वास्को: वास्को के 'संडे मार्केट' में आग लगने के बाद, वहां के ग्राउंड फ्लोर पर काम करने वाले दुकानदारों ने मोर्मुआओ म्युनिसिपल काउंसिल (MMC) के उस फैसले का कड़ा विरोध किया है, जिसमें उन्हें 24 घंटे के भीतर जगह खाली करने का आदेश दिया गया है। दुकानदारों ने वैकल्पिक इंतजाम करने और कानूनी रास्ते तलाशने के लिए उचित समय की मांग की है।
यह विरोध MMC के चीफ ऑफिसर सिद्धि विनायक एस. नाइक द्वारा 3 नवंबर को जारी किए गए एक नोटिस के बाद सामने आया है, जिसमें दुकानदारों को आग से प्रभावित इमारत को 24 घंटे के भीतर खाली करने का निर्देश दिया गया था।
काउंसिल ने यह कदम साउथ गोवा कलेक्टर के निर्देशों के बाद उठाया है, क्योंकि क्षतिग्रस्त इमारत की स्ट्रक्चरल स्टेबिलिटी (ढांचे की मजबूती) रिपोर्ट नकारात्मक आई थी।
नोटिस में काउंसिल को यह भी निर्देश दिया गया है कि वे इस जगह की घेराबंदी कर दें और आम लोगों की एंट्री पर रोक लगा दें। बिजली विभाग और पेयजल विभाग के असिस्टेंट इंजीनियरों को इमारत की बिजली और पानी की सप्लाई काटने का निर्देश दिया गया है।
चीफ ऑफिसर को दिए अपने जवाब में, दुकानदारों ने इतनी जल्दी दी गई समय-सीमा पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि नोटिस जारी करने से पहले काउंसिल ने 'प्राकृतिक न्याय' (natural justice) के बुनियादी सिद्धांतों का पालन नहीं किया।
हालांकि वे इमारत की खराब स्थिति से जुड़ी सुरक्षा चिंताओं को समझते हैं, लेकिन उनका कहना है कि उन्हें अपना पक्ष रखने का मौका और निर्देशों का पालन करने के लिए पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए था।
दुकानदारों ने 24 घंटे की समय-सीमा को अनुचित बताया है और काउंसिल से अपील की है कि जब तक उनके विरोध-पत्रों पर विचार नहीं कर लिया जाता, तब तक कोई सख्त कार्रवाई न की जाए।
उन्होंने विशेष रूप से 4 नवंबर को दोपहर 12:30 बजे से कम से कम 24 घंटे तक किसी भी तरह की जबरन कार्रवाई से सुरक्षा मांगी है। उनका कहना है कि इस अतिरिक्त समय से उन्हें अपना जवाब देने और बेदखली के आदेश के खिलाफ कानूनी रास्ते तलाशने का मौका मिल जाएगा।
दुकानदारों का कहना है कि इस अचानक आए आदेश ने उनकी परेशानी और बढ़ा दी है, क्योंकि बाजार में लगी भीषण आग के बाद से ही वे अपनी आजीविका को फिर से खड़ा करने और अपना बचा-खुचा सामान बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।