PMGSY सड़कों में प्लास्टिक का प्रयोग, पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ विकास की नई दिशा

छग

Update: 2025-12-19 18:05 GMT
Mahasamund. महासमुंद। महासमुंद जिले में पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ विकास की दिशा में एक अभिनव पहल शुरू की गई है। जिले में अब प्लास्टिक कचरे का उपयोग सड़क निर्माण में किया जा रहा है, जिससे सड़कों की गुणवत्ता में वृद्धि होने के साथ-साथ पर्यावरण में जमी गंभीर समस्या—प्लास्टिक कचरे का भी सार्थक समाधान मिल रहा है। कलेक्टर विनय लंगेह के मार्गदर्शन में जिले में प्लास्टिक कचरा प्रबंधन का यह अभिनव प्रयोग प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाय) के अंतर्गत किए जा रहे सड़क निर्माण कार्यों में किया जा रहा है। इस तकनीक से सड़कों की टिकाऊ क्षमता में औसतन दो से तीन वर्ष की अतिरिक्त वृद्धि होती है। आमतौर पर डामर से बनी सड़कें 4 से 5 वर्ष तक टिकती हैं, लेकिन प्लास्टिक मिश्रण से यह 6 से 7 वर्षों तक स्थायी रहती हैं। इसके साथ ही प्रति किलोमीटर निर्माण लागत में भी उल्लेखनीय बचत होती है।

प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के कार्यपालन अभियंता आशीष कुलदीप ने बताया कि वर्ष 2024-25 में जिले की 14 सड़कों, जिनकी कुल लंबाई लगभग 21 किलोमीटर है, में प्लास्टिक मिश्रण का प्रयोग किया गया। इस प्रयोग के सकारात्मक परिणामों को देखते हुए आगामी समय में जिले की 44 सड़कों (लगभग 100 किलोमीटर) का निर्माण इसी तकनीक से किया जाएगा। इस प्रक्रिया के अंतर्गत जिले के अपशिष्ट प्रबंधन तंत्र एवं मनीकंचन केंद्र बागबाहरा से प्लास्टिक कचरा एकत्रित किया जाता है। इसे मशीन द्वारा छोटे-छोटे टुकड़ों में काटा जाता है। इस कार्य में दो महिला समूहों को भी रोजगार मिला है। कटे हुए प्लास्टिक को सावधानीपूर्वक गर्म डामर के मिश्रण में मिलाकर सड़क निर्माण में उपयोग किया जाता है। इस तकनीक से बनी सड़कें सामान्य सड़कों की तुलना में अधिक मजबूत, टिकाऊ और मौसम प्रतिरोधी होती हैं। जिले के ग्राम झालखमरिया से कमार डेरा तक बनी सड़क तथा ग्राम जोरातराई से कमार डेरा तक निर्माणाधीन सड़क में प्लास्टिक मिश्रण का सफल प्रयोग किया गया है। इससे न केवल सड़कों की गुणवत्ता और जीवनकाल में सुधार हुआ है, बल्कि जिले में प्लास्टिक कचरे की समस्या पर भी नियंत्रण पाया गया है।

कलेक्टर विनय लंगेह ने कहा कि यह प्रयोग न केवल पर्यावरण संरक्षण का उत्कृष्ट उदाहरण है, बल्कि रोजगार सृजन और स्थानीय विकास में भी सहायक साबित हो रहा है। उन्होंने कहा कि जिले में प्लास्टिक कचरे के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए और अधिक जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे। कार्यपालन अभियंता आशीष कुलदीप ने बताया कि इस तकनीक से बनी सड़कें गर्मी, बारिश और ठंड के मौसम में भी लंबे समय तक सुरक्षित रहती हैं। प्लास्टिक का उपयोग करने से सड़कें क्रैक और गड्ढेदार नहीं होतीं, जिससे रख-रखाव पर खर्च भी कम आता है। पर्यावरणविदों ने इस पहल की सराहना की है और कहा कि यह मॉडल अन्य जिलों और राज्यों के लिए प्रेरणास्पद है। प्लास्टिक कचरे को सड़क निर्माण में उपयोग करना स्वच्छता, संरक्षण और विकास का संतुलित उदाहरण प्रस्तुत करता है। महासमुंद जिले में यह प्रयोग स्थानीय जनता और अधिकारियों दोनों के लिए जागरूकता का संदेश भी बन रहा है कि पर्यावरण संरक्षण और विकास एक साथ संभव हैं। जिले में आने वाले वर्षों में इस तकनीक का और अधिक विस्तार किया जाएगा, जिससे स्थायी विकास और स्वच्छ पर्यावरण सुनिश्चित किया जा सके।
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