Jagdalpur. जगदलपुर। बस्तर के प्रमुख मां दंतेश्वरी मंदिर से हुई चोरी का मामला पुलिस के लिए चुनौतीपूर्ण था, लेकिन बस्तर पुलिस, कोतवाली थाना और साइबर सेल की संयुक्त कार्रवाई के बाद आखिरकार सुलझा लिया गया। चोरी का आरोपी मोनू यादव पिता मंगल यादव, निवासी कोसमी (ओडिशा) को गिरफ्तार कर चोरी का पूरा सामान बरामद किया गया।
चोरी की जानकारी और गिरफ्तारी
मंदिर के सीसीटीवी फुटेज और साइबर सेल की तकनीकी जांच ने पुलिस को आरोपी तक पहुंचाया। वारदात वाले दिन, मंदिर परिसर में लगे कैमरों में आरोपी के हर कदम को रिकॉर्ड किया गया था। सुराग मिलते ही पुलिस की टीम ने ओडिशा में दबिश देकर मोनू यादव को हिरासत में लिया। जांच के दौरान पता चला कि सरस्वती माता की प्रतिमा और नारायण मूर्ति से चोरी की गई चैन असल में सोने की नहीं, बल्कि नकली थी। चोरी का उद्देश्य पूरा नहीं हो पाने के कारण आरोपी इसे बेच नहीं सका और ओडिशा में जाकर छिप गया था।
आरोपी की पृष्ठभूमि
पुलिस ने बताया कि मोनू यादव आदतन अपराधी है। वर्ष 2024 में वह गांजा तस्करी के मामले में जेल जा चुका था। जेल से छूटने के बाद वह मारकेल सिवनागुड़ा आवास प्लाट पारा क्षेत्र में रह रहा था। मंदिर चोरी की यह घटना साबित करती है कि अपराधियों को कानून से बच पाना आसान नहीं है।
पुलिस की कार्रवाई
बस्तर पुलिस, कोतवाली थाना और साइबर सेल की संयुक्त टीम ने त्वरित और सतर्क कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार आरोपी से चोरी का पूरा सामान बरामद किया गया। पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि मंदिर और धार्मिक स्थलों से जुड़ी सुरक्षा को और मजबूत किया जाएगा। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि यह कार्रवाई आस्था और कानून की रक्षा का प्रतीक है। उन्होंने आम नागरिकों से अपील की कि यदि किसी संदिग्ध गतिविधि का पता चले तो तुरंत पुलिस को सूचित करें। मां दंतेश्वरी मंदिर चोरी की गुत्थी के खुलासे से यह संदेश गया कि अपराधियों को कानून के शिकंजे से बचना आसान नहीं है। पुलिस की सतर्कता और तकनीकी जांच ने न सिर्फ चोरी का रहस्य सुलझाया, बल्कि मंदिर और आस्था से जुड़े आभूषणों की सुरक्षा की महत्ता को भी उजागर किया।