सड़क हादसों से बचाव के लिए अनूठी पहल, मवेशियों को पहनाई जा रही रेडियम बेल्ट
छग
Raipur. रायपुर। छत्तीसगढ़ में सड़क पर मवेशियों की मौजूदगी एक गंभीर समस्या रही है। रात के अंधेरे में सड़क पर बैठे गाय-भैंस से टकराकर होने वाली दुर्घटनाएं आए दिन जानलेवा साबित होती रही हैं। इस समस्या के समाधान के लिए अब परिवहन विभाग ने सराहनीय पहल शुरू की है। विभाग द्वारा मवेशियों के गले में रेडियम-रिफ्लेक्टर पट्टी (रेडियम बेल्ट) पहनाई जा रही है ताकि रात में वाहन चालक उन्हें आसानी से देख सकें और हादसों से बचा जा सके। यह अभियान शनिवार को पोला तिहार के अवसर पर शुरू किया गया। परंपरागत रूप से यह पर्व बैल और मवेशियों को समर्पित है, ऐसे में इस दिन से जागरूकता अभियान शुरू करना विभाग ने विशेष रूप से उपयुक्त माना।
हादसों का बड़ा कारण बने मवेशी
देश के कई शहरों की तरह छत्तीसगढ़ में भी सड़कों पर आवारा मवेशियों का जमावड़ा आम बात है। अक्सर यह देखा गया है कि रात में हाईवे या मुख्य मार्गों पर अचानक सामने आए मवेशियों से टकराकर लोग हादसे का शिकार हो जाते हैं। बीते वर्षों में ऐसे हादसों में सैकड़ों लोगों और मवेशियों की मौत हो चुकी है। इन्हीं घटनाओं को रोकने के उद्देश्य से परिवहन सचिव एस. प्रकाश और अपर परिवहन आयुक्त डी. रविशंकर ने यह अभिनव कदम उठाया।
रायपुर संभाग में शुरू हुआ अभियान
परिवहन उड़नदस्ता रायपुर के प्रभारी सीके साहू के नेतृत्व में इस पहल की शुरुआत रायपुर, बलौदाबाजार और रायपुर संभाग के अन्य जिलों में की गई। राष्ट्रीय राजमार्गों और प्रमुख मार्गों पर मौजूद गायों और मवेशियों के गले में स्वयं विभागीय टीम ने रेडियम बेल्ट बांधे। सीके साहू ने बताया कि पोला तिहार के अवसर पर विशेष रूप से यह पहल की गई है। उन्होंने कहा, “रात्रि के समय मवेशी अक्सर सड़क पर दिखाई नहीं देते, जिससे दुर्घटनाएं होती हैं। लेकिन रिफ्लेक्टर बेल्ट लगाने से उनकी दृश्यता बढ़ेगी, हादसे कम होंगे और मवेशियों व लोगों दोनों की जान सुरक्षित होगी।”
जागरूकता के लिए निरंतर प्रयास
परिवहन विभाग का कहना है कि यह केवल एक शुरुआत है। भविष्य में इस तरह के और कदम उठाए जाएंगे ताकि आम लोगों और चालकों में जागरूकता फैलाई जा सके। साथ ही, मवेशियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अन्य योजनाओं पर भी विचार किया जाएगा। इस पहल से न सिर्फ मवेशियों की रक्षा होगी बल्कि वाहन चालकों की सुरक्षा भी बढ़ेगी। विभाग को उम्मीद है कि धीरे-धीरे इस तरह की पहल पूरे प्रदेश में लागू होगी और सड़क हादसों में उल्लेखनीय कमी आएगी।