10वीं-12वीं के हजारों छात्रों की बढ़ सकती है परेशानी, टीचर्स एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र
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Bilaspur. बिलासपुर। छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा शैक्षणिक सत्र 2026-27 की कक्षा 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं के लिए परीक्षा केंद्रों की नई व्यवस्था लागू करने के निर्देशों का विरोध शुरू हो गया है। छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन ने इस फैसले को छात्रहित के खिलाफ बताते हुए तत्काल रोक लगाने की मांग की है। एसोसिएशन का कहना है कि नई व्यवस्था लागू होने से विशेष रूप से ग्रामीण, वनांचल और अनुसूचित क्षेत्रों के विद्यार्थियों को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। परीक्षा केंद्रों की दूरी बढ़ने के कारण बड़ी संख्या में छात्र बोर्ड परीक्षा से वंचित हो सकते हैं। इस संबंध में एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संजय शर्मा ने मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री और माध्यमिक शिक्षा मंडल के अधिकारियों को पत्र लिखा है।
अपने स्कूल में नहीं दे सकेंगे बोर्ड परीक्षा
जानकारी के अनुसार, छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल के सचिव द्वारा 15 अक्टूबर 2026 को आयोजित वर्चुअल बैठक में सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को परीक्षा केंद्रों के निर्धारण संबंधी नए निर्देश दिए गए थे। निर्देशों के अनुसार, सत्र 2026-27 से हाईस्कूल और हायर सेकेंडरी बोर्ड परीक्षाओं के लिए विद्यार्थियों के अपने अध्ययनरत विद्यालय में बने परीक्षा केंद्र के स्थान पर अन्य समीपस्थ विद्यालयों में परीक्षा केंद्र निर्धारित किए जाने हैं। इस व्यवस्था को लेकर शिक्षकों के संगठन ने आपत्ति दर्ज कराई है। एसोसिएशन का कहना है कि शहरी क्षेत्रों में ऐसी व्यवस्था पहले से लागू रही है, लेकिन ग्रामीण और अनुसूचित क्षेत्रों में इसे लागू करना व्यावहारिक नहीं होगा।
ग्रामीण और वनांचल के छात्रों की बढ़ेगी परेशानी
छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संजय शर्मा ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में अभिभावक अपने बच्चों का प्रवेश नजदीकी विद्यालयों में कराते हैं, ताकि उन्हें आसानी से शिक्षा मिल सके। उन्होंने बताया कि प्रदेश के कई अनुसूचित क्षेत्रों में विद्यालयों तक पहुंचने के लिए विद्यार्थियों को पहले ही कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है। ऐसे में परीक्षा केंद्र बदलने से उनकी मुश्किलें और बढ़ जाएंगी। एसोसिएशन के अनुसार, कई विद्यार्थी चार से पांच पंचायतों से तीन से चार किलोमीटर की दूरी तय करके स्कूल पहुंचते हैं।
नए परीक्षा केंद्रों की दूरी 5 से 8 किलोमीटर बढ़ने की आशंका
शिक्षक संगठन ने दावा किया है कि नए निर्देश लागू होने पर कई परीक्षार्थियों को मौजूदा केंद्र की तुलना में पांच से आठ किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ सकती है। वनांचल और दूरस्थ गांवों में परिवहन के पर्याप्त साधन उपलब्ध नहीं होने के कारण विद्यार्थियों को परीक्षा केंद्र तक पहुंचने में कठिनाई होगी। संगठन ने आशंका जताई है कि दूरी बढ़ने से कई विद्यार्थी समय पर परीक्षा केंद्र नहीं पहुंच पाएंगे और मुख्य परीक्षा से वंचित होने का खतरा बढ़ जाएगा।
छात्राओं की सुरक्षा को लेकर भी जताई चिंता
प्रदेश अध्यक्ष संजय शर्मा ने कहा कि अनुसूचित क्षेत्रों के कई गांव जंगलों से घिरे हैं। कुछ इलाकों में जंगली जानवरों की आवाजाही और आवागमन की सीमित सुविधाएं भी बड़ी चुनौती हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने छात्राओं की सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखते हुए कई क्षेत्रों में लगभग पांच किलोमीटर की दूरी पर हाईस्कूल और हायर सेकेंडरी विद्यालय स्थापित किए हैं। ऐसे में विद्यार्थियों को परीक्षा देने के लिए दूसरे विद्यालय भेजना, विशेष रूप से ग्रामीण छात्राओं के लिए परेशानी का कारण बन सकता है।
पिछले साल हजारों विद्यार्थी नहीं दे पाए थे परीक्षा
शिक्षक संगठन ने पिछले सत्र के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि कक्षा 10वीं में कुल 3,21,677 विद्यार्थी पंजीकृत थे, जिनमें से 3,16,730 परीक्षा में शामिल हुए। इसी प्रकार कक्षा 12वीं में 2,45,785 परीक्षार्थियों में से 2,43,010 के उपस्थित होने की जानकारी संगठन ने दी है। एसोसिएशन ने आशंका व्यक्त की है कि यदि परीक्षा केंद्रों की दूरी बढ़ाई जाती है तो अनुपस्थित रहने वाले विद्यार्थियों की संख्या और बढ़ सकती है।
मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री से व्यवस्था बदलने की मांग
छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संजय शर्मा, प्रदेश संयोजक सुधीर प्रधान, वाजिद खान, प्रदेश उपाध्यक्ष देवनाथ साहू, प्रवीण श्रीवास्तव, शैलेंद्र यदु, संजय उपाध्याय, मुकेश मुदलियार, डॉ. कोमल वैष्णव, प्रदेश सचिव मनोज सनाढ्य और प्रदेश कोषाध्यक्ष शैलेंद्र पारीक ने वर्तमान परीक्षा केंद्र व्यवस्था यथावत रखने की मांग की है। संगठन ने मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री, माध्यमिक शिक्षा मंडल के अध्यक्ष और सचिव सहित संबंधित अधिकारियों से छात्रहित में फैसला लेने की अपील की है। शिक्षक संगठन का कहना है कि परीक्षा केंद्र निर्धारित करते समय भौगोलिक परिस्थितियों और विद्यार्थियों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, ताकि कोई भी विद्यार्थी बोर्ड परीक्षा से वंचित न हो।