छत्तीसगढ़ में जनसंपर्क विभाग का नया अभियान

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Update: 2025-12-01 15:21 GMT
Raipur. रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने जनसंपर्क विभाग के माध्यम से सचिवों और कलेक्टरों के लिए एक नया मीडिया और सोशल मीडिया टारगेट लागू किया है। इसका उद्देश्य न केवल सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता बढ़ाना और सरकार की सकारात्मक छवि निर्मित करना है, बल्कि सुस्त और ढीले अधिकारियों को भी सक्रिय करने का है। अब अधिकारी केवल कार्यालय में बैठकर काम नहीं चला सकेंगे, उन्हें फील्ड में निकलकर रिपोर्ट तैयार करनी होगी।
जनसंपर्क विभाग के निर्देशानुसार, सभी कलेक्टरों को महीने में कम से कम एक प्रेस कांफ्रेंस करनी होगी। इसके अलावा रायपुर, बिलासपुर और दुर्ग जैसे बड़े जिलों को सबसे बड़ा टारगेट मिला है। इन तीन जिलों को महीने में 150 प्रेस विज्ञप्ति, 15 मंथली सक्सेस स्टोरी, 4 नेशनल न्यूज, 4 स्टेट लेवल खबर, 30 फेसबुक पोस्ट, 15 एक्स (ट्विटर) पोस्ट और एक प्रेस कांफ्रेंस करना अनिवार्य होगा। अन्य जिलों को उनके आकार और जनसंख्या के आधार पर अलग-अलग लक्ष्य दिए गए हैं।
सचिवों के लिए भी सख्त टारगेट तय किया गया है। कुल 47 विभागों के सचिवों को सूचीबद्ध कर उनके साथ पीआरओ का नाम भी जोड़ा गया है। उदाहरण के तौर पर प्रमुख सचिव ट्राईबल सोनमणि बोरा के विभाग को सप्ताह में 3 प्रेस रिलीज, 2 सक्सेस स्टोरी, 7 फेसबुक पोस्ट और 7 एक्स पोस्ट का टारगेट दिया गया है। इसी प्रकार अन्य सचिवों को भी लक्ष्य प्रदान किए गए हैं, जिन्हें निर्धारित अवधि में पूरा करना अनिवार्य है।
प्रत्येक गतिविधि के लिए अधिकारीयों को अंक दिए जाएंगे। प्रेस रिलीज, सक्सेस स्टोरी, सोशल मीडिया पोस्ट की संख्या के आधार पर वीकली और मंथली रैंकिंग तैयार की जाएगी। यह रैंकिंग सार्वजनिक नहीं होगी, बल्कि अधिकारियों के व्हाट्सएप ग्रुप में साझा की जाएगी। पहली वीकली रैंकिंग भी जारी कर दी गई है।
जनसंपर्क विभाग का कहना है कि इस पहल से अधिकारी मीडिया संवाद के लिए नियमित रूप से फील्ड में निकलेंगे, प्रेस रिलीज और सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से सरकार की योजनाओं को जनता तक समय पर पहुंचाया जाएगा। यह प्रक्रिया सरकार की छवि सुधारने के साथ-साथ योजनाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करेगी।
इस अभियान की शुरुआत पहले ही हो चुकी है। 26 नवंबर को फूड सचिव रीना बाबा कंगाले ने मीडिया को संबोधित किया। इसके अलावा, 3 दिसंबर को नगरीय प्रशासन सचिव एस. बसव राजू मीडिया से संवाद करेंगे। ऐसे कार्यक्रम सचिवों और कलेक्टरों को नियमित मीडिया संवाद करने के लिए प्रेरित करेंगे और सरकारी योजनाओं के प्रचार-प्रसार को सुनिश्चित करेंगे।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह पहल छत्तीसगढ़ में सरकारी अधिकारियों की कार्यप्रणाली में बदलाव लाएगी। अब अधिकारी केवल कार्यालय तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि मीडिया और जनता के साथ सीधे संवाद करने के लिए फील्ड में उतरेंगे। जनसंपर्क विभाग के नए प्रयोग से यह भी उम्मीद है कि अधिकारियों की निष्क्रियता दूर होगी, सरकारी योजनाओं की सफलता और जागरूकता में बढ़ोतरी होगी और जनता के बीच सरकारी कार्यों की पारदर्शिता बढ़ेगी। यह कदम छत्तीसगढ़ में सरकारी अधिकारियों और जनता के बीच विश्वास की दीवार को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा।
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