मापुसा: पोल्ट्री (मुर्गी-पालन) के साथ मानवीय व्यवहार सुनिश्चित करने और जानवरों के परिवहन से जुड़े नियमों का पालन कराने के उद्देश्य से, गोवा सरकार ने राज्य में आने वाली जीवित पोल्ट्री की खेप के साथ एक प्रमाण-पत्र होना अनिवार्य कर दिया है। यह प्रमाण-पत्र उस क्षेत्र के सक्षम अधिकारियों द्वारा जारी किया जाना चाहिए, जहाँ से इन पक्षियों को लाया जा रहा है।
पशुपालन और पशु चिकित्सा सेवा निदेशालय द्वारा जारी एक अधिसूचना के अनुसार, जो खेप इन निर्धारित शर्तों को पूरा नहीं करेगी, उसे गोवा में प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
ये निर्देश तत्काल प्रभाव से लागू हो गए हैं। इनके तहत, गोवा में या राज्य के भीतर लाई जाने वाली जीवित पोल्ट्री की सभी खेपों को जानवरों के परिवहन से जुड़े कानूनों और नियमों का पालन करना होगा। अधिसूचना के अनुसार, राज्य में आने वाली हर खेप के साथ स्रोत क्षेत्र के सक्षम अधिकारी का एक प्रमाण-पत्र होना चाहिए। इस प्रमाण-पत्र में पक्षियों के बारे में जरूरी जानकारी होनी चाहिए, जैसे कि वे कहाँ से लाए जा रहे हैं, उनका स्वास्थ्य कैसा है, और क्या वे परिवहन के लिए पूरी तरह फिट हैं।
ट्रांसपोर्टरों को यह भी निर्देश दिया गया है कि वे संबंधित कानूनों के तहत जरूरी सभी दस्तावेज, परमिट, प्रमाण-पत्र और रिकॉर्ड अपने साथ रखें। जब भी सक्षम अधिकारी मांगें, तो उन्हें ये दस्तावेज जांच के लिए दिखाने होंगे। सरकार ने पोल्ट्री के सुरक्षित और मानवीय परिवहन पर जोर दिया है। निर्देश दिया गया है कि पक्षियों को इस तरह से रखा और ले जाया जाए जिससे उनमें अत्यधिक भीड़ न हो, उन्हें चोट न लगे, वे परेशान न हों और बीमारियों के फैलने का खतरा कम से कम हो।
यदि निर्धारित शर्तों का पालन नहीं किया जाता है, तो उस खेप को गोवा में प्रवेश करने से रोका जा सकता है। इसके अलावा, संबंधित नियमों के तहत अन्य कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।
इस अधिसूचना में 'पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960', 'जानवरों के परिवहन (संशोधन) नियम, 2001', 'केंद्रीय मोटर वाहन (ग्यारहवां संशोधन) नियम, 2015' और पोल्ट्री परिवहन के लिए 'भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के IS 5238:2001 कोड ऑफ प्रैक्टिस' का उल्लेख किया गया है।
ये निर्देश सरकार की 'मुख्यमंत्री स्वयंपूर्ण गोवा पोल्ट्री विकास नीति, 2025' के संदर्भ में भी जारी किए गए हैं। इस नीति का उद्देश्य टिकाऊ, सुरक्षित और स्वच्छ पोल्ट्री उत्पादन को बढ़ावा देना, इस क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को मजबूत करना, खाद्य सुरक्षा में सुधार करना और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर पैदा करना है।
Tags: