NDPS एक्ट के तहत बड़ी सजा: गांजा तस्कर को मिली 7 साल की जेल
न्यायधीश पंकज सिंहा के ले रही त्वरित और बड़े फैसले
Raipur. रायपुर। थाना सरस्वती नगर, रायपुर के अपराध क्रमांक 241/2023 में विशेष न्यायालय (एनडीपीएस एक्ट) ने अहम फैसला सुनाते हुए आरोपी को दोषी करार दिया है। माननीय विशेष न्यायाधीश पंकज कुमार सिन्हा, एन.डी.पी.एस. एक्ट न्यायालय, रायपुर ने स्वापक औषधि एवं मनः प्रभावी पदार्थ अधिनियम 1985 की धारा 20(b)(ii)(B) के तहत आरोपी भार्गव ताण्डी उर्फ चिकू ताण्डी को 7 वर्ष के कठोर कारावास एवं 70 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है। प्रकरण के अनुसार, आरोपी भार्गव ताण्डी उर्फ चिकू ताण्डी पिता नान्हू ताण्डी, उम्र 20 वर्ष, निवासी मोती लाल नगर, पटेल किराना के पीछे, थाना सरस्वती नगर, रायपुर को गांजा से जुड़े अपराध में गिरफ्तार किया गया था। पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई के बाद आरोपी के विरुद्ध एनडीपीएस एक्ट के तहत प्रकरण पंजीबद्ध कर न्यायालय में चालान प्रस्तुत किया गया। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर न्यायालय ने आरोपी को दोषी पाया।
विशेष न्यायाधीश ने अपने निर्णय में स्पष्ट किया कि आरोपी द्वारा किया गया अपराध गंभीर प्रकृति का है, जो समाज और युवाओं को नशे की गिरफ्त में धकेलने वाला है। इसी को ध्यान में रखते हुए न्यायालय ने आरोपी को 7 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही 70,000 रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। अर्थदंड अदा न करने की स्थिति में आरोपी को अतिरिक्त 7 माह का कठोर कारावास भुगतना होगा। न्यायालय ने यह भी आदेश दिया है कि अभियुक्त द्वारा इस प्रकरण के अन्वेषण एवं विचारण के दौरान न्यायिक अभिरक्षा में बिताई गई अवधि को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 428 के प्रावधानों के अनुरूप सजा अवधि में समायोजित (मुजरा) किया जाएगा। इस संबंध में पृथक से अभिरक्षा अवधि का प्रमाण पत्र संलग्न करने के निर्देश भी दिए गए हैं। फैसले के बाद न्यायालय द्वारा अधीक्षक, केंद्रीय जेल रायपुर के नाम से वारंट जारी किया गया है।
वारंट में स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि दोषसिद्ध अभियुक्त को इस वारंट के साथ केंद्रीय जेल रायपुर में हिरासत में लेकर सजा की तामील कानून के अनुसार की जाए। साथ ही यह भी उल्लेख किया गया है कि यदि जुर्माना या उसका कोई भाग सजा की अवधि के दौरान वसूल या जमा हो जाता है, तो अर्थदंड अदा न करने की स्थिति में दी गई अतिरिक्त कैद की सजा भारतीय दंड संहिता की धारा 68 एवं 69 के प्रावधानों के अनुसार समाप्त मानी जाएगी। न्यायालय ने जेल प्रशासन को यह भी निर्देशित किया है कि सजा की तामीली पूर्ण हो जाने के बाद उसकी विधिवत रिपोर्ट तैयार कर इस वारंट पर अंकित करते हुए उसे पुनः न्यायालय में प्रस्तुत किया जाए। इस फैसले को रायपुर में नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ एक कड़ा संदेश माना जा रहा है। पुलिस और अभियोजन विभाग का कहना है कि एनडीपीएस एक्ट के तहत ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई जारी रहेगी, ताकि समाज को नशे की बुराई से बचाया जा सके। न्यायालय के इस निर्णय से यह स्पष्ट है कि नशीले पदार्थों की तस्करी या अवैध कारोबार में लिप्त पाए जाने वालों के प्रति कानून कोई नरमी नहीं बरतेगा।