सरगुजा ओलंपिक 2026 का भव्य शुभारंभ, प्रतिभाओं के महासंगम में चमका युवा हुनर
छग
Ambikapur. अंबिकापुर। छत्तीसगढ़ में पहली बार आयोजित सरगुजा ओलंपिक 2026 का भव्य आगाज़ सरगुजा जिले के अम्बिकापुर स्थित पीजी कॉलेज ग्राउंड में हुआ। तीन दिवसीय इस संभाग स्तरीय खेल महोत्सव का शुभारंभ मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने किया। उद्घाटन अवसर पर पूरे संभाग से आए खिलाड़ियों, जनप्रतिनिधियों और खेल प्रेमियों की बड़ी उपस्थिति ने आयोजन को उत्सव का रूप दे दिया। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि यह आयोजन केवल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि खिलाड़ियों के सपनों को नई उड़ान देने का मंच है। उन्होंने इसे ’खिलाड़ियों का महाकुंभ’ बताते हुए कहा कि सरगुजा, जशपुर, बलरामपुर, कोरिया, सूरजपुर और मनेंद्रगढ़- चिरमिरी-भरतपुर जिलों से आए 2 हजार 190 से अधिक खिलाड़ी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं। इनमें 1 हजार 44 महिला और 1 हजार 146 पुरुष खिलाड़ी शामिल हैं, जो 17 वर्ष से कम एवं 17 वर्ष से अधिक आयु वर्ग में प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं।
भावनाओं का किया सम्मान
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बताया कि बस्तर ओलंपिक की सफलता के बाद सरगुजा में भी इस तरह के आयोजन की मांग उठी थी, जिसे सरकार ने प्राथमिकता दी। विकासखंड और जिला स्तर की प्रतियोगिताओं के बाद अब संभाग स्तर पर यह आयोजन किया जा रहा है। उन्होंने खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि राज्य सरकार खेलों के विकास के लिए प्रतिबद्ध है। ओलंपिक में भाग लेने वाले खिलाड़ियों को 21 लाख रुपये, स्वर्ण पदक विजेताओं को 3 करोड़, रजत पदक विजेताओं को 2 करोड़ और कांस्य पदक विजेताओं को 1 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। साथ ही ’खेलो इंडिया’ के तहत स्टेडियम निर्माण और खेल अधोसंरचना को मजबूत किया जा रहा है। बस्तर और सरगुजा ओलंपिक के लिए 10 करोड़ रुपये का बजट भी निर्धारित किया गया है। केबिनेट मंत्री श्रीराम विचार नेताम ने खिलाड़ियों से कहा अपनी खेल कौशल से परिवार, समाज, प्रदेश व देश का नाम रोशन करें। मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा छत्तीसगढ़ सरकार बस्तर से लेकर सरगुजा तक खेल प्रतिभाओ को मंच देने का कार्य कर रही है।
गीता फोगाट ने दी सफल होने का मंत्र
कार्यक्रम में अंतरराष्ट्रीय स्तर की कुश्ती खिलाड़ी गीता फोगाट की मौजूदगी खिलाड़ियों के लिए विशेष आकर्षण रही। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि एक छोटे से गाँव से निकलकर अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुँचने के पीछे उनके पिता का प्रोत्साहन और उनकी मेहनत रही। उन्होंने खिलाड़ियों को संदेश दिया कि नशे से दूर रहकर कड़ी मेहनत और जुनून के साथ अपने लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि हार से घबराने के बजाय उससे सीख लेकर आगे बढ़ना ही सफलता का रास्ता है। साथ ही उन्होंने अभिभावकों से बेटियों को समान अवसर देने की अपील की।