लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला का संतुलित संबोधन प्रेरक: डॉ. रमन सिंह

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Update: 2026-03-16 18:19 GMT
Raipur. रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के विरुद्ध प्रस्तुत अविश्वास प्रस्ताव को सदन द्वारा अस्वीकार किए जाने को भारतीय लोकतंत्र की परिपक्वता, संसदीय परंपराओं और संस्थागत मर्यादा के प्रति गहरी आस्था का सशक्त उदाहरण बताया है। डॉ. रमन सिंह ने कहा कि यह निर्णय केवल एक संसदीय प्रक्रिया का परिणाम नहीं है, बल्कि यह इस बात का प्रमाण है कि भारतीय लोकतंत्र में संस्थाओं की गरिमा, निष्पक्षता और मर्यादा सर्वोपरि है। उन्होंने सदन में जिस स्पष्टता,
गंभीरता
और विवेक के साथ सदस्यों ने अपना मत व्यक्त किया, उसे भारतीय लोकतांत्रिक चेतना की परिपक्वता का संकेत बताया। अविश्वास प्रस्ताव पर निर्णय के बाद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा सदन को संतुलित, विचारपूर्ण और गरिमामय ढंग से संबोधित किए जाने को डॉ. रमन सिंह ने अत्यंत प्रेरक बताया। उन्होंने कहा कि अध्यक्ष पद की निष्पक्षता, संसदीय नियमों की सर्वोच्चता और संसद की गौरवशाली परंपराओं के प्रति उनकी प्रतिबद्धता भारतीय संसदीय लोकतंत्र की मूल भावना को प्रतिबिंबित करती है।
डॉ. रमन सिंह ने कहा कि भारतीय लोकतंत्र की जड़ें केवल आधुनिक संवैधानिक ढांचे में ही नहीं, बल्कि हमारी दीर्घ बौद्धिक और नैतिक परंपरा में भी निहित हैं। इस परंपरा में शासन और सार्वजनिक जीवन को सत्य, उत्तरदायित्व, संवाद और मर्यादा के आधार पर संचालित करने की कल्पना की गई है। उन्होंने केंद्रीय विधानसभा के पहले अध्यक्ष विट्ठलभाई पटेल के उदाहरण का उल्लेख करते हुए कहा कि अध्यक्ष का पद केवल कार्यवाही संचालित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि वह सदन की निष्पक्षता, स्वतंत्रता और गरिमा का प्रतीक होता है।
डॉ. रमन सिंह ने कहा कि दलगत सीमाओं से ऊपर उठकर नियमों और परंपराओं की रक्षा का आदर्श प्रस्तुत करने से भारतीय संसदीय जीवन में अध्यक्ष पद की निष्पक्षता की स्थायी परंपरा स्थापित हुई। उन्होंने संविधान सभा की बहसों का हवाला देते हुए याद दिलाया कि डॉ. भीमराव अम्बेडकर ने कहा था कि संविधान कितना भी उत्कृष्ट क्यों न हो, यदि उसे संचालित करने वाले लोग उसके प्रति निष्ठावान नहीं होंगे, तो वह सफल नहीं हो सकेगा। यही दृष्टि आज भी संसदीय आचरण के लिए मार्गदर्शक है। डॉ. रमन सिंह ने स्वतंत्र भारत के संसदीय इतिहास में ऐसे अवसरों का भी जिक्र किया जब लोकतांत्रिक परिपक्वता के उत्कृष्ट उदाहरण सामने आए। प्रथम लोकसभा के गठन के समय जीवी मावलंकर ने अध्यक्ष पद की गरिमा पर बल देते हुए कहा था कि अध्यक्ष का आसन किसी दल या व्यक्ति का प्रतिनिधि नहीं होता, बल्कि पूरे सदन की सामूहिक चेतना और विश्वास का प्रतीक होता है।
उन्होंने कहा कि भारतीय लोकतंत्र की सबसे बड़ी शक्ति यह है कि वह असहमति को स्थान देता है, विविध विचारों का सम्मान करता है और संवाद के माध्यम से सहमति का मार्ग खोजता है। संसद इसी लोकतांत्रिक चेतना का सर्वोच्च मंच है, जहां व्यक्त प्रत्येक विचार देश के करोड़ों नागरिकों की आकांक्षाओं और अपेक्षाओं का प्रतिनिधित्व करता है। डॉ. रमन सिंह ने विश्वास व्यक्त किया कि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के नेतृत्व में संसद अपनी गौरवशाली संसदीय परंपराओं को और अधिक सुदृढ़ करेगी। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक संवाद, रचनात्मक विमर्श और संस्थागत गरिमा के आदर्शों को नई ऊर्जा मिलेगी, जिन पर भारतीय लोकतंत्र की प्रतिष्ठा आधारित है। डॉ. रमन सिंह ने ओम बिरला को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में लोकसभा संविधान के प्रति अपनी निष्ठा और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता का सशक्त उदाहरण प्रस्तुत करती रहेगी।
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