Surajpur. सूरजपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित सूरजपुर मां-बेटी हत्याकांड में तीन दोषियों को फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद अब जल्लाद की व्यवस्था को लेकर नई मांग सामने आई है। संयुक्त पुलिस कर्मचारी एवं परिवार कल्याण संघ के अध्यक्ष उज्ज्वल दीवान ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और गृह मंत्री विजय शर्मा को पत्र लिखकर स्वयं जल्लाद बनने की इच्छा जताई है। उन्होंने कहा कि यदि सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद दोषियों को फांसी देने की स्थिति बनती है, तो वे बिना किसी पारिश्रमिक के जल्लाद की भूमिका निभाने के लिए तैयार हैं। उन्होंने इस पहल को पीड़ित पुलिस परिवार के प्रति संवेदना और न्याय की मांग से जोड़ा है।

मुख्यमंत्री और गृह मंत्री को लिखा पत्र
संयुक्त पुलिस कर्मचारी एवं परिवार कल्याण संघ के अध्यक्ष उज्ज्वल दीवान ने सूरजपुर हत्याकांड के दोषियों को सुनाई गई फांसी की सजा के संबंध में राज्य सरकार से आवश्यक कदम उठाने की मांग की है। उन्होंने मुख्यमंत्री और गृह मंत्री को पत्र भेजकर कहा कि इस जघन्य अपराध में दोषी ठहराए गए व्यक्तियों के खिलाफ न्यायालय द्वारा सुनाई गई सजा पर कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए। दीवान ने पत्र में स्पष्ट किया कि यदि मृत्युदंड के क्रियान्वयन की सभी न्यायिक और प्रशासनिक प्रक्रियाएं पूरी होती हैं, तो वे निशुल्क जल्लाद बनने के लिए तैयार हैं।

तीन दोषियों को सुनाई गई है फांसी की सजा
सूरजपुर के बहुचर्चित मां-बेटी हत्याकांड में 8 अक्टूबर 2026 को फास्ट ट्रैक कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया था। न्यायालय ने कुलदीप साहू, चंद्रकांत चौधरी और फूल सिंह उर्फ रिंकू विश्वकर्मा को मृत्युदंड की सजा सुनाई थी। वहीं, चौथे दोषी आर्यन विश्वकर्मा उर्फ गोल्डी को आजीवन कारावास से दंडित किया गया था। जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश आनंद प्रकाश वारियाल की अदालत ने मामले की सुनवाई के बाद यह फैसला सुनाया था।

2024 में हुई थी मां-बेटी की हत्या
यह मामला अक्टूबर 2024 का है। सूरजपुर में एक प्रधान आरक्षक की पत्नी और नाबालिग बेटी की हत्या कर दी गई थी। मामले में महिला के साथ दुष्कर्म का अपराध भी न्यायालय में सिद्ध हुआ। इस घटना ने पूरे प्रदेश में गंभीर चिंता और आक्रोश पैदा किया था। पुलिस की जांच और न्यायालयीन सुनवाई के बाद चार लोगों को दोषी ठहराया गया। इनमें तीन को मृत्युदंड और एक को आजीवन कारावास की सजा दी गई। न्यायालय ने मामले की गंभीरता और अपराध की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए फैसला सुनाया था।

पुलिस परिवारों की सुरक्षा का उठाया मुद्दा
उज्ज्वल दीवान ने अपने पत्र में पुलिसकर्मियों और उनके परिवारों की सुरक्षा तथा सम्मान से जुड़ा मुद्दा भी उठाया है। उनका कहना है कि पुलिसकर्मी कानून व्यवस्था बनाए रखने और आम नागरिकों की सुरक्षा के लिए जिम्मेदारी निभाते हैं। ऐसे में उनके परिवारों के साथ होने वाले गंभीर अपराधों में न्याय सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है। दीवान ने कहा कि उनकी पेशकश का उद्देश्य पुलिस परिवार के साथ खड़े रहना और पीड़ितों को न्याय दिलाने की मांग सरकार तक पहुंचाना है।

पहले पुलिस विभाग में रह चुके हैं उज्ज्वल दीवान
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उज्ज्वल दीवान वर्ष 2010 में धमतरी जिला पुलिस बल में आरक्षक के पद पर भर्ती हुए थे। बाद में उन्होंने पुलिस की नौकरी से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने पुलिस कर्मचारियों के अधिकारों से जुड़े मुद्दे उठाने पर अपने विरुद्ध राजद्रोह और पुलिस द्रोह के मामले दर्ज होने का दावा भी किया है। उनके पिता पुलिस विभाग में प्रधान आरक्षक के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। वर्ष 2023 में दीवान आजाद जनता पार्टी के अध्यक्ष के रूप में राजनीतिक गतिविधियों से भी जुड़े रहे। वर्तमान में वे संयुक्त पुलिस कर्मचारी एवं परिवार कल्याण संघ के अध्यक्ष हैं।

फांसी देने के लिए कानूनी प्रक्रिया पूरी होना जरूरी
किसी भी दोषी को मृत्युदंड सुनाए जाने के बाद सजा का क्रियान्वयन निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के अनुसार ही हो सकता है। सत्र न्यायालय द्वारा सुनाए गए मृत्युदंड की उच्च न्यायालय से पुष्टि आवश्यक होती है। इसके अतिरिक्त दोषियों के पास अपील और अन्य उपलब्ध कानूनी उपाय अपनाने का अधिकार रहता है। ऐसे में उज्ज्वल दीवान की ओर से जल्लाद बनने की इच्छा जताने का अर्थ यह नहीं है कि उनकी नियुक्ति हो गई है या फांसी की तारीख निर्धारित हो चुकी है। फिलहाल उनके पत्र के बाद सूरजपुर मां-बेटी हत्याकांड एक बार फिर चर्चा में है। उनकी मांग पर सरकार की ओर से किसी औपचारिक निर्णय की पुष्टि नहीं हुई है।
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