मापुसा: मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने बुधवार को बीजेपी की ‘सेवा ज्योति यात्रा’ के तहत मापुसा का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने शहर से जुड़े दो लंबे समय से लंबित मुद्दों – म्युनिसिपल मछली बाज़ार की हालत और मोरोड में प्रस्तावित सरकारी एडमिनिस्ट्रेटिव कॉम्प्लेक्स – का जायज़ा लिया।
सावंत ने मापुसा के विधायक जोशुआ डिसूज़ा और नगर निगम के अधिकारियों के साथ मछली बाज़ार का दौरा किया और विक्रेताओं से बातचीत करके उन्हें हो रही दिक्कतों को समझा।
इसके बाद मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे बाज़ार की कमियों को दूर करें और यह पक्का करें कि विक्रेताओं को ज़रूरी सुविधाएँ मिलें।
यह दौरा बाज़ार के कई विभागों द्वारा किए गए निरीक्षण के ठीक दो महीने बाद हुआ है, जिसमें कई कमियाँ सामने आई थीं, जैसे खराब साफ़-सफ़ाई, जाम नालियाँ, अपर्याप्त शौचालय, अनियमित पानी की सप्लाई और बुनियादी सुविधाओं की कमी।
मछली बाज़ार कई सालों से शहर के लिए एक बड़ी चिंता का विषय रहा है। मापुसा म्युनिसिपल काउंसिल द्वारा बाज़ार से जुड़ी फ़ीस वसूलने के बावजूद, विक्रेता और ग्राहक अपर्याप्त सुविधाओं की शिकायत करते रहे हैं।
सावंत ने मोरोड में मौजूदा सरकारी कॉम्प्लेक्स का भी दौरा किया और इलाके में प्रस्तावित नए एडमिनिस्ट्रेटिव कॉम्प्लेक्स की योजनाओं की समीक्षा की।
गोवा स्टेट इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (GSIDC) ने मोरोड में लगभग 110 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से एक बहु-मंज़िला सरकारी एडमिनिस्ट्रेटिव कॉम्प्लेक्स का प्रस्ताव रखा है। इसका मकसद मापुसा में अलग-अलग जगहों पर चल रहे सरकारी विभागों को एक ही छत के नीचे लाना है। प्रस्ताव को तकनीकी मंज़ूरी मिल गई है और इसे वित्तीय मंज़ूरी के लिए प्रोसेस किया जा रहा है।
प्रस्तावित कॉम्प्लेक्स का मकसद मापुसा में सरकारी दफ़्तरों के अलग-अलग जगहों पर फैले होने की पुरानी समस्या को खत्म करना और निवासियों के लिए अलग-अलग विभागों तक पहुँचना आसान बनाना है, ताकि उन्हें एक जगह से दूसरी जगह न जाना पड़े।
इस बीच, सरकार ने अंगोड में नए मापुसा म्युनिसिपल काउंसिल कमर्शियल कॉम्प्लेक्स में दफ़्तरों को एक जगह लाना शुरू कर दिया है। कई विभाग वहाँ शिफ्ट हो चुके हैं, जबकि अन्य के शिफ्ट होने की प्रक्रिया चल रही है।
सरकार डिप्टी कलेक्टर और मामलतदार के दफ़्तरों को बाज़ार इलाके में एक नए हॉल में शिफ्ट करने की योजनाओं पर भी काम कर रही है। इस कदम का मकसद इन अहम रेवेन्यू दफ़्तरों को जनता के लिए ज़्यादा सुलभ बनाना है।
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