पणजी: गोवा ने अपनी 6,750 MW की पहचानी गई सोलर एनर्जी क्षमता का सिर्फ़ 14.5 प्रतिशत ही इस्तेमाल किया है, जबकि राज्य अभी भी कोयले से बनने वाली बिजली पर बहुत ज़्यादा निर्भर है। 2025-26 में राज्य की कुल बिजली खरीद में कोयले से बनी बिजली का हिस्सा लगभग 60 प्रतिशत था।
नीति आयोग के 'इंडिया क्लाइमेट एंड एनर्जी डैशबोर्ड' (ICED) पर मौजूद डेटा के अनुसार, राज्य में अभी 979 MW की सोलर क्षमता लगी हुई है, जबकि अनुमानित सोलर क्षमता 6,750 MW है। ये आंकड़े राज्य में मौजूद रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता और असल में इस्तेमाल की जा रही क्षमता के बीच बड़े अंतर को दिखाते हैं।
2026-27 के डैशबोर्ड डेटा से पता चलता है कि गोवा की रिन्यूएबल एनर्जी उत्पादन क्षमता में सोलर रूफटॉप सिस्टम का दबदबा है। राज्य की कुल रिन्यूएबल क्षमता में रूफटॉप सोलर का हिस्सा लगभग 98 प्रतिशत है, जबकि बायो-पावर का योगदान लगभग 1.94 प्रतिशत और छोटे हाइड्रो प्रोजेक्ट्स का योगदान सिर्फ़ 0.05 प्रतिशत है।
सोलर क्षमता काफ़ी ज़्यादा होने के बावजूद, राज्य की बिजली खरीद में पारंपरिक स्रोतों का ही दबदबा बना हुआ है। ICED पर दिखाए गए वित्त वर्ष 2025-26 के बिजली खरीद डेटा के अनुसार, गोवा की कुल बिजली खरीद का 59.56 प्रतिशत हिस्सा कोयले से बनने वाली बिजली से आता है।
अन्य रिन्यूएबल स्रोतों का योगदान 12.45 प्रतिशत था, जबकि न्यूक्लियर पावर का हिस्सा 6.31 प्रतिशत था। विंड पावर का योगदान 4.59 प्रतिशत था, जबकि सोलर पावर का हिस्सा कुल खरीद का 4.20 प्रतिशत था।
ये आंकड़े इसलिए अहम हैं क्योंकि गोवा में बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है, जिससे राज्य पर अतिरिक्त बिजली का इंतजाम करने का दबाव बढ़ रहा है। डैशबोर्ड के मासिक पीक-डिमांड डेटा से पता चलता है कि अप्रैल 2026 में गोवा की पीक डिमांड 891 MW तक पहुँच गई, जो अप्रैल 2025 में 824 MW थी - यानी एक साल में लगभग 8 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। नीति आयोग इस डैशबोर्ड को एक ऐसे प्लेटफ़ॉर्म के तौर पर बताता है जो मुख्य रूप से सरकारी स्रोतों से ऊर्जा और रिन्यूएबल एनर्जी की क्षमता के बारे में राज्य-स्तर का डेटा देता है। साथ ही, यह चेतावनी भी देता है कि कुछ डेटासेट में अनुमान या निकाले गए अंदाज़े शामिल हो सकते हैं।