भ्रष्टाचार के प्रमाण मिलने के बाद भी लगातार प्रमोट हुए भ्रष्ट अधिकारी
भ्रष्ट अधिकारी खुद ही अपनी जांच करके लोकआयोग में गलत जानकारी देकर अपने पक्ष में कराया था फैसला
गृहनिर्माण मंडल के तीन भ्रष्ट सर्वोच्चतम पद पर बैठे अधिकारी के खिलाफ हाईकोर्ट में रिटयाचिका 26 को सुनवाई
तालपुरी घोटाला पुख्ता सबूतों के साथ हाउसिंग बोर्ड का सबसे बड़ा घोटाला निकला
हाउसिंग बोर्ड को कांग्रेस शासनकाल में जनता के पैसों का किया बंदरबांट
रायपुर (जसेरि)। हाउसिंग बोर्ड में तालपुरी समेत कई प्रोजेक्ट्स में हुई अनियमितताओं के खिलाफ लोकायुक्त में दर्ज शिकायत आयोग द्वारा खारिज किए जाने के बाद आवेदक ने इसके खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की है जिससे पर हाईकोर्ट में कल 26 सितंबर को सुनवाई होगी। तालपुरी आवासीय प्रोजेक्ट में करोड़ों के भ्रष्टाचार उजागर होने तथा विभागीय जांच में भी इसकी पुष्टि होने के बाद भी जि मेदार अधिकारियों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। इसकी शिकायतकर्ता ने लोकायुक्त शिकायत दर्ज कराई थी। कुछ सुनवाई के बाद लोकायुक्त ने आवेदन को खारिज कर दिया। आवेदक इसके खिलाफ हाईकोर्ट पहुंचा है।
हाउसिंग बोर्ड के आधा दर्जन से ज्यादा योजनाओं में करोड़ों के घोटाले सामने आए लेकिन किसी पर भी कोई कार्रवाई नहीं की गई। भ्रष्ट अधिकारियों ने गृह निर्माण मंडल को पूरी तरह से खोखला कर दिया है। बिना प्लानिंग, बिना डिमांड, मनमाने ढंग से पहले अपनी कमाई के लिए जमीन तलाशते हैं । गृह निर्माण मंडल के भूमि अधिग्रहण के पहले आसपास की सभी भूमि को चिन्हित कर गृह निर्माण मंडल के ये दो भ्रष्ट अधिकारी अपने सहयोगी भ्रष्टाचारियों के साथ मिलकर कमाए गए पैसे को सही उपयोग में लगाते हुए गृह निर्माण मंडल की योजनाएं लागू होने के पहले ही आसपास की सभी बेशकीमती कमर्शियल भूमि बेनामी संपत्ति के नाम पर क्रय की जाती है और बिल्डर को पार्टनर बनाकर गृह निर्माण मंडल से पहले ही आसपास की भूमि में प्लाटिंग की व्यवस्था अधिकारी अपनी मिली भगत और ताकत से करते हैं। इसी चक्कर में गृह निर्माण मंडल के न मकान बिकते हैं न लैट बिकता है और बिल्डर द्वारा निर्मित सभी लैट और सभी प्लांट पहले बिक जाते हैं । हाउसिंग बोर्ड के सभी प्रोजेक्ट में ठेकेदारों से 30 से 35त्न कमीशन के चक्कर में घटिया निर्माण किए जाने के कारण से हाउसिंग बोर्ड के कोई भी प्रोजेक्ट को सफलता नहीं मिलती । लैट और कई सारे प्रोजेक्ट पड़े पड़े खराब और कंडम हो गए और कबाड़ बन गए हैं। भ्रष्टाचारियों ने सारी हदें पार कर दी है। पिछले 20 से 25 सालों से गृह निर्माण मंडल को अपनी जागीर समझकर मनमाने ढंग से तालपुरी घोटाला, अभिलाषा परिसर का घोटाला और हिमालय हाइट जैसे घोटाले 1500 से 2000 करोड़ के करीब है । जिसकी गहराई से जांच शासन करे तथा एक-एक इंच जमीन का हिसाब ले और भौतिक सत्यापन किया जाए तो सच्चाई सामने आएगी । टेंडर बुक के विपरीत जाकर प्रोजेक्ट को अनाप-शनाप ढंग से ब्लैकलिस्टेड ठेकेदार से सभी पूरा काम कराया गया। टेंडर की शर्तों का उल्लंघन भी किया गया । अतिरिक्त निर्माण भी कराया गया । अतिरिक्त मकान भी बनाए गए और फिर उस मकान में कब्जा भी किया गया। तालपुरी घोटाले में भारी अनियमिता हुई है। एक ही ठेके के ऊपर दूसरा ठेका जैसा गंभीर अपराध बार-बार किया गया । लोक आयोग के पास जनता से रिश्ता ने पिछले 20 सालों के सभी दस्तावेज सूचना के अधिकार में प्राप्त कर मय शपथ पत्र जमा कराए हैं । लगातार पांच सालों से पेशी उपरांत सभी प्रकार की जांच लगातार लोक आयोग द्वारा की गई और आवेदक पप्पू फरिश्ता के शपथ पत्र के आधार पर बयान भी दर्ज कराया गया प्रकरण एक फरवरी 2020 में लोक आयोग में पंजीयन किया गया, तब से लेकर आज तक गृह निर्माण मंडल के अधिकारी कोई न कोई बहाने से जांच को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे है। हद तो तब हो गई जब भूपेश सरकार के समय सिवाय पेशी देने के अलावा कोई कार्य निष्पादन नहीं हुआ जांच को पूर्ण नहीं किया गया। न ही दोषी अधिकारी को सजा दी गई और अंतत: आयोग ने मामला निरस्त कर दिया।
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