गृह निर्माण ऋण गबन: ACB ने प्रबंधक प्रदीप कुमार निखरा को किया गिरफ्तार
छग
Raipur. रायपुर। छत्तीसगढ़ में करीब 28 साल पुराने गृह निर्माण ऋण गबन प्रकरण में बड़ी कार्रवाई सामने आई है। एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने शनिवार, 4 अप्रैल 2026 को इस मामले में एक और आरोपी को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपी प्रदीप कुमार निखरा थे, जो सहकारी आवास संघ मर्यादित भोपाल के तत्कालीन प्रबंधक थे। इससे पहले 18 मार्च 2026 को दो अन्य आरोपी, थावरदास माधवानी और बसंत कुमार साहू को गिरफ्तार किया जा चुका है। वहीं, प्रकरण के दो अन्य नामजद आरोपियों की मृत्यु हो चुकी है। जांच में सामने आया कि वर्ष 1995 से 1998 के दौरान शासन की आवासीय योजना के तहत जरूरतमंद लोगों को मकान निर्माण के लिए ऋण उपलब्ध कराया जाता था। इसी योजना का दुरुपयोग करते हुए ‘आधुनिक गृह निर्माण सहकारी समिति मर्यादित रायपुर’ के 186 सदस्यों के नाम पर 1-1 लाख रुपए के हिसाब से कुल 1 करोड़ 86 लाख रुपए का ऋण स्वीकृत कराया गया।
भौतिक सत्यापन के दौरान चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। जिन स्थानों पर मकान निर्माण दर्शाया गया था, वहां न तो कोई मकान पाया गया और न ही संबंधित ऋणधारी मौजूद थे। जांच में यह स्पष्ट हुआ कि कूटरचित दस्तावेज, फर्जी प्रमाण पत्र और आपराधिक षड्यंत्र के जरिए पूरी राशि का गबन किया गया। ACB जांच में यह भी सामने आया कि तत्कालीन अध्यक्ष, आवास पर्यवेक्षक और प्रबंधक ने मिलकर योजनाबद्ध तरीके से फर्जी लोन तैयार किए। प्रदीप कुमार निखरा ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए कागजों में हेरफेर कर राशि निकाली और अन्य आरोपियों के साथ मिलकर 1.86 करोड़ रुपए का बंदरबांट कर लिया।
इस प्रकरण में भारतीय दंड संहिता की धारा 120बी, 406, 409, 420, 467, 468, 471 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 13(1)(c), 13(2) के तहत अपराध दर्ज किया गया है। गिरफ्तार आरोपी को न्यायालय में पेश कर 7 अप्रैल 2026 तक पुलिस रिमांड पर लिया गया है। ACB अधिकारीयों ने बताया कि मामले की जांच अभी जारी है और अन्य संलिप्त आरोपियों की पहचान तथा फर्जीवाड़े की तकनीक को उजागर करने के लिए भी पड़ताल की जा रही है। जांच से यह स्पष्ट हुआ कि योजना का लाभ वास्तविक लाभार्थियों तक नहीं पहुँच पाया और सरकारी राशि का दुरुपयोग करके वित्तीय गबन किया गया।
पुलिस अधिकारियों ने कहा कि इस कार्रवाई से भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने और सरकारी योजनाओं के सही कार्यान्वयन में मदद मिलेगी। अधिकारियों का कहना है कि लंबे समय बाद भी दोषियों को न्याय के कटघरे में लाना यह संदेश देता है कि भ्रष्टाचार की कोई उम्र या समय सीमा नहीं होती। प्रकरण के दौरान एसीबी ने पाया कि फर्जी दस्तावेज, नकली प्रमाण पत्र और वित्तीय हेरफेर के माध्यम से यह गबन योजनाबद्ध तरीके से अंजाम दिया गया। तत्कालीन प्रबंधक और अन्य दोषियों ने सरकारी रिकॉर्ड में बदलाव कर वास्तविक ऋणधारियों की जानकारी को छुपाया और राशि का निजी लाभ लिया।
ACB के सूत्रों ने बताया कि यह मामला लंबे समय तक लंबित रहा और पुराने दस्तावेजों, वित्तीय रिकार्ड और सबूतों के आधार पर जांच करने के बाद ही आरोपी को गिरफ्तार किया गया। मामले में जांच टीम अन्य संलिप्त अधिकारियों और दस्तावेजों की पड़ताल कर रही है ताकि पूरी कड़ियों को जोड़ा जा सके। इस गिरफ्तारी से सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता बनाए रखने और फर्जीवाड़े पर रोक लगाने में मदद मिलेगी। ACB अधिकारियों ने आम नागरिकों से अपील की है कि यदि उन्हें सरकारी योजनाओं में गड़बड़ी या भ्रष्टाचार का पता चले, तो वे तुरंत जानकारी दें।