Bilaspur. बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के प्रतिष्ठित राजकुमार कॉलेज (RKC) रायपुर की सोसायटी के कामकाज, सदस्यता और नियमों में कथित अनियमितताओं की केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से जांच कराने की मांग वाली याचिका को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। जस्टिस ए.के. प्रसाद की एकलपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता राजेश ढींगरा न तो राजकुमार कॉलेज सोसायटी के सदस्य हैं और न ही किसी पूर्व रियासत के मान्यताप्राप्त शासक। ऐसे में उन्हें सोसायटी के आंतरिक मामलों और नियमों को चुनौती देने का कानूनी अधिकार नहीं है।

सोसायटी के नियमों और नियुक्तियों पर उठाए थे सवाल
जानकारी के अनुसार, दुर्ग निवासी राजेश ढींगरा और पूर्व महाराजा सुरेंद्र बहादुर सिंह ने राजकुमार कॉलेज सोसायटी के कामकाज को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि सोसायटी में आजीवन सदस्यों को शामिल करने के दौरान निर्धारित नियमों और वैध दस्तावेजों का पालन नहीं किया गया। इसके अलावा सोसायटी के सचिव और राजकुमार कॉलेज के प्राचार्य कर्नल अविनाश सिंह की नियुक्ति तथा उनकी शैक्षणिक योग्यता को लेकर भी सवाल उठाए गए थे। याचिकाकर्ताओं ने संस्था के वित्तीय और प्रशासनिक कामकाज में कथित अनियमितताओं की जांच कराने की मांग की थी।

1994 के नियम निरस्त करने की थी मांग
याचिका में राजकुमार कॉलेज सोसायटी के वर्ष 1994 में लागू किए गए नियमों को निरस्त करने और मार्च 1953 के मूल नियमों को दोबारा लागू करने की मांग की गई थी। याचिकाकर्ताओं का आरोप था कि सोसायटी के मूल सदस्यों के उत्तराधिकारियों की वैधता साबित करने वाले आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए। इसी संबंध में उन्होंने पंजीयक फर्म्स एवं सोसायटी के समक्ष शिकायत भी दर्ज कराई थी। हालांकि, पंजीयक ने 10 अगस्त 2020 को यह कहते हुए शिकायत बंद कर दी थी कि शिकायतकर्ता संबंधित सोसायटी के सदस्य नहीं हैं।

पूर्व महाराजा की मृत्यु के बाद बदली स्थिति
हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान बताया गया कि याचिकाकर्ता पूर्व महाराजा सुरेंद्र बहादुर सिंह का 29 अप्रैल 2025 को निधन हो चुका है। इसके साथ ही उनके कानूनी वारिस भी इस मुकदमे को आगे बढ़ाने के इच्छुक नहीं हैं। दूसरे याचिकाकर्ता राजेश ढींगरा ने न्यायालय के समक्ष स्वीकार किया कि वह न तो किसी पूर्व रियासत के मान्यताप्राप्त शासक हैं और न ही राजकुमार कॉलेज सोसायटी के सदस्य। हालांकि, उन्होंने बताया कि वह पहले राजकुमार कॉलेज छात्र संघ से जुड़े रहे हैं।

सोसायटी और राज्य सरकार ने रखी दलील
सुनवाई के दौरान राजकुमार कॉलेज सोसायटी की ओर से दलील दी गई कि राजेश ढींगरा को संस्था के नियमों, सदस्यता और आंतरिक प्रशासनिक मामलों को चुनौती देने का अधिकार नहीं है। वहीं, राज्य शासन ने न्यायालय को बताया कि छत्तीसगढ़ सोसायटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम के अंतर्गत शिकायतों की जांच कराने के लिए वैधानिक व्यवस्था मौजूद है। इस व्यवस्था के तहत संबंधित व्यक्ति पंजीयक के समक्ष शिकायत कर सकता है और उसके निर्णय के खिलाफ निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार अपील भी कर सकता है।

हाईकोर्ट ने याचिका खारिज की
जस्टिस ए.के. प्रसाद की एकलपीठ ने कहा कि केवल छात्र संघ से पूर्व में जुड़े रहने के आधार पर किसी व्यक्ति को सोसायटी की सदस्यता या उसके नियमों को चुनौती देने का अधिकार नहीं मिल जाता। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि शिकायत दर्ज कराने और उसके बंद होने मात्र से याचिकाकर्ता को कोई स्वतंत्र कानूनी अधिकार प्राप्त नहीं होता। कोर्ट ने माना कि पूर्व महाराजा सुरेंद्र बहादुर सिंह की मृत्यु और उनके कानूनी वारिसों द्वारा मुकदमा आगे नहीं बढ़ाने के बाद राजेश ढींगरा अकेले इस याचिका को जारी रखने के पात्र नहीं हैं। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने सीबीआई जांच सहित अन्य मांगों वाली याचिका खारिज कर दी। यह फैसला मुख्य रूप से याचिका दायर करने के कानूनी अधिकार से संबंधित है। अदालत ने कथित अनियमितताओं के आरोपों को सही या गलत ठहराने का अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया।
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