Raipur Breaking: NDPS एक्ट के तहत दो आरोपियों को मिली सजा

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Update: 2026-01-03 17:23 GMT
Raipur. रायपुर। रायपुर की विशेष न्यायालय (एन.डी.पी.एस. एक्ट) ने ड्रग्स और मनःप्रभावी पदार्थों के मामलों में दो आरोपियों को सजा सुनाते हुए जेलखाने में भेजने का वारंट जारी किया है। यह वारंट भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता, सन् 383 के तहत जारी किया गया है। आरोपियों के नाम पियुष चोकसे और प्रदीप यादव हैं, जिन्हें भारतीय न्याय संहिता और एन.डी.पी.एस. एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत दोषी ठहराया गया है। अदालत ने दोनों को कठोर कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई है।

पियुष चोकसे को सात साल की जेल
अदालत जनाब पंकज कुमार सिन्हा, विशेष न्यायाधीश (एन.डी.पी.एस. एक्ट), रायपुर ने पियुष चोकसे, पुत्र मनोज चोकसे, उम्र 19 वर्ष, निवासी सरदार पटेल नगर कॉलोनी, भोपाल (म.प्र.) को स्वापक औषधि एवं मनः प्रभावी पदार्थ अधिनियम 1985 की धारा 20 (b)(ii)(B) के तहत दोषी पाया। अदालत ने उन्हें सात (07) वर्ष का कठोर कारावास और 70,000/- रूपये अर्थदंड से दंडित किया। अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि यदि अभियुक्त अर्थदंड का भुगतान नहीं करता है तो उसे अतिरिक्त सात महीने का कठोर कारावास भुगतना होगा। अदालत ने यह स्पष्ट किया कि अभियुक्त द्वारा न्यायिक अभिरक्षा में बिताई गई अवधि को उनके कुल कारावास में समायोजित किया जाएगा। इसके तहत पियुष चोकसे को न्यायालय के आदेश के अनुसार केंद्रीय जेल, रायपुर भेजा जाएगा, जहां उसे सजा पूरी करने के लिए रखा जाएगा।

प्रदीप यादव को चार साल की जेल
समानांतर रूप से, अदालत ने प्रदीप यादव, पुत्र प्रकाश यादव, उम्र 20 वर्ष, निवासी ग्राम भदरई, उदयपुर, थाना लिधौरा, जिला टीकमगढ़ (म.प्र.) को भी एन.डी.पी.एस. एक्ट की धारा 20 (b)(ii)(B) के तहत दोषी पाया। अदालत ने उन्हें चार (04) वर्ष का कठोर कारावास और 40,000/- रूपये अर्थदंड से दंडित किया। यदि अर्थदंड का भुगतान नहीं होता है, तो प्रदीप यादव को चार महीने का अतिरिक्त कठोर कारावास भुगतना होगा। प्रदीप यादव ने भी न्यायिक अभिरक्षा में बिताई गई अवधि को कुल कारावास में शामिल किया जाएगा। अदालत के आदेशानुसार, उन्हें भी केंद्रीय जेल, रायपुर भेजा जाएगा।

जेल वारंट की कानूनी प्रक्रिया
विशेष न्यायालय ने अपने वारंट में स्पष्ट किया कि दोनों अभियुक्तों को तत्काल हिरासत में लिया जाए और जेल में सजा की तामील पूरी की जाए। यदि अर्थदंड का भुगतान बीच में हो जाए, तो जेल की सजा की अवधि में समायोजन किया जाएगा। यह आदेश इंडियन पीनल कोड की धारा 68 और 69 की तज़बीज के अनुसार लागू होगा। वारंट में यह भी निर्देश है कि जेल प्रशासन सजा की पूरी तामील का दस्तावेजी प्रमाण अदालत को वापस भेजे। जेल में भेजने के बाद दोनों अभियुक्तों की सुरक्षा और मानवीय अधिकारों का पूरा ध्यान रखा जाएगा।

एन.डी.पी.एस. एक्ट के तहत सख्त कार्रवाई
विशेष न्यायालय ने यह स्पष्ट किया कि एन.डी.पी.एस. अधिनियम के तहत ड्रग्स और मनःप्रभावी पदार्थों के मामले में किसी भी प्रकार की सहनशीलता नहीं बरती जाएगी। अपराधी चाहे नाबालिग हों या वयस्क, उन्हें कड़ा दंड भुगतना होगा। अदालत के आदेश से यह संदेश गया है कि राज्य में नशीली दवाओं के कारोबार और अवैध स्वापक औषधि के मामलों में पुलिस और न्यायपालिका मिलकर सख्त कार्रवाई कर रही हैं।

पुलिस और जेल प्रशासन की भूमिका
थाना गोल बाजार और थाना देवेंद्र नगर पुलिस ने इन मामलों में गहन जांच कर अभियुक्तों की गिरफ्तारी सुनिश्चित की। पुलिस ने जांच और सबूत संकलन के बाद अभियोजन पक्ष को कोर्ट में प्रस्तुत किया। जेल प्रशासन को निर्देशित किया गया है कि दोनों अभियुक्तों को केंद्रिय जेल में सुरक्षित रखकर सजा की तामील पूरी करें और सजा पूर्ण होने के बाद अदालत को दस्तावेजी रिपोर्ट सौंपें।

सामाजिक और कानूनी संदेश
इस कार्रवाई के माध्यम से यह स्पष्ट संदेश गया है कि ड्रग्स और मनःप्रभावी पदार्थों के अवैध कारोबार में शामिल किसी भी व्यक्ति को कानूनी सहनशीलता नहीं दी जाएगी। न्यायालय ने कठोर कारावास और भारी अर्थदंड के माध्यम से न केवल अभियुक्तों को दंडित किया है बल्कि समाज में नशीली दवाओं और अवैध पदार्थों के खिलाफ चेतावनी भी जारी की है।
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