Mohla-Manpur. मोहला-मानपुर। जिले में बीते कुछ वर्षों से जंगली जानवरों की बढ़ती सक्रियता ने वन विभाग और ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। पहले हाथियों का आतंक, फिर तेंदुए की आमद और अब बाघ के पहुंचने की पुष्टि ने वन क्षेत्र में हलचल मचा दी है। ताजा मामला दक्षिण वन परिक्षेत्र का है, जहां बाघ द्वारा एक पालतू गाय का शिकार किए जाने के बाद वन विभाग ने न केवल पुष्टि की है बल्कि पूरे इलाके में सघन निगरानी भी शुरू कर दी है।
गाय का शिकार और पगमार्क से पुष्ट हुई बाघ की मौजूदगी
वन मंडलाधिकारी (DFO) दिनेश पटेल ने बताया कि 1 दिसंबर को मानपुर दक्षिण वन परिक्षेत्र अंतर्गत औंधी तहसील के ग्राम नवागढ़ में एक पालतू गाय को किसी जंगली जानवर द्वारा मारे जाने की सूचना मिली थी। सूचना मिलते ही क्षेत्रीय वन अमला मौके पर पहुंचा। जांच के दौरान गांव से लगे वन भूमि कक्ष क्रमांक 1080 में बाघ के पगमार्क स्पष्ट रूप से दिखाई दिए। वहीं गांव से थोड़ी दूरी पर जंगल में गाय की क्षत-विक्षत लाश भी मिली, जिससे यह साफ हो गया कि यह हमला किसी भारी-भरकम शिकारी द्वारा किया गया है। DFO पटेल ने कहा कि तेंदुए और चीते जैसे जानवर इतनी बड़ी गाय को इतनी दूर खींचकर ले जाने में सक्षम नहीं होते, इसलिए पगमार्क और मौके की परिस्थिति को देखते हुए हमला बाघ द्वारा किए जाने की पुष्टि हुई है।
दोबारा आने की आशंका, इलाके में लगाए गए कैमरे
DFO पटेल ने बताया कि चूंकि बाघ पहले ही शिकार कर चुका है, ऐसे में इस स्थान पर उसके दोबारा आने की प्रबल संभावना है। इसी कारण आज दक्षिण वन परिक्षेत्र के नवागढ़ गांव से सटे क्षेत्र में तीन अलग-अलग स्थानों पर पेड़ों पर कैमरे लगाए गए हैं। इन कैमरों पर बाघ की गतिविधियों पर नजर रखी जाएगी। वन विभाग का कहना है कि अगले कुछ दिनों में कैमरे में बाघ की तस्वीरें और उसका मूवमेंट साफ हो सकेगा।
महाराष्ट्र सीमा से संभावित आमद
मोहला-मानपुर जिला महाराष्ट्र सीमा से लगा हुआ है और कई बार वन्य जीव दोनों राज्यों के बीच आवाजाही करते रहे हैं। DFO पटेल ने आशंका जताई कि बाघ महाराष्ट्र के जंगलों से विचरण करते हुए छत्तीसगढ़ में प्रवेश कर सकता है। उन्होंने कहा कि शुरुआती जानकारी इसी ओर इशारा कर रही है। विभाग जल्द ही बाघ के उम्र, आकार और मूवमेंट की दिशा से संबंधित अधिक जानकारी जुटाने की उम्मीद कर रहा है।
ग्रामीणों में दहशत, वन विभाग ने जारी की चेतावनी
बाघ की आमद की खबर से नवागढ़ और आसपास के गांवों में दहशत फैल गई है। ग्रामीणों को अकेले जंगल में नहीं जाने, समूह में ही आवाजाही करने और सतर्क रहने की सलाह दी गई है। वन विभाग की टीमें क्षेत्र में लगातार गश्त कर रही हैं। विभाग ने ग्रामीणों से कहा है कि किसी भी असामान्य गतिविधि, जानवर के दिखने या आवाज सुनाई देने पर तुरंत वन अमले को सूचना दें।
पांच-छह सालों से बढ़ रही जंगली जानवरों की गतिविधि
मोहला-मानपुर में जंगली जानवरों की आमद कोई नई बात नहीं, लेकिन बीते पांच-छह सालों में यह तेजी से बढ़ी है। पहले हाथियों का इस इलाके में आना दुर्लभ था, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में हाथी कई बार बस्तियों में घुसकर फसलों और घरों को नुकसान पहुंचा चुके हैं। कई बार जान-माल की क्षति भी हुई है। इसके बाद पिछले दो वर्षों से तेंदुए की मौजूदगी लगातार देखी जा रही है। तेंदुआ कई गांवों में पालतू पशुओं को निशाना बना चुका है। अब बाघ के आने से ग्रामीणों में भय और अधिक बढ़ गया है। वन विभाग का कहना है कि जंगलों में बढ़ती आवाजाही और भोजन की उपलब्धता के कारण जानवरों का मूवमेंट बढ़ा है। विभाग ने आश्वासन दिया है कि सुरक्षा के सभी उपाय किए जा रहे हैं और बाघ को मानव बस्तियों से दूर रखने का प्रयास जारी रहेगा।