Durg. दुर्ग। शहर के गयानगर वार्ड क्रमांक 5 में दिनदहाड़े हुए चोरी की एक बड़ी घटना का पुलिस ने 48 घंटे के भीतर खुलासा कर दिया है। इस मामले में पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार कर उसके कब्जे से चोरी गए गहने, मोबाइल फोन और नगदी भी बरामद कर ली है। इस त्वरित कार्रवाई से क्षेत्र के नागरिकों ने राहत की सांस ली है और पुलिस टीम की प्रशंसा की जा रही है।
घटना का विवरण
प्राप्त जानकारी के अनुसार, प्रार्थी नितेश जैन, निवासी गयानगर वार्ड क्रमांक 05, दुर्ग, ने दिनांक 25 मई 2025 को सुबह करीब 5:00 बजे उठने पर पाया कि उसके मकान में किसी अज्ञात चोर ने सेंधमारी कर लाखों की संपत्ति चोरी कर ली है। प्रार्थी ने थाने में रिपोर्ट दर्ज कराते हुए बताया कि चोर उसके घर से चार सोने की अंगुठियां, एक सोने का नजारा, चार स्मार्टफोन, करीब ₹50,000 नगद और एक गुल्लक में रखे सिक्के चुरा ले गया है। प्राप्त शिकायत पर थाना दुर्ग में अपराध क्रमांक 247/2025, धारा 331(4), 305(1) बीएनएस के तहत मामला पंजीबद्ध किया गया। थाना प्रभारी ममता अली शर्मा के मार्गदर्शन में एक विशेष टीम गठित कर मामले की गहन जांच शुरू की गई।
मुखबिर सूचना से मिली सफलता
विवेचना के दौरान पुलिस को एक महत्वपूर्ण सूचना मिली कि गयानगर क्षेत्र का एक युवक चार मोबाइल फोन बेचने के प्रयास में इधर-उधर घूम रहा है। इस सूचना के आधार पर पुलिस ने तत्काल घेराबंदी कर संदिग्ध युवक को हिरासत में लिया। पूछताछ में आरोपी ने अपना नाम भागवत यादव, उम्र 20 वर्ष, निवासी गयानगर, दुर्ग बताया। कड़ी पूछताछ के दौरान भागवत यादव ने उक्त चोरी की वारदात को अंजाम देना स्वीकार कर लिया। पुलिस ने उसकी निशानदेही पर उसके कब्जे से दो सोने की अंगूठियां, चार स्मार्टफोन और ₹3,450 नगद जब्त किए। चोरी का अन्य सामान बरामद करने की प्रक्रिया जारी है। आरोपी को विधिसम्मत गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड हेतु माननीय न्यायालय दुर्ग में प्रस्तुत किया गया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि आरोपी ने चोरी की वारदात अकेले की थी या उसके साथ और भी लोग शामिल थे। इस पूरे घटनाक्रम में दुर्ग पुलिस की चुस्ती और सजगता ने बड़ी चोरी की गुत्थी सुलझा दी। मामले की विवेचना में निरीक्षक ममता अली शर्मा, प्रधान आरक्षक अजय विश्वकर्मा, महिला आरक्षक रेहाना बेगम तथा एसीसीयू टीम के सउनि किरेन्द्र सिंह, आरक्षक नासीर बक्श, क्रांति शर्मा और जी. रवि की विशेष भूमिका रही। इन अधिकारियों की त्वरित कार्रवाई और तकनीकी विश्लेषण की बदौलत आरोपी को पकड़ना संभव हुआ।