सीतापुर विधानसभा चुनाव विवाद में मुन्ना लाल टोप्पो की याचिका खारिज

छग

Update: 2026-04-17 16:08 GMT
Bilaspur. बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने सीतापुर विधानसभा चुनाव से जुड़े एक अहम मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए चुनाव याचिका को खारिज कर दिया है। यह याचिका आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी मुन्ना लाल टोप्पो द्वारा दायर की गई थी, जिसमें उन्होंने निर्वाचन अधिकारी द्वारा उनके नामांकन पत्र को रद्द किए जाने के फैसले को चुनौती दी थी। याचिकाकर्ता ने इसके साथ ही पूरी चुनावी प्रक्रिया को रद्द करने की भी मांग की थी। मामला 2023 विधानसभा चुनाव से जुड़ा है, जिसमें मुन्ना लाल टोप्पो ने सीतापुर विधानसभा क्षेत्र से
नामांकन दाखिल
किया था। नामांकन पत्रों की जांच के दौरान आपत्ति दर्ज की गई थी। आपत्ति में कहा गया था कि याचिकाकर्ता लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE) से जुड़े सरकारी अनुबंध में कार्यरत हैं, जिसके कारण वे "लाभ के पद" पर रहते हुए चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य हैं। इसी आधार पर रिटर्निंग ऑफिसर ने जांच के बाद 31 अक्टूबर 2023 को उनका नामांकन रद्द कर दिया था।
नामांकन रद्द होने के बाद याचिकाकर्ता ने हाई कोर्ट का रुख करते हुए दावा किया कि उनका अनुबंध सीधे सरकार के साथ नहीं था, बल्कि जिला जल एवं स्वच्छता मिशन के साथ था, इसलिए उन्हें अयोग्य नहीं माना जा सकता। उन्होंने इसे नियम विरुद्ध कार्रवाई बताते हुए पूरे चुनाव को निरस्त करने की मांग की थी। इस मामले की सुनवाई के दौरान विधायक रामकुमार टोप्पो की ओर से अधिवक्ता शरद मिश्रा ने पक्ष रखा। सुनवाई में अदालत के सामने यह तथ्य आया कि याचिकाकर्ता ने अपने नामांकन पत्र और शपथपत्र में स्वयं सरकारी अनुबंध होने की बात स्वीकार की थी। इसके अलावा विभागीय रिपोर्ट में भी यह स्पष्ट किया गया कि अनुबंध अस्तित्व में था।
हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि जब उम्मीदवार स्वयं अपने शपथपत्र में किसी तथ्य को स्वीकार कर चुका हो, तो बाद में उससे इनकार नहीं किया जा सकता। अदालत ने यह भी माना कि याचिकाकर्ता यह साबित करने में असफल रहा कि उसका अनुबंध सरकारी दायरे में नहीं आता। कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि निर्वाचन अधिकारी द्वारा नामांकन रद्द करने का निर्णय नियमों के अनुसार और सही था। अदालत ने कहा कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर याचिकाकर्ता की दलीलें स्वीकार योग्य नहीं हैं। इस मामले की सुनवाई जस्टिस संजय के अग्रवाल की सिंगल बेंच में हुई थी। सुनवाई पूरी होने के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसे 17 अप्रैल 2026 को सुनाया गया। हाई कोर्ट के इस निर्णय के बाद चुनाव याचिका को पूरी तरह खारिज कर दिया गया है, जिससे निर्वाचन अधिकारी के फैसले को कानूनी रूप से मजबूती मिल गई है।
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