Dantewada. दंतेवाड़ा। गीदम विकासखंड अंतर्गत ग्राम कटूलनार के निवासी सोना राम मुडामी उन किसानों में से हैं, जिन्होंने यह समझ लिया है कि आज के समय में खेती केवल हल चलाने का नाम नहीं है, बल्कि तकनीक, समझ और समय के साथ चलने की कला है। इसी सोच के साथ उन्होंने सीमित भूमि में भी अधिक उत्पादन, कम लागत और सुरक्षित खेती का रास्ता चुना और 0.50 हेक्टेयर में बहुफसली जैविक मॉडल मुड़ामी द्वारा 0.50 हेक्टेयर क्षेत्र में मुख्य फसल के रूप में टमाटर लगाया गया है। इसके साथ-साथ जैविक पद्धति से मूली, लाल भाजी,पालक की मिश्रित खेती की जा रही है। इस बहुफसली मॉडल से भूमि का अधिकतम उपयोग ही रहा है। अलग-अलग समय पर फसल तैयार होने से नियमित आय प्राप्त हो रही है एक फसल खराब होने पर दूसरी फसल किसान को संभाल लेती है। ड्रिप सिंचाई पानी की बचत, उत्पादन में बढ़ोतरी खेती में ड्रिप सिचाई प्रणाली अपनाकर मुड़ामी ने यह सिद्ध किया है कि कम पानी में अधिक उत्पादन संभव पौधों को आवश्यकतानुसार नमी मिलती है।
खरपतवार कम उगते हैं और फसल स्वस्थ रहते है। यह प्रणाली क्षेत्र के किसानों के लिए जल संरक्षण का सशक्त उदाहरण है। इसके साथ ही सोना राम मुड़ामी ने कीटों ने निजात पाने के लिए लाईट ट्रेप कीट नियंत्रण का स्मार्ट तरीका खोजा। उन्होंने रासायनिक दवाओं पर निर्भर होने के बजाय े देशी जुगाड़ करके लाईट ट्रेप लगाया है। जिससे हानिकारक कीट प्रकाश की ओर आकर्षित होकर नष्ट हो जाते हैं फसल कीटनाशक मुक्त रहती है। लागत लगभग नगण्य रहती है पर्यावरण और मिट्टी दोनों सुरक्षित रहते हैं। यह नवाचार यह साबित करता है कि बुद्धि हो तो समाधान मिल ही जाता है। जैविक खेती गुणवत्ता, स्वास्थ्य और भरोसा मुड़ामी की खेती की सबसे बड़ी विशेषता है। रसायन मुक्त उत्पादन, ताजी, स्वादिष्ट और सुरक्षित सब्जियाँ स्थानीय बाजार में अच्छी मांग उपभोक्ताओं का बढ़ता भरोसा जैविक सब्जियों के कारण उन्हें उचित मूल्य भी प्राप्त हो रहा है। गांव से पूरे विकासखण्ड तक आज सोना राम मुड़ामी की खेती को ड्रिप जैविक नवाचार आधारित आदर्श मॉडल के रूप में देखा जा रहा है। उनकी खेती यह संदेश देती है कि जमीन छोटी हो सकती है, लेकिन सोच बड़ी हो तो खेती से सम्मान, आय और आत्मनिर्भरता तीनों एक साथ मिलते हैं।”