ACB-EOW की बड़ी कार्रवाई, 14 साल पुराने मामले में चार्जशीट दाखिल

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Update: 2026-06-24 17:42 GMT
Raipur. रायपुर। एसीबी-ईओडब्ल्यू ने 14 साल पुराने सहकारी घोटाले के मामले में तत्कालीन वरिष्ठ सहकारी निरीक्षक एवं परिसमापक राजकुमार नायडू के खिलाफ विशेष अदालत में करीब 3500 पेज की चार्जशीट दाखिल की है। जांच एजेंसी के अनुसार, आरोपी पर दो हाउसिंग सोसायटियों को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाने और 20 लाख रुपये से अधिक के गबन का गंभीर आरोप है। मामले में जांच के दौरान सामने आया कि राजकुमार नायडू भैरव गृह निर्माण समिति और राष्ट्रीय खनिज विकास निगम गृह निर्माण समिति में परिसमापक के पद पर कार्यरत थे। आरोप है कि उन्होंने नियमों के विपरीत पहले से आवंटित और पंजीकृत 13 प्लॉटों का पंजीयन रद्द कराया और बाद में उन्हें नए सदस्यों को कम कीमत पर आवंटित कर दिया।

जांच एजेंसी के अनुसार, कॉलोनी में सड़क और अन्य सुविधाओं के लिए सुरक्षित रखी गई जमीन को भी नियमों का उल्लंघन करते हुए बेचा गया, जिससे दोनों समितियों को भारी आर्थिक नुकसान हुआ। अनुमान के अनुसार यह नुकसान 4 करोड़ रुपये से अधिक का बताया गया है। भैरव गृह निर्माण समिति से जुड़े मामले में यह भी सामने आया कि एक ही परिवार के तीन सदस्यों को नियमों के खिलाफ प्लॉट आवंटित किए गए। इसके अलावा एक सदस्य से पूरी राशि लेने के बावजूद उसी प्लॉट का पंजीयन किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर कर दिया गया।

ईओडब्ल्यू की जांच में यह भी पाया गया कि प्लॉट बिक्री से प्राप्त राशि और समिति के बैंक खातों से निकाले गए 20 लाख रुपये से अधिक धनराशि का उपयोग निजी कार्यों में किया गया। जांच एजेंसी ने इसे स्पष्ट रूप से गबन की श्रेणी में रखा है। अधिकारियों के अनुसार, सभी तथ्यों और दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर यह निष्कर्ष निकला कि आरोपी के निर्णयों और अनियमितताओं के कारण दोनों सहकारी समितियों को भारी वित्तीय नुकसान हुआ। पुख्ता सबूत मिलने के बाद राजकुमार नायडू के खिलाफ भ्रष्टाचार, धोखाधड़ी और गबन के तहत मामला दर्ज कर विशेष अदालत रायपुर में विस्तृत चार्जशीट पेश की गई है।

एजेंसी ने बताया कि यह मामला वर्षों पुराना होने के बावजूद इसकी जांच लगातार जारी रही और अब पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई है। अधिकारियों ने संकेत दिया है कि इस मामले से जुड़े अन्य पहलुओं और संभावित लाभार्थियों की भी जांच की जा रही है। यदि जांच में अन्य लोगों की भूमिका सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। यह मामला सहकारी संस्थाओं में पारदर्शिता और नियमों के पालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। जांच एजेंसियों का कहना है कि भविष्य में इस तरह की अनियमितताओं को रोकने के लिए निगरानी और सख्ती और बढ़ाई जाएगी।
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