Mahasamund. महासमुंद। जनपद पंचायत पिथौरा अंतर्गत ग्राम पंचायत बड़ेलोरम के सचिव मोहन पटेल को अपने पदीय कर्तव्यों में लगातार लापरवाही, उदासीनता और वरिष्ठ अधिकारियों के आदेशों की अवहेलना करने के आरोप में मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत महासमुंद हेमंत नंदनवार ने तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इस कार्रवाई की जानकारी जनपद पंचायत पिथौरा द्वारा जारी प्रतिवेदन में दी गई है। प्रतिवेदन के अनुसार, मोहन पटेल द्वारा ग्राम पंचायत कार्यालय नियमित रूप से नहीं खोला जा रहा था। जन्म-मृत्यु पंजीयन, पेंशन भुगतान, आय-जाति-निवास प्रमाण पत्र बनाने में लगातार विलंब, और पंचायती कार्यों में शिथिलता की शिकायतें प्राप्त हुई थीं। यह भी पाया गया कि ग्रामसभा का आयोजन नहीं किया जा रहा था और ओबीसी सर्वे, प्रधानमंत्री आवास योजना तथा स्वच्छ भारत मिशन के तहत निर्धारित कार्यों में उदासीनता बरती जा रही थी। सहायक आंतरिक लेखा परीक्षण अधिकारी बसंती चौहान द्वारा प्रस्तुत प्रतिवेदन में यह भी उल्लेख किया गया कि श्री पटेल लगातार चार महीने तक कार्यालय से अनुपस्थित रहे, जिससे ग्राम पंचायत के सामान्य और आवश्यक कार्य प्रभावित हुए। बैठक और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में उनकी लगातार अनुपस्थिति भी देखी गई।

इस तरह के कृत्य को छत्तीसगढ़ पंचायत सेवा (आचरण) नियम 1998 के विपरीत माना गया। मुख्य कार्यपालन अधिकारी हेमंत नंदनवार ने न केवल उन्हें निलंबित किया, बल्कि निलंबन अवधि में उन्हें मुख्यालय जिला पंचायत महासमुंद में रहकर जीवन निर्वाह भत्ता प्राप्त करने की व्यवस्था की। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह कदम ग्राम पंचायत के सुचारू संचालन और जनता को मिलने वाली सेवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है। निलंबन के तुरंत बाद, ग्राम पंचायत सचिव संलग्न जनपद पंचायत पिथौरा सूरज साहू को ग्राम पंचायत बड़ेलोरम में पदस्थ किया गया। उनका कार्यभार ग्रहण करने के बाद उन्होंने कहा कि पंचायत के सभी जरूरी कार्यों को सुचारू रूप से संचालित किया जाएगा और जनता को मिलने वाली योजनाओं और सेवाओं में किसी भी प्रकार की देरी नहीं होगी। सूत्रों के अनुसार, निलंबन का निर्णय पंचायत और जिला प्रशासन के स्तर पर की गई जांच के आधार पर लिया गया। जांच में यह स्पष्ट हुआ कि सचिव के कार्यों की लगातार उदासीनता और कार्यालय में अनुपस्थित रहने के कारण पंचायत की योजनाओं का क्रियान्वयन प्रभावित हुआ था।

ग्रामवासियों और पंचायत कर्मियों का कहना है कि पिछले कुछ महीनों में कार्यालय में सचिव की अनुपस्थिति के कारण कई महत्वपूर्ण कार्य रुके हुए थे। पेंशनधारकों को समय पर भुगतान नहीं मिला, प्रमाण पत्र बनाने में विलंब हुआ, और विभिन्न सरकारी योजनाओं की प्रक्रिया में देरी हुई। इस सबके चलते ग्रामवासियों की शिकायतें जिला प्रशासन तक पहुंची। मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि किसी भी सरकारी पद पर रहकर यदि कोई अधिकारी अपने कर्तव्यों का पालन नहीं करता है तो उसके खिलाफ प्रशासन सख्त कार्रवाई करेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनता को मिलने वाली सेवाओं में किसी प्रकार की बाधा बर्दाश्त नहीं की जाएगी और सभी सचिवों को अपने दायित्व गंभीरता से निभाने का निर्देश दिया गया है। वहीं,
निलंबन
के बाद नियुक्त नए सचिव सूरज साहू ने ग्रामवासियों से अपील की है कि वे पंचायत कार्यालय में किसी भी समस्या या शिकायत की जानकारी तुरंत दें, ताकि समय रहते उसका समाधान किया जा सके। उन्होंने कहा कि पंचायत कार्यालय में सभी योजनाओं का क्रियान्वयन पारदर्शिता और सुचारू रूप से किया जाएगा। इस कार्रवाई से जिले के अन्य पंचायत सचिवों को भी यह संदेश गया है कि किसी भी तरह की लापरवाही या कार्यालयीन उदासीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि जिला प्रशासन और पंचायत समिति समय-समय पर पंचायत सचिवों की कार्यप्रणाली की समीक्षा करती रहेगी और अगर आवश्यक हुआ तो इसी तरह सख्त कदम उठाए जाएंगे।
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