रायपुर। छत्तीसगढ़ के आदिम जाति विकास विभाग में कथित छात्रवृत्ति गबन और सेवानिवृत्ति लाभों के भुगतान को लेकर विवाद सामने आया है। आरटीआई कार्यकर्ता आशीष देव सोनी ने विभाग के पूर्व अधिकारी तारकेश्वर देवांगन के खिलाफ कार्रवाई और 28 लाख रुपये से अधिक की कथित वित्तीय क्षति की वसूली नहीं किए जाने का आरोप लगाया है। उन्होंने मुख्य सचिव, विभागीय सचिव, आयुक्त और रायपुर कलेक्टर को संयुक्त अभ्यावेदन देकर मामले में हस्तक्षेप की मांग की है। शिकायतकर्ता आशीष देव सोनी का आरोप है कि तारकेश्वर देवांगन पूर्व में करीब दो करोड़ रुपये के कथित रोटी मेकर मशीन खरीदी घोटाले में भी आरोपी रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि छात्रवृत्ति और अन्य सरकारी योजनाओं से जुड़ी रकम के गबन का मामला सामने आने के बावजूद विभागीय स्तर पर प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।

शिकायत के अनुसार, छात्रवृत्ति, अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति, गुरु घासीदास जयंती आयोजन और छात्रावास संचालन जैसी मदों से कुल 28 लाख 23 हजार 624 रुपये की राशि 48 अलग-अलग सेल्फ चेक और नकद निकासी के माध्यम से निकाली गई थी। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि इस राशि के उपयोग और निकासी में गंभीर वित्तीय अनियमितताएं हुईं। आशीष देव सोनी ने अपने अभ्यावेदन में छत्तीसगढ़ लोक आयोग के प्रकरण क्रमांक 22/2019 और 6 नवंबर 2025 के कथित आदेश का उल्लेख किया है। उनके अनुसार, लोक आयोग ने मामले में कदाचार पाते हुए संबंधित अधिकारियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई और राशि की वसूली की अनुशंसा की थी।


आरटीआई कार्यकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि विभाग को वर्ष 2024 में मामले की जानकारी होने के बावजूद 17 जनवरी 2025 को तारकेश्वर देवांगन को अपर संचालक पद पर पदोन्नति दी गई। उन्होंने इस पदोन्नति की वैधानिकता की जांच करने की मांग की है। शिकायत में सबसे गंभीर सवाल सेवानिवृत्ति के बाद कथित तौर पर जारी किए गए अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) को लेकर उठाया गया है। सोनी का दावा है कि लंबित वसूली और लोक आयोग की अनुशंसा के बावजूद अधिकारी को सेवानिवृत्ति संबंधी वित्तीय लाभ देने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।





 


उन्होंने मांग की है कि संबंधित एनओसी की वैधता की जांच कर आवश्यक होने पर उसे निरस्त किया जाए। साथ ही 28,23,624 रुपये की कथित वित्तीय क्षति की वसूली और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की जांच की जाए। सोनी ने छत्तीसगढ़ सिविल सेवा पेंशन नियम, 1976 का हवाला देते हुए पेंशन, ग्रेच्युटी और अन्य भुगतान की नियमानुसार समीक्षा करने की मांग की है। हालांकि, इन भुगतानों पर रोक लगाने की कानूनी पात्रता संबंधित कार्यवाही की स्थिति और लागू नियमों पर निर्भर करेगी।
शिकायतकर्ता ने चेतावनी दी है कि उचित कार्रवाई नहीं होने पर वह उच्च न्यायालय की शरण ले सकते हैं। फिलहाल लोक आयोग के कथित आदेश, एनओसी जारी होने और भुगतान की स्थिति की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है। तारकेश्वर देवांगन तथा संबंधित विभागीय अधिकारियों का पक्ष भी उपलब्ध नहीं है। ऐसे में शिकायत में लगाए गए आरोपों को अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जा सकता।
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