पणजी: पणजी की मशहूर 'जंटा हाउस' इमारत को गिराने की तैयारियां तेज हो गई हैं, लेकिन इसके बावजूद कंज्यूमर कोर्ट (उपभोक्ता अदालत) और नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग (डिपार्टमेंट ऑफ सिविल सप्लाईज एंड कंज्यूमर अफेयर्स) अभी भी इसी छह मंजिला इमारत से काम कर रहे हैं, जिससे लोगों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।
जहां बाकी सभी लोगों और सरकारी दफ्तरों को दूसरी जगहों पर शिफ्ट कर दिया गया है, वहीं ये दो सरकारी दफ्तर अभी भी उसी छह मंजिला इमारत में चल रहे हैं, जिसे गिराकर फिर से विकसित (रीडेवलप) किया जाना है।
नागरिक अधिकार कार्यकर्ता रोलैंड मार्टिंस का आरोप है कि इन दफ्तरों के यहां काम करते रहने से वहां आने वाले लोगों और कर्मचारियों को बेवजह के खतरे का सामना करना पड़ रहा है।
मार्टिंस ने कहा, "इमारत को गिराने के लिए भारी मशीनरी पहले ही मौके पर लाई जा चुकी है। अधिकारियों को सबसे पहले इन दफ्तरों को कहीं और शिफ्ट कर देना चाहिए था। अभी तक भी उन्हें कोई उपयुक्त दूसरी जगह नहीं मिल पाई है।"
यह मामला इसलिए भी अहम है क्योंकि लोग सुनवाई, शिकायतों और रोजमर्रा के कामों के लिए अभी भी कंज्यूमर कोर्ट और नागरिक आपूर्ति विभाग में आ रहे हैं।
इस बीच, नागरिक आपूर्ति निदेशक जयंत तारी ने 'द गोअन' को बताया कि सरकार उनके विभाग के जंटा हाउस स्थित दफ्तरों को किसी दूसरी जगह शिफ्ट करने के लिए दो-तीन प्रस्तावों पर तेजी से काम कर रही है।
तारी ने वहां आने वाले लोगों के लिए किसी बड़े खतरे या परेशानी की बात को खारिज करते हुए कहा कि कंज्यूमर कोर्ट का कामकाज लगभग पूरी तरह से ऑनलाइन हो रहा है और इसकी अध्यक्षता बॉम्बे हाई कोर्ट की सिंगल बेंच कर रही है।
वहीं, जंटा हाउस के लिए राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी रीडेवलपमेंट योजना की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं।
इस प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी केंद्र सरकार के उपक्रम NBCC (इंडिया) लिमिटेड को सौंपी गई है, जिसने इमारत और जमीन का कब्जा ले लिया है। बताया जा रहा है कि इमारत को गिराने के काम के लिए पुणे के एक ठेकेदार को काम पर रखा गया है और साइट पर मशीनरी भी पहुंच चुकी है।
हालांकि, अधिकारियों के सामने एक बड़ी लॉजिस्टिक चुनौती है। पणजी के बीचों-बीच स्थित इस इमारत को गिराने के लिए कड़े सुरक्षा इंतजाम करने होंगे और आसपास के इलाके में ट्रैफिक पर भी पाबंदियां लगानी पड़ सकती हैं।
व्यस्त '18 जून रोड' कॉरिडोर पर स्थित जंटा हाउस के आसपास कई दुकानें, बैंक, दफ्तर, रेस्तरां, होटल फिडाल्गो और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठान हैं। अगर यहां एक बड़ा 'एक्सक्लूजन ज़ोन' (प्रतिबंधित क्षेत्र) बनाया जाता है, तो इससे वाहनों की आवाजाही और व्यापारिक गतिविधियों पर असर पड़ना तय है।
प्रस्तावित रीडेवलपमेंट योजना के तहत यहां 14 मंजिला कॉम्प्लेक्स बनाया जाएगा, जिसमें व्यावसायिक सुविधाएं, एक लग्जरी होटल, कैसीनो फ्लोर और छत पर एक स्विमिंग पूल होगा। इस परियोजना का नागरिक समूहों और सार्वजनिक हस्तियों ने भी विरोध किया है। उनका तर्क है कि किसी प्रमुख सार्वजनिक स्थल की जगह कैसीनो से जुड़ा कोई निर्माण कार्य करने से पणजी की विरासत, उसके स्वरूप और जनहित को नुकसान पहुंचेगा।