राजनांदगांव में पर्यावरण संरक्षण के संकल्प के साथ कंडों से जली होलिका

छग

Update: 2026-03-03 13:50 GMT
Rajnandgaon. राजनांदगांव। शहर में मंगलवार को होलिका दहन का पर्व इस बार पर्यावरण संरक्षण के संकल्प के साथ मनाया गया। पारंपरिक उत्साह और श्रद्धा के बीच लोगों ने प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी का संदेश भी दिया। शहर के प्रमुख धार्मिक स्थलों और मोहल्लों में होलिका दहन के आयोजन हुए, जहां श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से पूजन कर धर्म की अधर्म पर विजय का स्मरण किया। शहर के प्राचीन चंद्रमौलेश्वर महाकाल मंदिर में इस वर्ष विशेष पहल की गई। मंदिर प्रशासन ने लकड़ी के स्थान पर गोबर से निर्मित कंडों का उपयोग कर होलिका दहन किया। मंदिर प्रशासन से जुड़े राजेश डागा और पवन डागा ने बताया कि इस पहल का उद्देश्य वायु प्रदूषण को कम करना और पेड़ों की कटाई पर रोक लगाने का संदेश देना है। उनका कहना है कि यदि धार्मिक आयोजनों में भी पर्यावरण के अनुकूल विकल्प अपनाए जाएं, तो समाज में सकारात्मक बदलाव संभव है।

इस अनूठी पहल की श्रद्धालुओं ने सराहना की। उपस्थित लोगों ने कहा कि त्योहारों का आनंद प्रकृति को नुकसान पहुंचाए बिना भी लिया जा सकता है। गोबर के कंडों से होलिका दहन करने से धुएं की मात्रा अपेक्षाकृत कम रही और वातावरण भी स्वच्छ बना रहा। होलिका दहन के अवसर पर मंदिर प्रांगण में भव्य भजन संध्या का आयोजन किया गया। भक्तों ने पारंपरिक भजनों और फाग गीतों के साथ वातावरण को भक्तिमय बना दिया। कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं ने गुलाब की पंखुड़ियों और गेंदे के फूलों से होली खेली। प्राकृतिक रंगों और गुलाल से तिलक लगाकर एक-दूसरे को पर्व की शुभकामनाएं दीं।

शहर के अन्य क्षेत्रों में भी सैकड़ों स्थानों पर होलिका दहन किया गया। महिलाओं और पुरुषों ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार होलिका का पूजन कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। गजलाइन क्षेत्र में भी भव्य आयोजन हुआ, जहां खंडेलवाल समाज और माहेश्वरी समाज के प्रतिनिधियों ने विधिवत पूजन कर सामाजिक एकता का संदेश दिया। पूजन के बाद उपस्थित लोगों ने एक-दूसरे को गुलाल लगाकर होली की बधाई दी और आपसी प्रेम व सद्भाव बनाए रखने का संकल्प लिया। कई स्थानों पर बच्चों और युवाओं ने भी बढ़-चढ़कर भाग लिया। इस तरह राजनांदगांव में इस वर्ष होलिका दहन केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने वाला आयोजन बन गया। शहरवासियों ने यह संकल्प लिया कि आने वाले समय में भी वे पर्यावरण के अनुकूल तरीकों से त्योहार मनाकर प्रकृति की रक्षा में अपना योगदान देंगे।
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