सैटेलाइट डेटा से सरकारी कृषि नीतियों का मूल्यांकन, GIM की नई रिसर्च ने दिखाया रास्ता

Update: 2026-05-26 10:42 GMT

Goa गोवा : गोवा इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (GIM) की लीडरशिप में एक रिसर्च टीम ने सरकारी कृषि नीतियों की प्रभावशीलता का मूल्यांकन करने के लिए एक नया सैटेलाइट-आधारित फ्रेमवर्क विकसित किया है। यह तरीका खास तौर पर उन परिस्थितियों के लिए उपयोगी माना जा रहा है, जहां पारंपरिक सर्वे डेटा उपलब्ध नहीं होता, जिससे नीति मूल्यांकन में अक्सर कठिनाई आती है।

यह अध्ययन प्रोफेसर मुद्दसिर अहमद अखून के नेतृत्व में किया गया, जिसमें अज़ीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट अहमदाबाद के शोधकर्ताओं ने भी सहयोग किया। इस शोध को प्रतिष्ठित जर्नल ऑफ एग्रीकल्चरल इकोनॉमिक्स में प्रकाशित किया गया है। शोधकर्ताओं का कहना है कि यह मॉडल विकासशील देशों में नीति मूल्यांकन के लिए एक नया और प्रभावी विकल्प प्रस्तुत करता है।

आज के समय में जब भारत सहित कई विकासशील देशों की सरकारें कृषि सब्सिडी, कैश ट्रांसफर स्कीम और ग्रामीण कल्याण योजनाओं पर हजारों करोड़ रुपये खर्च कर रही हैं, तब इन नीतियों के वास्तविक प्रभाव को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। खासकर यह जानना चुनौतीपूर्ण रहा है कि इन योजनाओं का कृषि उत्पादन, आय और ग्रामीण आजीविका पर वास्तविक प्रभाव कितना पड़ा है।

इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए इस रिसर्च में सैटेलाइट इमेजरी और इकोनॉमेट्रिक विश्लेषण को एक साथ जोड़कर एक ऐसा फ्रेमवर्क तैयार किया गया है, जो बड़े पैमाने पर सरकारी योजनाओं का मूल्यांकन कर सकता है। यह तरीका विशेष रूप से उन क्षेत्रों के लिए उपयोगी बताया जा रहा है, जहां आधारभूत सर्वे डेटा या तो उपलब्ध नहीं है या काफी सीमित है।

शोधकर्ताओं के अनुसार, कई विकासशील क्षेत्रों में डेटा की कमी एक बड़ी समस्या रही है, जिसके कारण नीतिगत निर्णयों का सही आकलन नहीं हो पाता। इस नई तकनीक के जरिए फसल पैटर्न, भूमि उपयोग और उत्पादन में बदलाव जैसे संकेतों का अध्ययन करके सरकारी योजनाओं के प्रभाव को समझा जा सकता है।

इस अध्ययन को नीति निर्माण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, क्योंकि यह न केवल डेटा की कमी की समस्या का समाधान प्रस्तुत करता है, बल्कि तकनीक के माध्यम से अधिक सटीक और व्यापक मूल्यांकन की संभावना भी पैदा करता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस मॉडल को बड़े स्तर पर अपनाया जाता है, तो यह कृषि और ग्रामीण विकास से जुड़ी नीतियों के प्रभाव को बेहतर तरीके से समझने में मदद कर सकता है। इससे सरकारों को भविष्य में अधिक प्रभावी और लक्षित योजनाएं बनाने में सहायता मिल सकती है।

कुल मिलाकर, GIM और सहयोगी संस्थानों की यह रिसर्च विकासशील देशों में नीति मूल्यांकन की दिशा में एक महत्वपूर्ण नवाचार के रूप में देखी जा रही है, जो पारंपरिक सर्वे प्रणाली की सीमाओं को काफी हद तक दूर कर सकती है।

Tags:    

Similar News