वास्को: मछुआरों के नौ संगठनों ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के उस आदेश का स्वागत किया है, जिसमें कहा गया है कि मोरमुगाओ पोर्ट पर 'केपसाइज' (बड़े आकार के) जहाजों के लिए 'अप्रोच चैनल' को गहरा करने की परियोजना को दी गई पर्यावरण मंजूरी (Environmental Clearance) और तटीय विनियमन क्षेत्र (CRZ) मंजूरी (21 जुलाई, 2025) को फिलहाल लागू नहीं किया जाएगा। इस आदेश के तहत, 2 नवंबर को होने वाली अगली सुनवाई तक इन मंजूरियों पर रोक लगा दी गई है।
मछुआरों के नौ संगठनों के प्रतिनिधियों - जिनका नेतृत्व 'नेशनल फिशवर्कर्स फोरम' के महासचिव ओलेन्सियो सिमोज़ और 'ओल्ड क्रॉस फिशिंग कैनो ओनर्स कोऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड' के अध्यक्ष कस्टोडियो डिसूजा कर रहे थे - ने इस अंतरिम फैसले का स्वागत किया। उन्होंने इसे गोवा के समुद्री पर्यावरण और पारंपरिक आजीविका की रक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।
एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में सिमोज़ ने बताया कि प्रस्तावित ड्रेजिंग (तल की खुदाई) परियोजना का उद्देश्य 'केपसाइज' जहाजों को जगह देना है। इससे बर्थ 5, 6 और 7 पर कोयला संभालने की क्षमता सालाना 12 मिलियन टन से बढ़कर 42.1 मिलियन टन हो सकती है।
सिमोज़ ने याद दिलाया कि सितंबर 2016 में भी NGT ने इसी परियोजना के लिए दी गई एक पिछली मंजूरी को रद्द कर दिया था, क्योंकि उस समय अनिवार्य 'जन सुनवाई' (public hearing) नहीं कराई गई थी।
मछुआरों के नेताओं ने जनवरी 2024 की 'गोवा कोस्टल ज़ोन मैनेजमेंट अथॉरिटी' की एक निरीक्षण रिपोर्ट का हवाला दिया। इस रिपोर्ट के अनुसार, 9.66 किलोमीटर लंबे चैनल को 19 मीटर की गहराई तक खोदने से लगभग 15 मिलियन क्यूबिक मीटर मलबा (ड्रेज्ड मटेरियल) निकलेगा।
सिमोज़ ने दावा किया कि इतनी बड़े पैमाने पर होने वाली खुदाई से जुआरी मुहाने (Zuari estuary) की बनावट, समुद्र तल की स्थिरता और समुद्री जैव विविधता को खतरा हो सकता है।
निरीक्षण रिपोर्ट में सुझाव दिया गया था कि खुदाई शुरू करने से पहले एक नया और स्वतंत्र 'पर्यावरण प्रभाव आकलन' (Environmental Impact Assessment) कराया जाए। साथ ही, इसमें ज़मीनी, जलीय और समुद्री जीवन पर पड़ने वाले प्रभावों का व्यापक अध्ययन भी शामिल होना चाहिए।
'एहतियाती सिद्धांत' (precautionary principle) पर जोर देते हुए, सिमोज़ ने नियामक प्राधिकरणों को चेतावनी दी कि वे औद्योगिक विस्तार के लिए गोवा की पर्यावरणीय सुरक्षा और जन स्वास्थ्य की बलि न दें।
याचिकाकर्ता संगठनों ने कहा कि पारंपरिक मछुआरा समुदाय पूरी तरह से स्वस्थ तटीय पारिस्थितिकी तंत्र पर निर्भर हैं। उन्होंने अपनी मांग दोहराई कि चैनल को गहरा करने की इस परियोजना और इससे जुड़ी 'सागरमाला' पोर्ट विस्तार योजनाओं को पूरी तरह से रद्द कर दिया जाए।
उन्होंने कहा कि वे अपने अधिकारों और तटीय विरासत की रक्षा के लिए कानूनी और लोकतांत्रिक तरीकों से इस मामले को आगे बढ़ाते रहेंगे।