तेंदूपत्ता घोटाला: 5.13 करोड़ की गड़बड़ी, वन अधिकारियों पर लगे गंभीर आरोप

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Update: 2025-07-23 16:57 GMT
Raipur. रायपुर। छत्तीसगढ़ के बीजापुर और राजनांदगांव जिलों में तेंदूपत्ता व्यापार से जुड़ा एक बड़ा घोटाला सामने आया है, जिससे राज्य को 5.13 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। इस घोटाले में राजनांदगांव निवासी ठेकेदार सुधीर कुमार मानेक और वन विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत का आरोप लगाया गया है। मामले की शिकायत रायपुर निवासी विवेक कुमार सिंह ने आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) से की है। शिकायत में घोटाले की उच्च स्तरीय जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की गई है।
क्या है मामला?
साल 2022 में सुधीर मानेक को बीजापुर जिले के भैरमगढ़ इलाके (लॉट नंबर 0064B) में तेंदूपत्ता संग्रहण का ठेका दिया गया था। उन्हें 1300 मानक बोरे तेंदूपत्ता 7299 रुपये प्रति बोरे की दर से खरीदना था। आरोप है कि मानेक ने 4997.54 मानक बोरे संग्रह किए, जिसमें 1476.36 बोरे अवैध रूप से भैरमगढ़ अभयारण्य क्षेत्र से इकट्ठा किए गए। इस अवैध संग्रहण से सरकार को करीब 3.64 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। इसके अलावा मजदूरी और परिवहन भुगतान के रूप में भी कई लोगों को अब तक उनका पारिश्रमिक नहीं मिला है। मजदूरी के 1.59 लाख और परिवहन शुल्क के 6 लाख रुपये बकाया हैं।
राजनांदगांव में दूसरी हेराफेरी
शिकायत में यह भी बताया गया है कि भैरमगढ़ से लाए गए 7348 बोरों में से 2669 बोरों को मानेक ने राजनांदगांव के गुरुकृपा गोदाम में जमा किया और हेराफेरी कर 93.34 लाख रुपये का नुकसान पहुंचाया। इस मामले में 19 जून 2025 को कोतवाली राजनांदगांव में एफआईआर दर्ज की गई है, जिसमें भारतीय न्याय संहिता की धाराएं 316(2), 316(5) और 61(2) के तहत धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात और साजिश के आरोप शामिल हैं।
आदिवासी संग्राहकों का आक्रोश
बीजापुर के आठ गांवों के आदिवासी संग्राहकों को अब तक 44.79 लाख रुपये का भुगतान नहीं किया गया है। मार्च 2023 में इन ग्रामीणों ने प्रदर्शन भी किया था, लेकिन कोई कार्यवाही नहीं हुई। शिकायतकर्ता ने बताया कि मानेक द्वारा दिए गए कई चेक बाउंस हो चुके हैं, जिससे ट्रैक्टर मालिक और मजदूरों में रोष है।
शिकायतकर्ता की मांगें
विवेक सिंह ने मांग की है कि 5.13 करोड़ रुपये की राशि दोषियों से वसूली जाए, सभी दोषी अधिकारियों और ठेकेदार की तत्काल गिरफ्तारी की जाए, और प्रभावित आदिवासियों को मुआवजा मिले। साथ ही, झूठे मामलों में जेल में बंद कर्मचारियों को रिहा किया जाए।
नक्सली फंडिंग का भी आरोप
शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि तेंदूपत्ता के इस अवैध व्यापार के जरिए नक्सल फंडिंग की जा रही थी। इस आरोप ने मामले को और भी गंभीर बना दिया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए शिकायतकर्ता ने EOW और ACB से गहन जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है, ताकि भविष्य में इस प्रकार की अनियमितताओं को रोका जा सके।
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