दोषपूर्ण गोभी बीज मामले में कंपनी को झटका, किसानों को मुआवजा देने का आदेश बरकरार
छग
Raipur. रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने किसानों के पक्ष में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए नोबेल सीड्स प्राइवेट लिमिटेड की अपील को खारिज कर दिया है। आयोग ने जिला उपभोक्ता आयोग, कबीरधाम के आदेश को सही ठहराते हुए कंपनी को प्रभावित किसानों को मुआवजा देने के निर्देश दिए हैं। यह मामला कबीरधाम जिले के ग्राम बहरमुड़ा के किसानों से जुड़ा है। किसानों परषोत्तम निर्मलकर, भरत कश्यप और टेकुराम कश्यप ने वर्ष 2024 में कंपनी द्वारा बेचे गए ‘नोबेल हैप्पी 101’ किस्म के फूलगोभी के बीज खरीदे थे। कंपनी और विक्रेताओं द्वारा दावा किया गया था कि यह बीज उच्च गुणवत्ता के हैं और गर्मी के मौसम में भी अच्छी पैदावार देंगे।
हालांकि जब फसल तैयार होने का समय आया, तो किसानों को निराशा हाथ लगी। करीब 50 से 60 प्रतिशत पौधों में फूल नहीं आए। जिन पौधों में फूल निकले भी, वे गुणवत्ता में कमजोर पाए गए। किसानों के अनुसार गोभी के फूल छोटे, रेशेदार और लालिमा लिए हुए थे, जिन्हें बाजार में बेचना संभव नहीं था। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। किसानों की शिकायत के बाद उद्यानिकी विभाग ने मामले की जांच के लिए एक चार सदस्यीय टीम गठित की। इस टीम ने खेतों का निरीक्षण कर विस्तृत रिपोर्ट तैयार की। जांच में यह स्पष्ट किया गया कि फसल खराब होने का मुख्य कारण बीजों में खामी थी। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि यह बीज गर्मी के मौसम के लिए विकसित किए गए थे, इसलिए मौसम को दोष देना उचित नहीं है।
मामले में कंपनी ने अपनी अपील में तर्क दिया कि फसल खराब होने के पीछे ओलावृष्टि और भारी बारिश जैसे प्राकृतिक कारण जिम्मेदार थे। कंपनी ने यह भी कहा कि बीजों की गुणवत्ता की पुष्टि प्रयोगशाला परीक्षण से की जानी चाहिए थी। लेकिन आयोग की पीठ ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया। आयोग के अध्यक्ष Gautam Chouradia और सदस्य Pramod Kumar Verma ने कहा कि केवल अखबार की खबरों के आधार पर ओलावृष्टि या मौसम को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि एक सामान्य किसान से यह अपेक्षा नहीं की जा सकती कि वह भविष्य के कानूनी विवाद के लिए बीज का नमूना सुरक्षित रखे।
आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि ऐसे मामलों में किसानों के हितों की रक्षा प्राथमिकता होनी चाहिए। आयोग ने यह भी माना कि किसानों को हुए नुकसान के लिए कंपनी जिम्मेदार है और उन्हें उचित मुआवजा दिया जाना चाहिए। राज्य आयोग ने जिला आयोग के आदेश को बरकरार रखते हुए संबंधित किसानों को मुआवजा देने का निर्देश दिया है। आदेश में यह भी कहा गया है कि यदि कंपनी एक माह के भीतर भुगतान नहीं करती है, तो उसे 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा। इस फैसले को किसानों के लिए राहत भरा माना जा रहा है। इससे यह संदेश भी गया है कि यदि किसी कंपनी द्वारा खराब गुणवत्ता के बीज बेचे जाते हैं, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है और किसानों को न्याय मिल सकता है। यह मामला कृषि क्षेत्र में गुणवत्ता और जवाबदेही से जुड़ा एक महत्वपूर्ण उदाहरण बनकर सामने आया है। फिलहाल संबंधित विभाग और किसान इस फैसले के क्रियान्वयन की प्रतीक्षा कर रहे हैं।