Surguja. सरगुजा। एक ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर्यावरण संरक्षण के लिए “हर व्यक्ति एक पौधा लगाए – माँ के नाम” जैसी मुहिम को गति दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सरगुजा जिले के सीतापुर क्षेत्र में लकड़ी तस्करों का गिरोह खुलेआम हरियाली को चंद पैसों के लिए बेच रहा है। ग्रामीण इलाकों में यूकेलिप्टस, सेमर और अन्य प्रजातियों के पेड़ों की अवैध कटाई बेरोकटोक जारी है। गुरुवार रात पुलिस ने गश्त के दौरान इसी अवैध कारोबार का भंडाफोड़ करते हुए 30 टन लकड़ी से भरा ट्रक पकड़ लिया।
कैसे हुआ खुलासा?
जानकारी के अनुसार, बीती रात पुलिस टीम ने संदिग्ध ट्रक UP 21 ET 3099 को रोककर जांच की। जब वाहन की तलाशी ली गई तो उसमें भारी मात्रा में यूकेलिप्टस की लकड़ी भरी हुई थी। पुलिस अधिकारियों ने चालक से वैध दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा, लेकिन चालक कोई ठोस कागजात नहीं दिखा सका। केवल चार महीने पुराना परमिट सामने आया, जो अब अमान्य हो चुका है। थाना प्रभारी गौरव पांडे ने बताया, “चालक के पास दिखाने के लिए जो परमिशन था, वह वैध नहीं है। हमने ट्रक को जब्त कर लिया है और आगे की कार्रवाई के लिए वन विभाग को सूचना दे दी गई है। विभाग की रिपोर्ट के आधार पर तस्करों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।”
तस्करी का तरीका
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, लकड़ी माफिया अब गाँव-गाँव में अपने एजेंट भेजते हैं। ये एजेंट ग्रामीणों को लालच देकर या कम कीमत पर पेड़ खरीदकर कटवा लेते हैं। कई बार एक ही परमिट का बार-बार इस्तेमाल कर महीनों तक पेड़ काटे जाते हैं। इस नेटवर्क में ट्रक मालिक, स्थानीय दलाल और कुछ प्रभावशाली लोग भी शामिल बताए जाते हैं।
प्रशासन पर सवाल
यह घटना प्रशासनिक निगरानी पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है। ग्रामीणों का कहना है कि फिंगेश्वर, सीतापुर और आसपास के क्षेत्रों में रोजाना दर्जनों ट्रक लकड़ी लेकर निकलते हैं। ऐसे में वन विभाग और जिला प्रशासन की आंखों के सामने यह अवैध कारोबार कैसे चल रहा है? क्या यह कार्यवाही केवल एक दिखावा है या फिर इससे बड़े गिरोह की परतें खुलने वाली हैं?
पर्यावरणीय नुकसान
विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार हो रही अवैध कटाई से क्षेत्र की पारिस्थितिकी पर गंभीर असर पड़ रहा है।
ज़मीन का कटाव बढ़ रहा है – पेड़ों की जड़ों से मिट्टी बंधी रहती है, लेकिन लगातार कटाई से जमीन बंजर होने का खतरा है।
जलस्तर पर प्रभाव – पेड़ पानी के प्राकृतिक भंडारण को बनाए रखते हैं, लेकिन कटाई से भूजल स्तर गिर रहा है।
पक्षियों और वन्यजीवों का निवास स्थान खत्म – पेड़-पौधों की संख्या घटने से कई प्रजातियां पलायन करने लगी हैं।
ऑक्सीजन की कमी – यूकेलिप्टस और सेमर जैसे वृक्ष बड़ी मात्रा में ऑक्सीजन प्रदान करते हैं। इनकी कमी मानव जीवन पर भी सीधा असर डालेगी।
क्या होनी चाहिए कार्रवाई?
विशेषज्ञ और पर्यावरण प्रेमी इस पर ठोस कदम उठाने की मांग कर रहे हैं।
सभी लकड़ी परिवहन पर जीपीएस ट्रैकिंग अनिवार्य हो।
परमिशन की सत्यता ऑनलाइन वेरीफिकेशन से जुड़ी हो।
वन विभाग की साप्ताहिक निरीक्षण रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।
पेड़ काटने से पहले ग्राम पंचायत व ग्रामीणों की अनुमति अनिवार्य की जाए।
तस्करी में पकड़े गए वाहनों को तुरंत सीज़ किया जाए और दोषियों पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई हो।
चेतावनी का संकेत
सीतापुर में 30 टन लकड़ी से भरे ट्रक की जब्ती महज एक घटना नहीं है, बल्कि यह पूरे प्रदेश और देश के लिए चेतावनी है। यदि इसी तरह लकड़ी माफिया खुलेआम पेड़ों की कटाई करते रहे, तो आने वाली पीढ़ियां केवल किताबों और कहानियों में ही घने जंगल, ताज़ी हवा और छांव का अनुभव कर पाएंगी। सरगुजा की हरियाली को बचाने के लिए सरकार, प्रशासन और समाज को मिलकर कदम उठाने होंगे। वरना यह तस्करी सिर्फ पेड़ ही नहीं, बल्कि आने वाले कल की साँसों को भी चुरा लेगी।
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