ज़ाकिर घुरसेना/ कैलाश यादव

भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता अजय चंद्राकर द्वारा दिए गए बयान मोहब्बत और भ्रष्टाचार कभी खत्म नहीं होते, केवल बाबू बदल जाते हैं ने राज्य राजनीति में हलचल मचा दी है। ठीक भी है दोनों में दिल और घर बसता भी है और उजड़ता भी है, खैर सुर्खियों में कैसे रहना है डाला भैया से पूछे। नेता, अभिनेता, पत्रकार से लेकर आम जनता भी इस बयान का मजे ले रही है। बस अपना अपना तरीका है मजे लेने का। कांग्रेसी भी मजे लेने से कहां चूकने वाले थे, मजे लेते हुए आननफानन में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने तीखा पलटवार करते हुए कहा कि यह भाजपा सरकार के दो साल के कार्यकाल में फैले भ्रष्टाचार की खुली स्वीकारोक्ति है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा, जिस तरह मोहब्बत कभी खत्म नहीं होती, उसी तरह भ्रष्टाचार भी समाप्त नहीं हो सकता। भाजपा नेता द्वारा दिया गया यह बयान साफ-साफ दर्शाता है कि राज्य में भ्रष्टाचार अपने चरम पर है और अब इसे उनके ही नेता मानने लगे हैं। सत्ता में आने से पहले भाजपा बड़े-बड़े दावे करती थी कि भ्रष्टाचार को खत्म किया जाएगा, लेकिन यह बयान साबित करता है कि केवल चेहरे और बाबू बदल गए हैं, व्यवस्था वहीं की वहीं है। बैज जी तो ऐसे बोल रहे हैं जैसे उनके शासनकाल में भ्रस्टाचार तो था ही नहीं। जनता में खुसुर-फुसुर है कि कांग्रेस के सांसद राहुल गांधी भी चुनाव के दौरान मोहब्बत की दुकान खोलते रहे है। अब वही दुकान भाजपा चला रही है तो कांग्रेसियों के पेट में दर्द क्यों हो रहा है। ये राजनीति का दस्तूर है जो सत्ता में होगा उसे मोहब्ब्त की दुकान खोलनी ही पड़ेगी। बहरहाल कांग्रेसी सत्ता से बाहर होकर उजड़े हुए है और डाला भैया के मंत्री नहीं बनने पर दिल उजड़ा हुआ है। इसी बात पर शायर शकील आज़मी का शेर याद आया "दिल बसे थे मगर उजड़ रहे थे हम, मोहब्बत की जंग लड़ रहे थे हम"।

व्यापारी और पार्षद कौन किसे पीट सकता है

राजनाति में बने रहने के लिए टेरर दिखाना जरूरी समझा जाता है। किसी को भी मार दो भले ही मामला कुछ भी नहीं हो पर सुर्खियों में बने रहने के लिए ये हथकंडा बहुत कारगर साबित हो रहा है। दुर्ग जिले में एक ज्वेलरी व्यापारी ने बीजेपी पार्षद की पिटाई कर दी है। मामला पुरानी रंजिश को लेकर बताया जा रहा है. व्यापारी और जामुल पालिका परिषद के पार्षद दीपक गुप्ता के बीच मारपीट हुई है। पार्षद ने शिकायत में बताया कि व्यापारी ने नेतागिरी खत्म करने और दोबारा चुनाव लडऩे लायक नहीं छोडऩे जैसी धमकी देकर मारपीट की है। उन्होंने बताया कि वे अपने काम से नगर पालिका परिषद कार्यालय जा रहे थे। इसी दौरान ठेठवार मोहल्ला में वर्मा के घर के पास अचानक केशव सोनी वहां पहुंचे और उनका रास्ता रोक लिया। केशव ने बिना किसी कारण के गाली-गलौच शुरू कर दी और जान से मारने की धमकी दी। पास में पड़े लकड़ी के डंडे से उनके सिर पर हमला किया, जिससे सिर, बाएं आंख और हाथ की उंगली में चोट आई है। ज्वेलरी व्यापारी केशव सोनी ने भी पार्षद दीपक गुप्ता के खिलाफ एफआईआर करवाई है। केशव सोनी ने अपनी शिकायत में बताया कि वे गांव से धान बेचकर लौट रहे थे और अपने कर्मचारी को शिवपुरी जामुल में छोडऩे के बाद घर जा रहे थे। इसी दौरान ठेठवार पारा सुभाष नगर में दीपक गुप्ता ने उन्हें रुकने के लिए कहा। पार्षद ने पुरानी बात को लेकर पहले गाली-गलौच की और फिर जान से मारने की धमकी देते अपने भाई को भी बुला लिया और दोनों ने मिलकर मारपीट की। जनता में खुसुर-फुसुर है कि नेता गिरी में बने रहना है तो नेता गिरी औऱ व्यापारी होना जरूरी है। पुरानी रंजिश का तो खुलासा नही हुआ है पर एसा लगता है कि जनता का वोट व्यर्थ जा रही है चुनाव जीतने के बाद तो नेताओं के तेवर जनता के प्रति दोयम दर्जे के हो जाते है। इस पर जनता को विचार करना चाहिए वोट के बाद चोट क्यों मिलता है।

पुलिस कमिश्नरी के साथ पुलिस मितान एप की सौगात

राजधानी को पुलिस कमिश्नरी के साथ मितान एप की सौगात मिल गई है। पुलिस ने आपराधिक तत्वों पर सख्ती कार्रवाई करने के लिए अपराध मुक्त राजधानी बनाने के लिए पुलिस कमिश्नरी लागू कर रही है जिसे सटोरियों और नशे के सौदागरों ने सौगात मान कर जश्न में डूब रहे है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने पुलिस मितान सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री साय ने कहा कि रोड सेफ्टी जागरूकता में पुलिस मितान अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। पुलिस मितान नागरिकों को सडक़ सुरक्षा के लिए जागरूक करने के साथ-साथ गांवों एवं मोहल्लों में पुलिस के रिस्पॉन्स टाइम को भी बेहतर बनाएंगे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने पुलिस मितान एप की लॉन्चिंग भी की। जनता में खुसुर-फुसुर है कि पुलिस कमिश्नरी लागू होने की सबसे ज्यादा खुश सटोरियों जुआरियों, फार्म हाउस वाले हो रहे है। जनता का कहना है कि अधिकतर होटलें, फार्म हाउस औऱ क्लब नवा रायपुर क्षेत्र में है जिसके कारण पुलिस कमिश्नरी का सीधा दखल नहीं होगा । सटोरियों ने फार्म हाउस को अपना सुरक्षित अड्डा बना रखा है। वहीं गांवों में मेला मडई में खडख़डिय़ा चलाने वाले भी जश्न मना रहे है।

नुकसान और सुरक्षा जोखिमों की रिकवरी प्लास्टिक से ..

छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य की नई आबकारी नीति को मंजूरी दे दी है,अब शराब कांच की बोतलों के बजाय प्लास्टिक की बोतलों में बेची जाएगी। यह अहम फैसला लिया है और इसे वित्त वर्ष 2026–27 से लागू किया जाएगा। नई नीति के तहत अब सभी शराब निर्माता कंपनियों को अपने उत्पादों की पैकेजिंग प्लास्टिक की बोतलों में करनी होगी। कहा जा रहा है कि इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य सरकारी शराब दुकानों में बोतलों के टूटने से होने वाले नुकसान और सुरक्षा जोखिमों को कम करना है। कांच की बोतलों के कारण हर साल होने वाली टूट-फूट से वित्तीय हानि के साथ-साथ कर्मचारियों और उपभोक्ताओं की सुरक्षा भी प्रभावित होती है। जनता में खुसुर-फुसुर है कि कांच की बोतल सप्लाई करने वालों ने शायद तालमेल आबकारी अधिकािरयों ने नहीं बना होगी जिसके कारण सरकार को नुकसान का अमलीजामा पहनाकर फायदे के लिए प्लास्टिक को बोतल में शराब बेचने की प्रस्ताव दे दिया होगा। जबकि सरकार खुद प्लास्टिक विरोधी मुहिम चला रही है एसे में फिर से प्लास्टिक की ओर लौटना समझ से परे है।

पुलिस बड़ी या स्पा वाले ...

स्पा में किस तरह के खेल चलते है जग जाहिर है। स्पा संचालन करने वालों के हाथ पुलिस से भी लंबे होते है। स्पा संचालक बड़े रसूखदार के संरक्षण में स्पा संचालित करते है। इसी कारण पुलिस के खिलाफ शिकायत होते ही तत्काल निलंबित कर एक्शन लिया जाता है। स्पा संचालक की रिपोर्ट पर एएसपी को निलिबत करने का मामला सुर्खियों में बना हुआ है। बिलासपुर में स्पा सेंटर संचालक से वसूली के मामले में एडिशनल एसपी राजेंद्र जायसवाल को निलंबित कर दिया गया है.। गृह मंत्री विजय शर्मा ने ऐसे अधिकारियों को तत्काल निलंबित कर जांच करने की बात कही थी. इसके बाद अब राजेंद्र जायसवाल के खिलाफ निलंबन का आदेश जारी हो गया है। बिलासपुर के सिविल लाइन थाना क्षेत्र स्थित स्पा एंड वेलनेस सेंटर के संचालक ने पूर्व एडिशनल एसपी राजेंद्र जायसवाल पर डराने-धमकाने और पैसों की मांग करने का गंभीर आरोप लगाया है.। जनता में खुसुर-फुसुर है कि पुलिस विभाग में नोकरी करने के बाद वसूली करना न्ययसंगत नहीं है, वसूली इस बात का संकेत है कि पुलिस वाले मिलने वाले लाखों रुपए के तनखे से खुश नही है। इसलिए वो पुरानी परिपाटी को बदस्तूर चला रहे है और उसे आगे बढ़ाकर शिष्टाचार भत्ता के नाम से वसूली कर रहे है। जनता में खुसुर-फूसुर है कि इसे सरकारी स्तर पर मान्यता तो दे नहीं सकते कम से कम तनखा डबल कर देना चाहिए ताकि कोई भी वसूली के नाम से निलंबित न हो सके।

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