नवनिर्वाचित माटी कला बोर्ड अध्यक्ष की धमकी विवादित, आरटीआई कार्यकर्ता ने शिकायत दर्ज की
छग
Raipur. रायपुर। छत्तीसगढ़ में बीजेपी के नवनिर्वाचित माटी कला बोर्ड अध्यक्ष शंभू नाथ चक्रवर्ती द्वारा सामाजिक एवं आरटीआई कार्यकर्ता महेश प्रजापति को धमकी देने का मामला सामने आया है। महेश प्रजापति ने सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI) के तहत सूचना मांगने पर शंभू नाथ चक्रवर्ती की ओर से उन्हें फोन पर डराने-धमकाने का आरोप लगाया है। सूत्रों के अनुसार, महेश प्रजापति ने बताया कि कॉल में उन्हें कहा गया कि यदि आरटीआई के तहत मांगी गई जानकारी नहीं दी गई तो वे उन्हें “कर दूंगा, डंडे से पिटवाऊंगा” जैसी धमकी दी गई। इस मामले को गंभीर मानते हुए उन्होंने मुख्यमंत्री सचिवालय में 29 सेकंड की कॉल रिकॉर्डिंग और आरटीआई के तहत दिए गए पत्र की कॉपी सहित शिकायत दर्ज कराई।
इस घटना ने राज्य सरकार की छवि को प्रभावित किया है, क्योंकि एक ओर सरकार सुशासन और पारदर्शिता की बात करती है, वहीं उसके ही नवनिर्वाचित बोर्ड अध्यक्ष द्वारा इस प्रकार की धमकी देना अनुशासनहीनता को उजागर करता है। महेश प्रजापति ने कहा कि सरकार के अधिकारी, कर्मचारी और जन सूचना अधिकारी बेलगाम हो चुके हैं, क्योंकि शिकायत और सबूत मिलने के बावजूद अभी तक बोर्ड अध्यक्ष शंभू नाथ चक्रवर्ती के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है। उन्होंने बताया कि इस तरह की धमकी समाज के लिए खतरनाक है और आईटीआई कार्यकर्ताओं के कामकाज पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है।
वहीं, माटी कला बोर्ड अध्यक्ष शंभू नाथ चक्रवर्ती ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उन्होंने महेश प्रजापति को किसी भी तरह से धमकी नहीं दी थी। उन्होंने यह भी कहा कि आरटीआई के तहत मांगी गई जानकारी समयावधि के भीतर दी जाएगी। इस बयान से मामले में विवादित स्थिति बनी हुई है, क्योंकि शिकायतकर्ता के पास कॉल की रिकॉर्डिंग मौजूद है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई न करना प्रशासन और सरकार की छवि पर असर डालता है। जनता में यह धारणा बन सकती है कि उच्च पदों पर बैठे लोग नियम और कानून से ऊपर हैं। सामाजिक और आरटीआई कार्यकर्ता ऐसे मामलों को लेकर चिंतित हैं क्योंकि उनके काम और सुरक्षा के लिए उचित संरक्षण नहीं मिल रहा है।
छत्तीसगढ़ में यह मामला राज्य सरकार की पारदर्शिता और सुशासन पर सवाल उठाता है। जनता के बीच यह चर्चा भी शुरू हो गई है कि क्या नवनिर्वाचित अधिकारियों के लिए नियम अलग हैं या सभी के लिए समान हैं। इस घटना के बाद सामाजिक संगठन और आईटीआई कार्यकर्ता सरकार से मांग कर रहे हैं कि इस मामले में तुरंत जांच कर उचित कार्रवाई की जाए। साथ ही, यह भी सुनिश्चित किया जाए कि किसी भी कार्यकर्ता को उनके अधिकारों का प्रयोग करने पर धमकाया या डराया न जाए। इस विवाद ने राज्य की राजनीतिक और प्रशासनिक छवि पर असर डाला है। सरकार के लिए यह समय है कि वह ऐसे मामलों में अपनी जवाबदेही साबित करे और सभी नागरिकों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करे।