ज्ञान भारतम् अभियान से पांडुलिपियों का होगा संरक्षण

छग

Update: 2026-04-25 18:20 GMT
Sarangarh-Bilaigarh. सारंगढ़-बिलाईगढ़। जिले में भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने के उद्देश्य से ज्ञान भारतम् अभियान के तहत राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण को गति दी जा रही है। इस संबंध में कलेक्टर डॉ. संजय कन्नौजे ने प्रेस वार्ता में जानकारी देते हुए कहा कि यह अभियान देश की अमूल्य पांडुलिपियों के संरक्षण और उनके दस्तावेजीकरण के लिए एक महत्वपूर्ण पहल है। कलेक्टर ने बताया कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य आमजन की भागीदारी सुनिश्चित करते हुए कागज, लकड़ी, पत्थर और
ताम्रपत्र
पर लिखी गई प्राचीन हस्तलिखित लिपियों की पहचान करना और उन्हें सुरक्षित रखना है। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि यदि उनके पास या जानकारी में किसी भी प्रकार की दुर्लभ पांडुलिपि हो तो उसकी सूचना प्रशासन को दी जाए।

उन्होंने कहा कि भारत की ज्ञान परंपरा, विज्ञान, दर्शन और संस्कृति को संजोए रखने में पांडुलिपियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। इन्हें सुरक्षित रखने के लिए केंद्र सरकार द्वारा यह अभियान चलाया जा रहा है, जिसका उद्देश्य न केवल सर्वेक्षण और दस्तावेजीकरण करना है, बल्कि इन्हें डिजिटल रूप में सुरक्षित कर आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना भी है। इस अभियान के तहत ज्ञान भारतम् मोबाइल ऐप विकसित किया गया है, जिसमें उपलब्ध पांडुलिपियों की तस्वीरें अपलोड करना अनिवार्य किया गया है। इससे एक डिजिटल डाटाबेस तैयार होगा, जिससे शोधकर्ताओं और आम लोगों को भी इन ऐतिहासिक दस्तावेजों तक पहुंच आसान हो सकेगी।

जिले में इस अभियान को प्रभावी बनाने के लिए जिला स्तरीय समिति का गठन भी किया गया है, जो पूरे क्षेत्र में सर्वेक्षण और जागरूकता कार्य करेगी। प्रशासन का लक्ष्य है कि गांवों और शहरों में छिपी दुर्लभ पांडुलिपियों की पहचान कर उन्हें संरक्षित किया जाए और उनके ऐतिहासिक महत्व को सामने लाया जाए। कलेक्टर डॉ. संजय कन्नौजे ने बताया कि हाल ही में उन्होंने वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. बिहारी लाल साहू से उनके निवास चांटीपाली में मुलाकात कर पांडुलिपि संरक्षण को लेकर विस्तृत चर्चा की थी। इस दौरान क्षेत्र में मौजूद संभावित प्राचीन दस्तावेजों और उनके संरक्षण की आवश्यकता पर भी विचार-विमर्श किया गया।

उन्होंने कहा कि यह अभियान केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह हमारी सांस्कृतिक विरासत को बचाने का एक सामूहिक प्रयास है। यदि समाज के सभी वर्ग इसमें सहयोग करें तो अनेक दुर्लभ और ऐतिहासिक पांडुलिपियां प्रकाश में आ सकती हैं, जो भारत के गौरवशाली इतिहास को और समृद्ध करेंगी। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि इस अभियान के माध्यम से शिक्षा, शोध और इतिहास के क्षेत्र में भी नई संभावनाएं खुलेंगी। साथ ही यह प्रयास स्थानीय स्तर पर लोगों को अपनी विरासत के प्रति जागरूक और जिम्मेदार बनाएगा। कलेक्टर ने नागरिकों से इस अभियान में सक्रिय भागीदारी की अपील करते हुए कहा कि हर व्यक्ति अपने आसपास उपलब्ध ऐतिहासिक धरोहर की जानकारी साझा कर इस राष्ट्रीय प्रयास में योगदान दे सकता है।
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