Raipur. रायपुर। रायपुर लोकसभा सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने छत्तीसगढ़ के पारंपरिक उत्पादों, ग्रामोद्योग और स्थानीय कारीगरों को बड़ा बाजार उपलब्ध कराने की जरूरत पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में हुनर और कारीगरी की कोई कमी नहीं है। छत्तीसगढ़ का कोसा, मिट्टी से तैयार होने वाले उत्पाद और गांवों में बनने वाले ग्रामोद्योग के सामान देशभर में अपनी अलग पहचान बनाने की क्षमता रखते हैं। अग्रवाल वर्तमान में रायपुर से लोकसभा सांसद हैं।
बृजमोहन अग्रवाल ने छत्तीसगढ़ खादी ग्रामोद्योग बोर्ड के प्रदेश स्तरीय सम्मेलन एवं स्वदेशी प्रदर्शनी में स्थानीय कारीगरों के सशक्तिकरण की बात कही। उन्होंने उत्पादों के लिए बेहतर बाजार और ब्रांडिंग की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि प्रदेश के गांवों में बड़ी संख्या में कारीगर अपने पारंपरिक हुनर के माध्यम से विभिन्न वस्तुओं का निर्माण करते हैं। कोसा वस्त्रों से लेकर माटी के बर्तन और दूसरे ग्रामोद्योग उत्पादों की अपनी विशेषता है। यदि इन्हें बेहतर तरीके से बाजार से जोड़ा जाए और प्रभावी ब्रांडिंग की जाए तो स्थानीय उत्पादों की पहुंच व्यापक हो सकती है। सांसद ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने पर भी जोर दिया।
उनका कहना है कि गांव आर्थिक रूप से सक्षम और आत्मनिर्भर बनेंगे तो इसका सीधा लाभ किसानों, बुनकरों, कुम्हारों और दूसरे स्थानीय कारीगरों को मिलेगा। स्थानीय स्तर पर रोजगार और आय के अवसर बढ़ने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। छत्तीसगढ़ के हथकरघा और पारंपरिक उत्पादों को बड़े बाजार से जोड़ने के लिए राज्य स्तर पर भी प्रयास किए जा रहे हैं। अगस्त 2026 में राज्य के प्रीमियम हैंडलूम ब्रांड ‘कोशल फैब’ को लॉन्च किया गया था, जिसका उद्देश्य कोसा और अन्य पारंपरिक हथकरघा उत्पादों को व्यापक बाजार और नई पहचान दिलाना है। बृजमोहन अग्रवाल ने स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहित करने के साथ उनके लिए बाजार की उपलब्धता को महत्वपूर्ण बताया। उनका कहना है कि छत्तीसगढ़ के कारीगरों के पास कौशल और संसाधन मौजूद हैं। बेहतर ब्रांडिंग, प्रोत्साहन और बाजार मिलने से उनके उत्पादों को देशभर में नई पहचान मिल सकती है और ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियां बढ़ सकती हैं।