फर्जी अंकसूची से डाकपाल की नौकरी दिलाने वाला मास्टरमाइंड गिरफ्तार

छग

Update: 2026-07-14 08:56 GMT
Raigarh. रायगढ़। सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर फर्जी दस्तावेज तैयार कर लाखों रुपये की ठगी करने वाले गिरोह के मुख्य साजिशकर्ता को रायगढ़ पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने ऑपरेशन क्लीन हंट के तहत बड़ी कार्रवाई करते हुए आरोपी विनोद कुमार राठौर को कोरबा से पकड़कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया है। आरोपी पर आरोप है कि उसने ग्रामीण डाक सेवक (जीडीएस) भर्ती में चयन कराने के लिए फर्जी 10वीं की अंकसूची उपलब्ध कराई थी। इस फर्जीवाड़े के जरिए अभ्यर्थियों से लाखों रुपये की ठगी की गई। मामले में पहले ही दो आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है।
फर्जी अंकसूची से हुआ था डाकपाल पद पर चयन
मामला भारतीय डाक विभाग की वर्ष 2023 में शुरू हुई ग्रामीण डाक सेवक भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा है। पुलिस जांच के अनुसार जिला सक्ती निवासी नरेंद्र कुमार और जिला जांजगीर-चांपा निवासी सोनम साहू ने भर्ती प्रक्रिया के दौरान कक्षा 10वीं की अंकसूची लगाकर ऑनलाइन आवेदन किया था। अंकों के आधार पर दोनों अभ्यर्थियों का चयन रायगढ़ डाक संभाग के अंतर्गत बर्रा और सुलेसा शाखा में ग्रामीण डाक सेवक पद पर हो गया था। नियुक्ति से पहले दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया में दोनों की अंकसूचियों को तमिलनाडु बोर्ड से सत्यापन के लिए भेजा गया। जांच रिपोर्ट में सामने आया कि प्रस्तुत की गई दोनों अंकसूचियां फर्जी थीं और संबंधित बोर्ड द्वारा इन्हें कभी जारी ही नहीं किया गया था। इसके बाद अधीक्षक डाकघर रायगढ़ की शिकायत पर सिटी कोतवाली थाने में अपराध क्रमांक 59/2026 दर्ज किया गया। पुलिस ने मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 467, 468, 471 और 34 के तहत अपराध दर्ज कर जांच शुरू की।
नौकरी के नाम पर मांगे थे साढ़े तीन लाख रुपये
पुलिस जांच में गिरफ्तार अभ्यर्थियों से पूछताछ के दौरान इस पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ। दोनों ने पुलिस को बताया कि नौकरी की तलाश के दौरान उनकी पहचान कोरबा निवासी विनोद कुमार राठौर से हुई थी। आरोप है कि विनोद राठौर ने सरकारी नौकरी लगवाने का झांसा देकर उनसे पैसे की मांग की। नरेंद्र कुमार से आरोपी ने करीब 3.50 लाख रुपये लिए, जबकि सोनम साहू से नियुक्ति के बाद भुगतान करने की बात तय हुई थी। इसके बाद आरोपी ने दोनों को फर्जी 10वीं की अंकसूचियां उपलब्ध कराईं, जिनका उपयोग ग्रामीण डाक सेवक भर्ती प्रक्रिया में किया गया। दस्तावेज सत्यापन में फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद दोनों की नियुक्ति रद्द कर दी गई। पुलिस ने दोनों अभ्यर्थियों से फर्जी अंकसूचियां और उनके वास्तविक शैक्षणिक दस्तावेज जब्त कर उन्हें गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया था।
फरार चल रहा था मुख्य आरोपी, कोरबा से हुई गिरफ्तारी
मामले का मुख्य आरोपी विनोद कुमार राठौर घटना के बाद से फरार चल रहा था। पुलिस लगातार उसकी तलाश कर रही थी। जांच के दौरान पुलिस को जानकारी मिली कि आरोपी पहले भी जालसाजी के मामले में शामिल रहा है। पुलिस के अनुसार वर्ष 2013 में नकली नोट प्रकरण में आरोपी को 10 साल की सजा हुई थी। जेल से बाहर आने के बाद वह दोबारा फर्जीवाड़े और धोखाधड़ी के जरिए लोगों को सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा देकर ठगी करने लगा। रायगढ़ में मामला दर्ज होने के बाद आरोपी लगातार अपना ठिकाना बदलकर पुलिस से बचने का प्रयास कर रहा था।
ऑपरेशन क्लीन हंट के तहत पुलिस को सूचना मिली कि आरोपी कोरबा में छिपा हुआ है। सूचना के आधार पर सिटी कोतवाली पुलिस की टीम तत्काल कोरबा रवाना हुई और योजनाबद्ध तरीके से कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपी की पहचान विनोद कुमार राठौर पिता नारायण प्रसाद राठौर, उम्र 47 वर्ष, निवासी एलआईजी 150, शिवाजी नगर, डंडिया मैदान के पास, थाना सिविल लाइन, जिला कोरबा के रूप में हुई है।
पूछताछ में आरोपी ने कबूला फर्जी दस्तावेज उपलब्ध कराना
रायगढ़ लाकर पुलिस ने आरोपी से पूछताछ की। पूछताछ में आरोपी ने फर्जी अंकसूचियां उपलब्ध कराकर सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर धोखाधड़ी करने की बात स्वीकार की। इसके बाद पुलिस ने उसे विधिवत गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया।
पुलिस टीम की रही अहम भूमिका
इस पूरी कार्रवाई में रायगढ़ सिटी कोतवाली पुलिस की महत्वपूर्ण भूमिका रही। कार्रवाई में थाना प्रभारी निरीक्षक सुखनंदन पटेल,
उप निरीक्षक
ऐनु देवांगन, सहायक उप निरीक्षक कोसो सिंह जगत, प्रधान आरक्षक मनोज मरावी और आरक्षक मुरली मनोहर पटेल शामिल रहे। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह ने कहा कि फर्जी दस्तावेजों के जरिए सरकारी नौकरी हासिल करने की कोशिश करने वालों और ऐसे गिरोह चलाने वाले लोगों के खिलाफ रायगढ़ पुलिस सख्त कार्रवाई कर रही है। उन्होंने कहा कि युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति को कानून से बचने नहीं दिया जाएगा। पुलिस ऐसे मामलों में लगातार निगरानी रख रही है और फर्जीवाड़े में शामिल लोगों पर कठोर कार्रवाई जारी रहेगी।
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