलब्ध है। आगामी रबी सीजन में सिंचाई के लिए 76 बांधों के कमांड क्षेत्रों में पानी उपलब्ध कराने की योजना तैयार की गई है। वहीं पेयजल की जरूरतों को प्राथमिकता देते हुए 30 जून 2027 तक के लिए पानी सुरक्षित रखने की व्यवस्था की गई है।राज्य सरकार के इस फैसले से प्रभावित जिलों के किसानों और पशुपालकों को राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि, राहत योजनाओं का वास्तविक लाभ पात्र किसानों तक समय पर पहुंचाना प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण होगा।