फ्लाईदुबई के भारतीय पायलट कैप्टन स्मित माछर को मिलेगा ‘विशिष्ट गुजरात गरिमा पुरस्कार’
अहमदाबाद। दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की उड़ान में बड़े हादसे को टालने वाले भारतीय पायलट कैप्टन स्मित माछर की बहादुरी और सूझबूझ की देश-दुनिया में सराहना हो रही है। गुजरात सरकार ने गुरुवार को घोषणा की कि कैप्टन स्मित माछर को उनकी असाधारण वीरता के लिए राज्य के प्रतिष्ठित ‘विशिष्ट गुजरात गरिमा पुरस्कार’ से सम्मानित किया जाएगा। गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने उनकी बहादुरी की प्रशंसा करते हुए पुरस्कार की घोषणा की।
फ्लाईदुबई की फ्लाइट दुबई से तेल अवीव जा रही थी। उड़ान के दौरान कॉकपिट के अंदर अचानक गंभीर स्थिति पैदा हो गई। आरोप है कि ओमान से ताल्लुक रखने वाले को-पायलट ने कैप्टन स्मित माछर पर हमला कर दिया। शुरुआती जानकारी में हमले में चाकू इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई, हालांकि हमले में इस्तेमाल हथियार को लेकर अलग-अलग विवरण भी सामने आए हैं।
हमले में कैप्टन स्मित गंभीर रूप से घायल हो गए। इसके बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और परिस्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश जारी रखी। घायल अवस्था में भी उन्होंने कॉकपिट का दरवाजा खोल दिया, जिससे विमान में मौजूद अन्य क्रू सदस्यों और यात्रियों को स्थिति का पता चल सका। इसके बाद हमलावर को काबू करने में मदद मिली।
घटना के दौरान विमान में 174 यात्री सवार थे। गंभीर आपात स्थिति के बीच विमान को सऊदी अरब के तबुक में सुरक्षित उतारा गया। सभी यात्रियों की जान बच गई। कैप्टन स्मित की त्वरित सूझबूझ और साहस को हादसा टालने में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
गुजरात सरकार ने कहा है कि इस असाधारण साहस के लिए कैप्टन स्मित को ‘विशिष्ट गुजरात गरिमा पुरस्कार’ प्रदान किया जाएगा। सरकार ने उनकी कार्रवाई को साहस, जिम्मेदारी और कर्तव्यनिष्ठा का उदाहरण बताया है।
कैप्टन स्मित माछर का गुजरात से भी जुड़ाव है। इसी कारण गुजरात में उनकी बहादुरी को लेकर विशेष गर्व व्यक्त किया जा रहा है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने कहा कि कैप्टन ने कठिन परिस्थितियों में असाधारण साहस दिखाकर न केवल यात्रियों की जान बचाने में अहम भूमिका निभाई, बल्कि देश और गुजरात का भी गौरव बढ़ाया।
पूरे घटनाक्रम में सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद कैप्टन स्मित ने अपनी जिम्मेदारी नहीं छोड़ी। कॉकपिट के भीतर हुए हमले के बाद उनके सामने अपनी जान बचाने के साथ विमान में मौजूद यात्रियों की सुरक्षा की भी चुनौती थी।
बताया गया कि हमले के बाद विमान की स्थिति बेहद गंभीर हो गई थी। ऐसे समय में कैप्टन स्मित ने कॉकपिट का दरवाजा खोलकर बाहर मौजूद लोगों को स्थिति से अवगत कराया। इसके बाद यात्रियों और अन्य क्रू सदस्यों की सहायता से आरोपी को नियंत्रित किया गया।
विमान में मौजूद अन्य प्रशिक्षित लोगों ने भी स्थिति संभालने में मदद की और विमान की सुरक्षित इमरजेंसी लैंडिंग सुनिश्चित की गई। विमान को सऊदी अरब के तबुक में उतारा गया।
घटना के बाद कैप्टन स्मित को उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया। उन्हें गंभीर चोटें आई थीं, लेकिन उनकी हालत स्थिर बताई गई। उनकी बहादुरी के लिए भारत में भी व्यापक स्तर पर सराहना हुई है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कैप्टन स्मित माछर के साहस की प्रशंसा करते हुए कहा कि गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद उन्होंने दूसरों की जान बचाने के लिए अदम्य साहस और दृढ़ संकल्प दिखाया। प्रधानमंत्री ने उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना भी की।
घटना के बाद विमान सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठे हैं। खास तौर पर इस बात की जांच की जा रही है कि कॉकपिट में ऐसी स्थिति कैसे पैदा हुई और हमले में इस्तेमाल वस्तु वहां तक कैसे पहुंची। संबंधित अधिकारी पूरे घटनाक्रम की जांच कर रहे हैं।
कैप्टन स्मित के साहस का सबसे बड़ा उदाहरण यह माना जा रहा है कि गंभीर चोटों के बावजूद उन्होंने घबराहट में कोई ऐसा कदम नहीं उठाया जिससे विमान में सवार लोगों की जान खतरे में पड़ती। इसके उलट उन्होंने परिस्थिति को समझते हुए वह कदम उठाया जिससे अन्य लोगों को कॉकपिट तक पहुंचने और हमलावर को रोकने का मौका मिला।
विमान में सवार यात्रियों के लिए कुछ समय बेहद तनावपूर्ण रहा। अचानक पैदा हुई आपात स्थिति से यात्रियों में भय का माहौल था, लेकिन स्थिति पर नियंत्रण पाने के बाद विमान को सुरक्षित उतार लिया गया।
इस घटना ने एक बार फिर यह दिखाया कि विमान में आपात स्थिति के दौरान पायलट, क्रू मेंबर्स और यात्रियों के बीच समन्वय कितना महत्वपूर्ण होता है।
कैप्टन स्मित का पेशेवर अनुभव भी कठिन समय में उपयोगी साबित हुआ। लंबे समय से विमानन क्षेत्र से जुड़े स्मित ने अत्यधिक दबाव के बीच धैर्य बनाए रखा और उपलब्ध विकल्पों का इस्तेमाल कर खतरे को कम करने की कोशिश की।
उनकी इसी बहादुरी को देखते हुए गुजरात सरकार ने राज्य के प्रतिष्ठित सम्मान से उन्हें सम्मानित करने का निर्णय लिया है।
‘विशिष्ट गुजरात गरिमा पुरस्कार’ की घोषणा के बाद कैप्टन स्मित को लेकर गुजरात में भी गर्व का माहौल है। उनके साहस को नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा के रूप में देखा जा रहा है।
इस घटना में सभी 174 यात्रियों के सुरक्षित बचने के बाद कैप्टन स्मित की भूमिका की विशेष रूप से चर्चा हो रही है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उनकी सूझबूझ और साहस की प्रशंसा की गई है।
फिलहाल कैप्टन स्मित उपचार और स्वास्थ्य लाभ की प्रक्रिया में हैं। वहीं पूरे घटनाक्रम की जांच भी जारी है।
गुजरात सरकार की ओर से पुरस्कार की घोषणा उनके साहस को औपचारिक सम्मान देने की दिशा में बड़ा कदम है। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने वाले कैप्टन स्मित माछर अब विमानन जगत में साहस और कर्तव्यनिष्ठा की मिसाल बन गए हैं।