प्रधानाध्यापक आत्महत्या केस में उप अभियंता समेत 2 को हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत

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Update: 2026-07-14 08:19 GMT
Bijapur. बीजापुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बीजापुर जिले के चर्चित पालनार स्कूल प्रधानाध्यापक आत्महत्या मामले में दो आरोपियों को बड़ी राहत दी है। अदालत ने स्कूल भवन निर्माण कार्य से जुड़े उप अभियंता शैलेश कुमार वसम और छवितेश डोंगरे को अग्रिम जमानत मंजूर कर दी है। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा की एकल पीठ ने एमसीआरसीए क्रमांक 805/2026 पर सुनवाई करते हुए दोनों आरोपियों को शर्तों के साथ अग्रिम जमानत देने का आदेश जारी किया। यह मामला बीजापुर थाना क्षेत्र के अपराध क्रमांक 35/2026 से जुड़ा हुआ है, जिसमें भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 108 और 3(5) के तहत अपराध दर्ज किया गया था। हाईकोर्ट ने मामले के तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए दोनों आरोपियों को राहत दी। अदालत ने कहा कि गिरफ्तारी की स्थिति में निर्धारित शर्तों का पालन करने पर उन्हें रिहा किया जाए।
22 अप्रैल को पेड़ से लटका मिला था प्रधानाध्यापक का शव
मामला 22 अप्रैल 2026 का है, जब बीजापुर जिले के पालनार क्षेत्र में सरकारी स्कूल के प्रधानाध्यापक राजू पुजारी का शव गांव के पास एक पेड़ से फांसी पर लटका हुआ मिला था। घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में मौत का कारण आत्महत्या बताया गया था। पुलिस जांच के दौरान मौके से एक सुसाइड नोट भी बरामद हुआ था। सुसाइड नोट में स्कूल भवन निर्माण को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए थे। मृतक प्रधानाध्यापक ने कथित तौर पर भवन निर्माण में घटिया सामग्री के इस्तेमाल की बात लिखी थी। उन्होंने आशंका जताई थी कि यदि भविष्य में भवन से संबंधित कोई हादसा होता है तो इसकी जिम्मेदारी उन पर डाली जा सकती है।
निर्माण कार्य में लापरवाही के आरोपों के बाद दर्ज हुआ था मामला
पुलिस जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर निर्माण कार्य से जुड़े लोगों की भूमिका की जांच की गई। इसी क्रम में उप अभियंता शैलेश कुमार वसम और निर्माण कार्य से जुड़े छवितेश डोंगरे के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। आरोप था कि निर्माण कार्य में कथित अनियमितताओं और दबाव के कारण प्रधानाध्यापक मानसिक तनाव में थे। हालांकि, बचाव पक्ष ने इन आरोपों को गलत बताते हुए अदालत में कहा कि दोनों आरोपियों को बिना ठोस आधार के मामले में शामिल किया गया है।
बचाव पक्ष ने कहा, आत्महत्या के लिए उकसाने का कोई प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं
हाईकोर्ट में आरोपियों की ओर से पैरवी करते हुए अधिवक्ताओं ने तर्क दिया कि मामले में आत्महत्या के लिए उकसाने का कोई प्रत्यक्ष प्रमाण उपलब्ध नहीं है। बचाव पक्ष ने कहा कि प्रधानाध्यापक ने मानसिक दबाव के चलते आत्महत्या जैसा कदम उठाया और इसके लिए आवेदकों को जिम्मेदार ठहराने का कोई पर्याप्त आधार नहीं है। उन्होंने अदालत से दोनों आरोपियों को अग्रिम जमानत देने की मांग की। वहीं अभियोजन पक्ष ने मामले की गंभीरता और जांच से जुड़े तथ्यों को अदालत के सामने रखा।
हाईकोर्ट ने शर्तों के साथ दी अग्रिम जमानत
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने रिकॉर्ड में उपलब्ध तथ्यों का अवलोकन किया। अदालत ने माना कि वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए दोनों आवेदकों को अग्रिम जमानत दी जा सकती है। अदालत ने निर्देश दिया कि यदि दोनों आरोपियों की गिरफ्तारी होती है तो उन्हें व्यक्तिगत मुचलका और एक-एक जमानतदार पेश करने पर रिहा किया जाएगा। इसके अलावा कोर्ट ने कई शर्तें भी लगाई हैं। दोनों आरोपियों को गवाहों को प्रभावित नहीं करने, जांच और ट्रायल में सहयोग करने, अदालत की प्रत्येक सुनवाई में उपस्थित रहने और भविष्य में किसी अपराध में शामिल नहीं होने का निर्देश दिया गया है।
मामले में आगे की जांच जारी
हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद दोनों आरोपियों को फिलहाल राहत मिल गई है। हालांकि, मामले की जांच और न्यायिक प्रक्रिया आगे जारी रहेगी। प्रधानाध्यापक राजू पुजारी आत्महत्या मामले में स्कूल भवन निर्माण और उससे जुड़े आरोपों की जांच पुलिस और संबंधित विभागों द्वारा की जा रही है। प्रशासन की ओर से मामले के सभी पहलुओं की जांच कर कार्रवाई की बात कही गई है।
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