नकलकांड में बड़ा फैसला: 12वीं की टॉपर पोरा बाई सहित पांच दोषियों को 5 साल कठोर कारावास
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Janjgir. जांजगीर। जिले के बहुचर्चित नकल प्रकरण में जिला एवं सत्र न्यायालय ने एक अहम और कड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने 12वीं बोर्ड परीक्षा की टॉपर रही पोरा बाई सहित पांच आरोपियों को दोषी करार देते हुए पांच वर्ष के कठोर कारावास और 5-5 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माने की राशि अदा नहीं करने पर प्रत्येक आरोपी को तीन माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। न्यायालय ने इस मामले में भारतीय दंड संहिता 1860 की धारा 468/120 बी एवं 471/120 बी के तहत सभी दोषियों को पांच वर्ष का कठोर कारावास एवं जुर्माने से दंडित किया है। इसके साथ ही कोर्ट ने अपने निर्णय में स्पष्ट किया कि आरोपी पोरा बाई, एस.एल. जाटव, दीपक जाटव एवं फुलसाय नृसिंह द्वारा किए गए अपराध भारतीय दंड संहिता की धारा 420/120 बी, 467/120 बी, 468/120 बी एवं 471/120 बी के अंतर्गत सिद्ध हुए हैं, जिनके तहत दी गई सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी।
यह मामला शिक्षा व्यवस्था में सेंध लगाने वाले संगठित नकल गिरोह से जुड़ा था, जिसमें योजनाबद्ध तरीके से परीक्षा प्रणाली के साथ छेड़छाड़ कर फर्जीवाड़ा किया गया। जांच के दौरान सामने आया कि आरोपियों ने आपसी षड्यंत्र के तहत उत्तरपुस्तिकाओं में हेरफेर, दस्तावेजों की कूटरचना और जालसाजी कर एक छात्रा को टॉपर घोषित कराने में अहम भूमिका निभाई थी। कोर्ट ने सजा निर्धारण के दौरान यह भी उल्लेख किया कि विचारण के दौरान अभियुक्तों द्वारा जो अवधि न्यायिक अभिरक्षा में बिताई गई है, उसका समायोजन दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 428 के अंतर्गत किया जाएगा। आदेश के अनुसार अभियुक्त पोरा बाई ने 25 अगस्त 2008 से 7 फरवरी 2009 तक कुल 167 दिवस, फूलसाय नृसिंह ने 15 दिसंबर 2009 से 5 मार्च 2010 तक कुल 81 दिवस, शिवलाल जाटव ने 27 मार्च 2009 से 20 नवंबर 2009 तक कुल 238 दिवस तथा दीपक सिंह जाटव ने 27 मार्च 2009 से 26 सितंबर 2009 तक कुल 184 दिवस न्यायिक अभिरक्षा में बिताए हैं। इन सभी अवधियों के लिए पृथक से प्रमाण पत्र तैयार करने के निर्देश भी न्यायालय ने दिए हैं। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि अभियुक्तों द्वारा अभिरक्षा में बिताई गई अवधि को धारा 428 सहपठित धारा 432 दंड प्रक्रिया संहिता के अंतर्गत सजा में नियमानुसार समायोजित किया जा सकता है।
इससे यह संकेत मिलता है कि दोषियों को सजा में कुछ हद तक कानूनी लाभ मिल सकता है, लेकिन अपराध की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने कठोर कारावास की सजा को उचित ठहराया। प्रकरण से संबंधित जब्त की गई संपत्तियों और दस्तावेजों को लेकर भी कोर्ट ने विस्तृत आदेश दिया है। मामले में जब्त दस्तावेजों में केंद्राध्यक्ष नियुक्ति आदेश, सील, दाखिल-खारिज पंजी, पाठ्यांकन पंजी, स्थानांतरण आदेश, कार्यमुक्ति आदेश, कार्यभार ग्रहण पत्र, परीक्षा कार्य सहयोग आदेश, टी.आर. खुंटे का मृत्यु प्रमाण पत्र, परीक्षा आवेदन पत्र, अभियुक्ता पोरा बाई की हिंदी, अंग्रेजी, जीवविज्ञान, भौतिक शास्त्र और रसायन विज्ञान की उत्तरपुस्तिकाएं, उपस्थिति पत्रक, बैठक व्यवस्था विवरण, उत्तरपुस्तिका जमा आदेश, नोटबुक, पावती पत्र, अभिरक्षा पंजी, स्टॉक रजिस्टर सहित अन्य महत्वपूर्ण अभिलेख शामिल हैं। कोर्ट ने आदेश दिया है कि चूंकि ये सभी दस्तावेज प्रकरण का अहम हिस्सा हैं, इसलिए इन्हें अभिलेख के साथ सुरक्षित रखा जाए। यदि इस फैसले के खिलाफ अपील दायर की जाती है, तो जप्तशुदा संपत्ति का निराकरण माननीय अपीलीय न्यायालय के आदेशानुसार किया जाएगा। इस फैसले को शिक्षा जगत में नकल और फर्जीवाड़े के खिलाफ एक सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है। कोर्ट के इस निर्णय से यह स्पष्ट हो गया है कि परीक्षा प्रणाली से खिलवाड़ करने वालों को कानून के कठोर प्रावधानों का सामना करना ही पड़ेगा।