होली गीत, बाजे रे बंसुरिया

Update: 2025-03-14 05:07 GMT

रायपुर। जनता से रिश्ता के पाठक रोशन साहू 'मोखला' राजनांदगांव ने होली गीत ई मेल किया है...

              // बाजे रे बंसुरिया //

का रंग रंगावव रे कान्हा, जनम ले तंय हस करिया।

रंगव न रंगावन देवंव, सुन खावथंव मंय किरिया।।

छिनछिनहा आसा संग,साँसा के सरगम रास रचागे।

ननपन ले तँय चलवंता, अजी तोरे चाला चिन्हागे।।

फगुवा मनागे अउ बाजे रे बंसुरिया......

नइ लागे तोला बात बानी, अजी करथस मनमानी।

सबले बड़े तहीं गियानी, काय चलही तोर सियानी।।

गारी देंवव का जोहारंव, बेरा कुबेरा तुंही ल पाँवव।

तोर ले रूठंव मंय मानंव,तोर ले हाँसव मुसकांवव।।

झूम झूम नाचे, सबो संगी रे जहुँरिया........

अब करंव मंय करजोरी, फेर झन कर जोराजोरी।

छोड़ बइँहा सुकुमारी,आवँव जी बरसाना के गोरी।।

जनम के रे तंय चोरहा,चोराये आँखी के निंदरिया।

करथस तँय मनमानी, नइ लागे काय मया पिरिया।।

धाम भुलागे आगे,सब देवन रे करिया.........

हरज बरज के सबो हारे,तभो तो नंगत ले रंग डारे।

माते हावय बिरिज मंडल, होगे दसो दिसा मतवारे।।

भींजे रे मोर अंगिया चोली,भीजे रे बइरी चुनरिया।

लाज नइ लागे का रे बइरी, कइसे होगे निरदइया।।

देख-देख नाचे,संगे रे सास बहुरिया....... 

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