येदे अकती आगे

Update: 2026-04-19 12:02 GMT

रायपुर। 'मोखला'(राजनांदगांव) निवासी जनता से रिश्ता के पाठक रोशन साहू ने कविता ई मील किया है, 

सुरहोती देवारी आड़ के, काय जानन ग्रह बार के।

कोनो गांव इतवार मानिन, अउ कोनो सम्मार के।।

ग्रह नक्षत्र के टोर भांज मा,होगे हवे दू दिन तिहार।

आज काली के भोरहा मा, दाई बोरिस उरिद दार।।

होरी- देवारी मनागे झप ले, लागे बेरा जइसे भागे।

खेती-किसानी के दिन बादर,येदे ग अकती आगे।।

जियइया मनके होरी-देवारी,बितय रे सुख के बेरा।

एक घड़ी कलप जनावय, पहावय न दुख के बेरा।।

बर-बिहाव के नेवता अड़बड़,माड़े हवे लगिन घलो।

धोती-कुरता पहिर बबा,कथे बरतिया चलो-चलो।।

पुतरी-पुतरा ल संभरावँय,नोनी बाबू पारा के पारा।

तेल मायन चौथिया बरतिया,नेंवता हे झारा-झारा।

पुरवा ले परखे सियानन, अवइया पानी बादर ला।

करसा के निरमल जल मा,अंताजे दिन बादर ला।।

होत बिहनिया हूम-धूप संग, चघे दोना ठाकुर देवा।

पानी पावँय पितर मन हा,संग सोंहारी बरा कलेवा।

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